मल्टीप्लेक्स स्टाफ ने दर्शक को परिवार सहित फिल्म नहीं देखने दी।
दिलजीत दोसांझ की फिल्म सतलुज का विवाद अभी पूरी तरह सिमटा नहीं, इससे पहले पंजाबी फिल्म दस्तार को लेकर भी हंगामा हो गया। अमृतसर के ट्रिलियम मॉल स्थित मल्टीप्लेक्स में मंगलवार शाम को फिल्म देखने आए एक दर्शक ने मल्टीप्लेक्स के स्टाफ और मैनेजर पर आरोप लगा
.
व्यक्ति ने यह भी कहा कि धुरंधर और एनिमल जैसी फिल्मों को सभी जगह दिखाया गया। मोबाइल फोन और टीवी पर भी दिखा दी गईं। जब बात सिखों के कल्चर को प्रमोट करने वाली फिल्मों की आई तो सिखों के बच्चों को ही फिल्म नहीं देखने दी जा रही।
इसे लेकर व्यक्ति ने काफी देर तक मल्टीप्लेक्स के स्टाफ से बहस की। वहां मौजूद सिख दर्शकों और स्टाफ से भी उस व्यक्ति ने सपोर्ट मांगा। हालांकि, सभी ने उसे नियम ही समझाया। इसके बाद व्यक्ति बिना फिल्म देखे ही लौट गया। इसका एक वीडियो भी व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है।
इस बारे में मल्टीप्लेक्स के स्टाफ का कहना है कि फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने ‘A’ सर्टिफिकेट दिया है। नियमानुसार वह 18 साल से कम उम्र के लोगों को फिल्म देखने की इजाजत नहीं दे सकते। इसलिए, उस व्यक्ति को रोका गया।
ज्वेलर वरिंदर सिंह अपने परिवार के साथ फिल्म देखने पहुंचे थे।
4 बच्चों के साथ फिल्म देखने पहुंचे थे ज्वेलर
जानकारी के अनुसार, अमृतसर के मजीठा रोड पर रहने वाले वरिंदर सिंह मंगलवार रात को दस्तार फिल्म देखने ट्रिलियन मॉल गए थे। उनके साथ उनकी पत्नी और 4 बच्चे भी थे। पेशे से ज्वेलर और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर वरिंदर सिंह के चारों बच्चे नाबालिग हैं।
वरिंदर के अनुसार, उन्होंने जब दस्तार फिल्म के टिकट मांगे तो स्टाफ ने बच्चे देखकर टिकट देने से इनकार कर दिया। वे कहने लगे कि फिल्म एडल्ट है। इसे बच्चे नहीं देख सकते।
ज्वेलर का दावा- मेकर्स ने कहा कि मूवी बच्चों के हिसाब से बनाई
वरिंदर सिंह का दावा है कि उन्होंने मूवी के मेकर्स से भी बात की है और उनसे पूछा है कि इसे एडल्ट क्यों कहा गया है? तो मेकर्स ने कहा कि मूवी बच्चों के हिसाब से बनाई गई थी, लेकिन बोर्ड ने उसे A सर्टिफिकेट दिया है। अब इसे A सर्टिफिकेट क्यों दिया है, इसका जवाब उनके पास भी नहीं है।
वरिंदर सिंह ने कहा- जब भी बात सिखों के इतिहास को होती है तो उसे बैन कर दिया जाता है। जबकि, धुरंधर जैसी मूवी, जिसमें इतना वॉयलेंस (हिंसा) दिखाई गई है, वह कहीं भी देखी जा सकती है। क्योंकि, उसमें सरकार का अपना रोल है। मेरे पास कई जानकारों के संदेश आए हैं। उन्होंने बताया है कि मूवी में कोई एडल्ट सीन नहीं है।

पंजाबी फिल्म दस्तार 17 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है।
फिल्म को अंतिम समय में दिया गया सर्टिफिकेट
फिल्म के निर्माताओं (व्हाइट हिल्स स्टूडियोज) और मेन एक्टर तरसेम जस्सर के आधिकारिक बयानों के अनुसार, फिल्म को ‘A’ सर्टिफिकेट मिला है, जिसे सेंसर बोर्ड ने बेहद आखिरी वक्त पर कुछ कट्स लगाने के बाद जारी किया है।
प्रोड्यूसर्स ने बताया कि भारत में फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करने के लिए सेंसर सर्टिफिकेट रिलीज से ठीक एक रात पहले (16 जुलाई की रात को) मिल पाया था। भारतीय सेंसरशिप नियमों के कारण मेकर्स को फिल्म की मूल कहानी में कई कट्स करने पड़े, जिसके बाद ही इसे थियेट्रिकल रिलीज की मंजूरी दी गई।
सिखों के इतिहास और 1980 के दशक में ब्रिटेन में सिख प्रवासियों पर हुए नस्लीय हमलों व संघर्ष की संवेदनशील थीम (सच्ची घटनाओं से प्रेरित हिंसा व पुलिस क्रूरता के दृश्यों) के कारण बोर्ड ने इसे केवल वयस्कों (18+) के लिए उपयुक्त माना।
हालिया फिल्मों को लेकर CBFC सतर्क
सेंसर बोर्ड हाल के दिनों में पंजाब के इतिहास, 1984 के घटनाक्रम और सिख पहचान से जुड़ी फिल्मों (जैसे दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’) को लेकर काफी सतर्कता बरत रहा है। किसी भी विवाद से बचने के लिए बोर्ड ऐसी फिल्मों को व्यापक पारिवारिक दर्शकों (U या UA) के बजाय केवल वयस्कों (A) तक ही सीमित रखने का फैसला ले रहा है।





॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰
यह खबर भी पढ़ें…
CJP का आंदोलन, पंजाबी एक्टर-सिंगर बंटे:बब्बू मान बोले- हर बार हम ही क्यों लाठी खाएं; सोनम बाजवा ने टूटे दिल की इमोजी लगाई

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन पर पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री बंट गई है। एक तरफ दिलजीत दोसांझ और सोनू सूद ने लाठीचार्ज पर सवाल उठाए। उन्होंने छात्रों के अधिकारों और उनकी मांगों को जायज ठहराया है। वहीं बब्बू मान ने आंदोलन के समर्थन से इनकार कर दिया। पढ़ें पूरी खबर…













