बॉलीवुड के सुपरस्टार नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह 75 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्हें गोवा स्थित घर में कार्डियक अरेस्ट हुआ। मणिपाल अस्पताल के डॉ. शेखर सालकर के मुताबिक नाना पाटेकर का सुबह 5:20 बजे निधन हुआ। घटना के वक्त नाना के साथ घर पर परिवार का कोई सदस्य नहीं था। उनके दोस्त और केयरटेकर मौजूद थे। अब शव का पोस्टमॉर्टम कराया जाएगा। नाना पाटेकर पंजाबियों को बहुत पसंद करते थे। 17 साल पहले वह पंजाब में शूटिंग कर रहे थे तो उन्होंने पंजाबी सीखी। उन्होंने कहा था कि पंजाबी उन्हें बहुत पसंद हैं। चंडीगढ़ में वेलकम की शूटिंग के दौरान उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के किसान पिता की बाइपास सर्जरी के लिए तुरंत 3 लाख रुपए दे दिए थे। इसके अलावा नाना पाटेकर जनवरी 2018 में पत्नी नीलकांति पाटेकर के साथ अमृतसर आए थे। यहां उन्होंने गोल्डन टेंपल में माथा टेका। यह गोल्डन टेंपल के दर्शन के बाद नाना ने कहा था- रब का शुक्र है कि जीते जी मुझे गोल्डन टेंपल में माथा टेकने का मौका मिला इस दौरान उन्होंने गोल्डन टेंपल की पूरी परिक्रमा की और फिर लंगर हॉल में जूठे बर्तन भी मांजे थे। इसके बाद जब वे फिर अमृतसर आए तो वाघा बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी में भी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने BSF की नशा विरोधी दौड़ में भी हिस्सा लिया था। नाना ने कहा था- ऐसी शांति कहीं नहीं मिली
नाना पाटेकर ने गोल्डन टेंपल के दर्शन के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा था कि मुझे यहां आकर बहुत शांति मिली है, ऐसी शांति मैंने कभी कहीं और महसूस नहीं की। यहां के लोगों की सेवा और श्रद्धा देखकर मैं बहुत हैरान हूं। मैं सोच रहा हूं कि मैं पहले कभी यहां क्यों नहीं आया। यहां कोई छोटा-बड़ा या किसी तरह का भेदभाव नहीं है। अगर पूरा देश इस बात को समझ ले और अपनी जिंदगी में अपना ले तो हमारा देश सोने जैसा बन जाएगा। नाना पाटेकर ने पंजाब में शूटिंग के दौरान पंजाबी सीखी थी
साल 2009 में एक: द पॉवर ऑफ वन की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर चंडीगढ़ और पंजाब में शूटिंग कर रहे थे। फिल्म में उन्हें CBI अधिकारी का किरदार निभाना था और उनके कई सीन पंजाब में लोगों से बातचीत करते हुए थे। अपने मराठी लहजे के बावजूद संवादों को पंजाबी अंदाज में बोलने के लिए उन्होंने बाकायदा स्थानीय पंजाबी महिलाओं से पंजाबी एक्सेंट सीखने की कोशिश की थी। उस दौरान एक रिपोर्ट में नाना ने कहा था कि मुझे पंजाबी पसंद हैं। मेरे पिता भी फर्राटेदार पंजाबी बोलते थे, क्योंकि टेक्सटाइल प्रिंटिंग के कारोबार में उनका रोजाना पंजाबियों से संपर्क रहता था। नाना पाटेकर को खेती-किसानी भी खूब पसंद थी। उन्होंने चंडीगढ़ में मीडिया से बात करते हुए कहा था कि मैं प्रकृति के करीब रहना पसंद करता हूं और “दिल से किसान” हूं। चंडीगढ़ में असिस्टेंट डायरेक्टर के पिता को तुरंत मदद दी
साल 2007 में फिल्म ‘वेलकम’ की शूटिंग के दौरान नाना को पता चला कि यूनिट के एक असिस्टेंट डायरेक्टर बिट्टू चंडोक के चाचा अवतार सिंह चंडीगढ़ में रहते हैं और किसान हैं। वह गंभीर रूप से बीमार थे और बाईपास सर्जरी के लिए करीब 3 लाख रुपये की जरूरत थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक, नाना ने तुरंत 3 लाख रुपये का चेक दे दिया था। नाना ने इस मदद को ‘दान’ मानने से भी इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि अवतार सिंह उनके पिता की उम्र के हैं, इसलिए यह ऐसा था जैसे वह अपने पिता के लिए कुछ कर रहे हों। उन्होंने यह भी कहा था कि एक समय उनके पास कुछ नहीं था और जो कुछ उनके पास है, वह लोगों की वजह से है।
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नाना पाटेकर ने कहा था- आई लव पंजाबी:गोल्डन टेंपल देख बोले थे- रब का शुक्र, जीते जी दर्शन हो गए; चंडीगढ़ में किसान को ₹3 लाख दिए | ACTPnews

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