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नई दिल्ली6 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा, भरण-पोषण और सम्मान के लिए उनके बच्चों को संपत्ति से निकाला जा सकता है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन्स एक्ट, 2007 के तहत बने ट्रिब्यूनल को जरूरत पड़ने पर बेदखली का आदेश देने का अधिकार है।
कोर्ट ने कहा, “सभ्य समाज का स्तर अक्सर इस बात से तय होता है कि वह अपने बुजुर्गों को कितना सम्मान, गरिमा और सुरक्षा देता है।” सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें बेटे और बहू को घर से निकालने के ट्रिब्यूनल के आदेश को पलट दिया गया था।
लखनऊ के मकान से जुड़ा था मामला
मामला लखनऊ के विकास नगर में रहने वाले रवि कांत गुप्ता से जुड़ा था। गुप्ता ने 5 जून 2022 को अपने बेटे को मकान से निकालने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन दिया था। यह मकान उनकी खुद की खरीदी हुई संपत्ति थी।
मामले में सामने आया कि गुप्ता की 81 साल की मां को कथित तौर पर घर छोड़कर वृद्धाश्रम जाने के लिए मजबूर होना पड़ा था। SDM ने 15 नवंबर 2022 को बेटे को घर से निकालने का आदेश दिया। जिला मजिस्ट्रेट ने भी 9 अगस्त 2023 को इस आदेश को बरकरार रखा और बेटे-बहू को मकान खाली करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने बेदखली का आदेश रद्द किया था
बेटे और बहू ने SDM और जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा था कि 2007 का कानून अधिकारियों को संपत्ति से बेदखल करने का अधिकार नहीं देता। इसी आधार पर उसने दोनों आदेश रद्द कर दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ट्रिब्यूनल को बेदखली का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की राय को गलत बताया। कोर्ट ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक के भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए जरूरी होने पर ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है।
कोर्ट ने कहा कि कानून का मकसद वरिष्ठ नागरिकों को जल्द राहत देना है। बेदखली का आदेश भी उनके भरण-पोषण और सुरक्षा के अधिकार को लागू करने का एक तरीका है।
2021 के फैसले का भी हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने एस. वनिता बनाम डिप्टी कमिश्नर मामले में 2021 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर इस कानून के तहत बेदखली का आदेश दिया जा सकता है।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपील मंजूर करते हुए बेटे और बहू को घर से निकालने के ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा।














