Neeraj Chopra; India Commonwealth Games 2026 Gold Medal Contenders | ACTPnews

Neeraj Chopra; India Commonwealth Games 2026 Gold Medal Contenders


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स्पोर्ट्स डेस्क31 मिनट पहलेलेखक: राजकिशोर

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ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सामने 28 साल में अपने सबसे कमजोर प्रदर्शन का खतरा मंडरा रहा है। भारतीय ओलिंपिक संघ और अलग-अलग स्पोर्ट्स फेडरेशन की इंटरनल रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को पैरा स्पोर्ट्स सहित 13 खेलों में 31 पदक मिलने का अनुमान है, जिसमें सिर्फ 6 गोल्ड शामिल हैं।

रिपोर्ट में नीरज चोपड़ा को भी गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है। नीरज ने 2018 में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। वे ओलिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट भी रहे हैं। जिन सात खिलाड़ियों को गोल्ड का दावेदार माना जा रहा था, उनमें से एक अरुण कुमार गुरुवार को डोप टेस्ट में फेल हो गया है। नीचे दी गई तस्वीर में बचे दावेदार देख सकते हैं।

2002 से हर बार भारत ने जीते 15 या ज्यादा गोल्ड

भारत के मेडल्स कम क्यों आएंगे?

1. जिन खेलों से सबसे ज्यादा मेडल आते हैं, वही इस बार बाहर

कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की सफलता का आधार शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे खेल रहे हैं। इन खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार पदक जीते हैं। ग्लासगो 2026 के कार्यक्रम में इन तीनों खेलों को शामिल नहीं किया गया है। यही भारत के लिए सबसे बड़ा झटका है।

ग्लासगो 2026 में बर्मिंघम 2022 के 19 की तुलना में सिर्फ 10 खेल होंगे। भारत के कई मेडल स्पोर्ट्स शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी, स्क्वैश और क्रिकेट इस बार शामिल नहीं हैं। बर्मिंघम में भारत के 61 में से 30 मेडल इन्हीं खेलों से आए थे।

यही वजह है कि इस बार भारत का प्रदर्शन केवल खिलाड़ियों के फॉर्म पर नहीं, बल्कि गेम्स के स्पोर्ट्स प्रोग्राम पर भी निर्भर करेगा।

2. नीरज की फॉर्म चिंता का विषय

भारत के कुछ बड़े मेडल दावेदारों की मौजूदा फॉर्म भी चिंता बढ़ा रही है। जेवलिन थ्रो में भारत की सबसे बड़ी उम्मीद नीरज चोपड़ा हैं। लेकिन इस बार उनके सामने चुनौती पहले से ज्यादा कठिन होगी।

उनकी मौजूदा फॉर्म भी पहले जैसी नहीं है और पाकिस्तान के अरशद नदीम के अलावा ऑस्ट्रेलिया के कैमरन मैकिन्टायर जैसे खिलाड़ी भी नीरज को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। इसलिए रिपोर्ट में नीरज को गोल्ड का दावेदार नहीं माना गया है।

बॉक्सिंग में भारत की उम्मीदें लवलीना बोरगोहेन जैसे बड़े नामों पर होंगी। हालांकि, पिछले कुछ समय में उनका प्रदर्शन उस लेवल का नहीं रहा है, जिसके लिए वे जानी जाती हैं।

भारत के कई अन्य बड़े खिलाड़ियों के साथ भी यही स्थिति है। वे पदक जीतने की क्षमता रखते हैं, लेकिन हालिया प्रदर्शन के आधार पर उनके गोल्ड मेडल जीतने की गारंटी नहीं दी जा सकती।

3. पांच खेल ऐसे, जिनमें भारत हमेशा से कमजोर

इस बार शामिल 10 में से 5 खेल स्वीमिंग, साइक्लिंग, जूडो, नेटबॉल और जिम्नास्टिक्स में भारत हमेशा से कमजोर रहा है। इसलिए इस बार भारत के मेडल काउंट में बड़ी गिरावट की आशंका है।

क्या अहमदाबाद 2030 में बदलेगी तस्वीर?

ग्लासगो गेम्स के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत करेगा। अहमदाबाद 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2030 गेम्स में 15 से 17 खेल शामिल किए जा सकते हैं। इससे भारत को शूटिंग, कुश्ती और बैडमिंटन जैसे अपने मजबूत खेलों को वापस कार्यक्रम में शामिल कराने का फायदा मिल सकता है।

खेलों की संख्या बढ़ने के साथ मेडल इवेंट्स भी बढ़ेंगे, जिससे भारत के पदक जीतने के मौके बढ़ सकते हैं। ऐसे में ग्लासगो 2026 भारत के लिए चुनौतीपूर्ण एडिशन हो सकता है, लेकिन अहमदाबाद 2030 में तस्वीर पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।

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