पेजेश्कियान के हाथों को PM मोदी ने इस तरह पकड़ा, BRICS की तस्वीर को देखकर ट्रंप को लगेगी मिर्ची! | ACTPnews

पेजेश्कियान के हाथों को PM मोदी ने इस तरह पकड़ा, BRICS की तस्वीर को देखकर ट्रंप को लगेगी मिर्ची!


Highlights

  • पीएम मोदी और पेजेश्कियान
  • भारत और ईरान के रिश्ते
  • ब्रिक्स समिट की खास तस्वीर

नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स (BRICS) बिज़नेस समिट में कई खास मोमेंट्स कैमरे में कैद हुए, लेकिन इनमें एक तस्वीर ऐसी है, जो ईरान और भारत के मजबूत रिश्ते को दर्शाती है। ब्रिक्स बिजनेस समिट के मंच पर भारत के प्रधानमंत्री और ईरान के राष्ट्रपति मसूज पेजेश्कियान की एक तस्वीर ने बंटी हुई दुनिया में भारत की कूटनीतिक स्थिति को दिखाया और साथ ही ईरान के साथ भारत के गहरे रिश्ते को भी दर्शाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन का हाथ जोर से थामे देखा गया, जबकि उनके साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा भी मौजूद थे। यह तस्वीर अपने समय की वजह से खास रही।




भारत की कूटनीति का प्रभाव

एक तरफ जहां ईरान और अमेरिका की टकराव की वजह से ऊर्जा की सप्लाई और समुद्री व्यापार प्रभावित हुई है। तो वहीं यूक्रेन युद्ध की वजह से रूस पर पश्चिमी देशों ने कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। भारत ने अमेरिका और अन्य पश्चिमी ताकतों के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी बनाए रखते हुए ईरान और रूस, दोनों देशों के साथ बातचीत के रास्ते खुले रखे हैं। पीएम मोदी और पेज़ेशकियन के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में यह नज़रिया साफ़ दिखा।

प्रधानमंत्री ने बातचीत और कूटनीति के ज़रिए पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष को खत्म करने का आह्वान किया। पीएम मोदी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आम नागरिकों, कमर्शियल जहाज़ों और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा की जानी चाहिए और समुद्री आवाजाही व व्यापार में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।

भारत हमेशा से शांति चाहता है

रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ हुई अलग बैठक में भी पीएम मोदी ने ऐसी ही बात कही। दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग पर चर्चा की, साथ ही उन्होंने यूक्रेन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत की अपील को दोहराया। भारत का हमेशा से यह कहना रहा है कि वह सिर्फ़ तटस्थ नहीं है, बल्कि वह हमेशा ही शांति के पक्ष में खड़ा है। साथ ही, उसने विरोधी भू-राजनीतिक गुटों में शामिल होने से खुद को दूर रखा है और विरोधी पक्षों के देशों के साथ भी बातचीत जारी रखी है। इसकी एक बानगी ब्रिक्स समिट में दिखी।

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