‘रामायण’ में लारा दत्ता बनीं कैकेयी, लेकिन कौन निभा रहा राम और लक्ष्मण की मां कौशल्या-सुमित्रा का रोल? राजा दशरथ की रानियों से उठा पर्दा | ACTPnews

'रामायण' में लारा दत्ता बनीं कैकेयी, लेकिन कौन निभा रहा राम और लक्ष्मण की मां कौशल्या-सुमित्रा का रोल? राजा दशरथ की रानियों से उठा पर्दा


बॉलीवुड निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में भारतीय सिनेमा के कई बड़े सितारे एक साथ नजर आने वाले हैं। जहां एक ओर रणबीर कपूर (भगवान राम), साई पल्लवी (माता सीता) और यश (रावण) की मुख्य भूमिकाओं को लेकर हर तरफ चर्चा है, वहीं दूसरी ओर यह फिल्म अयोध्या के राजपरिवार को बड़े पर्दे पर जीवंत करने के लिए एक मजबूत और प्रभावशाली सपोर्टिंग कास्ट को भी साथ लाई है। इस पौराणिक महाकाव्य में राजा दशरथ की तीनों रानियों, माता कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा की भूमिकाओं के लिए इंदिरा कृष्णन, लारा दत्ता और सोनल झा का चयन किया गया है। अगर मुख्य पात्रों की तुलना में इनका स्क्रीन टाइम सीमित हो सकता है, लेकिन कहानी की दिशा और रामकथा के महत्वपूर्ण मोड़ों को आकार देने में इन तीनों चरित्रों का योगदान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

महारानी कौशल्या के किरदार में इंदिरा कृष्णन

राजा दशरथ की सबसे बड़ी रानी और भगवान राम की माता कौशल्या के पवित्र चरित्र को अभिनेत्री इंदिरा कृष्णन पर्दे पर साकार कर रही हैं। भारतीय टेलीविजन और सिनेमा जगत में इंदिरा एक बेहद जाना-पहचाना नाम हैं। वे पिछले दो दशकों से भी अधिक समय से मनोरंजन उद्योग में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। छोटे पर्दे पर उन्होंने ‘कृष्णाबेन खाखरावाला’, ‘कहानी घर घर की’, ‘ये है चाहतें’, ‘सावी की सवारी’ और ‘दुर्गा और चारू’ जैसे धारावाहिकों से घर-घर में अपनी खास पहचान बनाई। वहीं, बड़े पर्दे पर वे ‘तेरे नाम’, ‘हॉलिडे: ए सोल्जर इज नेवर ऑफ ड्यूटी’ और रणबीर कपूर स्टारर फिल्म ‘एनिमल’ में अपने अभिनय की छाप छोड़ चुकी हैं।

एक हालिया इंटरव्यू के दौरान इंदिरा ने महारानी कौशल्या का किरदार निभाने को अपने करियर का सबसे संतोषजनक और भावुक अनुभव बताया। रामायण की गाथा में कौशल्या को उनके अपार धैर्य, आत्म-सम्मान और अटूट विश्वास के लिए याद किया जाता है। भगवान राम की माँ के रूप में वे न केवल राजपरिवार का भावनात्मक आधार हैं, बल्कि हर विकट स्थिति में गरिमा और सहनशीलता का प्रतीक भी बनकर उभरती हैं।

रानी कैकेयी के रूप में लारा दत्ता

पूर्व मिस यूनिवर्स और बॉलीवुड की स्थापित अभिनेत्री लारा दत्ता इस फिल्म में रानी कैकेयी का जटिल एवं महत्वपूर्ण किरदार निभा रही हैं। कैकेयी ही वह चरित्र हैं जिनके एक फैसले ने पूरी रामायण का रुख बदल दिया था। साल 2000 में मिस यूनिवर्स का प्रतिष्ठित ताज अपने नाम करने के बाद, लारा ने फिल्म ‘अंदाज़’ से बॉलीवुड में अपने अभिनय सफर की सफल शुरुआत की थी, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार भी मिला था। इसके बाद उन्होंने ‘मस्ती’, ‘नो एंट्री’, ‘भागम भाग’, ‘पार्टनर’, ‘हाउसफुल’, ‘चलो दिल्ली’ और ‘बेल बॉटम’ जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया। हाल के वर्षों में उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म की ओर भी रुख किया है और ‘कौन बनेगी शिखरवटी’ तथा ‘रणनीति: बालाकोट एंड बियॉन्ड’ जैसी चर्चित वेब सीरीज में अपनी सशक्त अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया है।

पौराणिक इतिहास में रानी कैकेयी सबसे चर्चित और विश्लेषित पात्रों में से एक रही हैं। अपनी दासी मंथरा के बहकावे में आकर वे राजा दशरथ से अपने वे दो वरदान माँग लेती हैं जो राजा ने उन्हें एक युद्ध के दौरान देने का वचन दिया था। कैकेयी अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राजसिंहासन और श्रीराम के लिए 14 वर्षों का वनवास माँगती हैं। यही फैसला इस महाकाव्य के सबसे मुख्य संघर्ष और राम-रावण युद्ध की नींव रखता है।

रानी सुमित्रा के रूप में सोनल झा

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और सामने आए ट्रेलर के अनुसार प्रतिभाशाली अभिनेत्री सोनल झा राजा दशरथ की तीसरी पत्नी और लक्ष्मण व शत्रुघ्न की माता, रानी सुमित्रा की भूमिका निभाती हुई दिखाई देंगी। सोनल झा ने थिएटर, टीवी शो, फिल्मों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर अपने स्वाभाविक और सहज अभिनय से एक अलग पहचान बनाई है। उन्हें पहली बार लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘बालिका वधू’ से बड़ा ब्रेक और पहचान मिली थी। इसके बाद उन्होंने ‘आर्टिकल 15’, ‘धड़क’, ‘द फेम गेम’, ‘महाराज’ और ‘रज्जो’ जैसे कई बड़े प्रोजेक्ट्स में काम किया। सोनल हमेशा से ही अपने संजीदा और प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए सराही जाती रही हैं।

रामायण में महारानी सुमित्रा को अयोध्या की सबसे विवेकशील और शांत रानी माना गया है। राजनीतिक उथल-पुथल से दूर रहने के बावजूद, संकट के क्षणों में उनका मार्गदर्शन और त्याग अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होता है। वे ही अपने पुत्र लक्ष्मण को बिना किसी हिचकिचाहट के राम और सीता की सेवा के लिए वन जाने की आज्ञा देती हैं।

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