नई दिल्ली5 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम के बढ़ते मामलों को देखते हुए देशभर के लिए निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को चार हफ्ते में म्यूल अकाउंट्स पर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने को कहा है। साथ ही, देश भर में साइबर धोखाधड़ी रोकने के तंत्र को तेजी से लागू करने को कहा है।
म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग अपराधी ठगी, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध रूप से कमाए गए पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए करते हैं।
CJI सूर्यकांत,जस्टिस जॉयमाल्य बागची व जस्टिस वी मोहना की बेंच ने यह निर्देश केंद्रीय गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर की स्टेटस रिपोर्ट पर गौर करने के बाद दिए हैं।

गृह मंत्रालय के मॉड्यूल को लागू करने के निर्देश
बेंच ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और पुलिस को गृह मंत्रालय की 2 जनवरी की SOP के तहत शुरू किए गए शिकायत निवारण और धन वापसी की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करें, ताकि प्रभावित लोग अपने कानूनी अधिकारों का उपयोग करते हुए पहले इन विकल्पों का लाभ उठा सकें।
साइबर क्राइम सेंटर और ई-जीरो FIR पर जोर
जिन राज्यों ने अभी तक स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर नहीं हैं, उन्हें एक माह दिया गया है। साथ ही, राज्यों को इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर के परामर्श से ई-जीरो एफआईआर (e-Zero FIR) तंत्र को अपनाने को कहा गया है।
कोर्ट ने साइबर फ्रॉड से जुड़े बैंक अकाउंट फ्रीज करने के मामलों का तेजी से निपटारा करने के निर्देश भी दिए हैं।
टेलीकॉम सेवाओं पर समय आधारित प्रतिबंध का प्रस्ताव
बेंच ने इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी को निर्देश दिया है कि वे बैंकों और मध्यस्थों के साथ मिलकर डिजिटल अरेस्ट स्कैम रोकने, ठगी की रकम वापस पाने और जांच में मदद के लिए तकनीकी उपायों पर चर्चा करें।
इसके अलावा, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), दूरसंचार विभाग (DoT) और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर को निर्देश दिया गया है कि वे मध्यस्थों के साथ मिलकर ऑडियो और वीडियो कॉल के लिए टेलीकॉम सेवाओं पर समय आधारित प्रतिबंध लगाने के प्रस्तावों की जांच करें।
16 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी। उस दिन कोर्ट एक नई स्टेटस रिपोर्ट पर विचार करेगा।
इस रिपोर्ट में राज्यवार और बैंकवार दर्ज शिकायतों, उनके निपटारे, जारी किए गए मनी रेस्टोरेशन ऑर्डर और पीड़ितों को लौटाई गई राशि का ब्योरा शामिल होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान दिए हैं।
पिछले साल कोर्ट ने इन घटनाओं का संज्ञान लिया था, जिसमें जालसाज पुलिस या न्यायिक अधिकारियों का रूप धरकर नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों से पैसे वसूलते हैं।
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नई दिल्ली।

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