Nobel Peace Prize 2026 Winner Update; Donald Trump | ACTPnews

Nobel Peace Prize 2026 Winner Update; Donald Trump


ओस्लो4 घंटे पहले

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2026 के नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान आज नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प करीब 8 साल से नोबेल की इच्छा जता रहे हैं।

पिछले साल नोबेल न मिलने के बाद वे नाराज हो गए थे। उन्होंने नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे से इसकी शिकायत भी की थी।

इस बार ट्रम्प के साथ कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, पोप लियो XIV और यहां तक कि इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) का नाम भी चर्चा में है। नोबेल शांति पुरस्कार की घोषणा नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में होगी।

2018 से नोबेल प्राइज मांग रहे ट्रम्प

  • ट्रम्प के लिए नोबेल प्राइज मांगना कोई नई बात नहीं है। अक्टूबर 2018 में एक कार्यक्रम में ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्हें शायद यह पुरस्कार कभी नहीं मिलेगा, भले ही ने कोरिया और सीरिया में शांति कायम करने की कोशिश कर रहे हों।
  • इसके बाद फरवरी 2019 में उन्होंने खुलकर अपनी दावेदारी रखी। उन्होंने कहा कि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने उन्हें नोबेल के लिए नामित किया है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसे कभी नहीं जीत पाऊंगा।
  • 2019 में एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल के जवाब में ट्रम्प ने कहा कि उन्हें लगता है कि उन्हें कई चीजों के लिए नोबेल मिलेगा, अगर पुरस्कार निष्पक्ष तरीके से दिया जाए।
  • 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी ट्रम्प ने नोबेल का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से अपनी तुलना करते हुए कहा था कि अगर ओबामा को यह पुरस्कार मिल सकता है तो उन्हें भी मिलना चाहिए।

2025 की विजेता ने अपना नोबेल ट्रम्प को सौंपा

पिछले साल भी ट्रम्प ने कई बार नोबेल देने की मांग की थी। उन्होंने भारत-पाकिस्तान समेत 8 युद्धों को रोकने का दावा किया।

ट्रम्प खुद कई बार कह चुके हैं कि उन्होंने शांति के लिए काम किया है और उन्हें नोबेल मिलना चाहिए।

2025 का पुरस्कार वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को मिला। बाद में मचाडो ने अपना नोबेल मेडल ट्रम्प को सौंप दिया।

उन्होंने इसे वेनेजुएला की आजादी के लिए ट्रम्प के समर्थन के सम्मान के तौर पर बताया।

वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो ने व्हाइट हाउस पहुंचकर ट्रम्प को अपना नोबेल सौंपा।

वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया मचाडो ने व्हाइट हाउस पहुंचकर ट्रम्प को अपना नोबेल सौंपा।

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का नाम क्यों आया

इस साल की नोबेल रेस में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन का नाम सबसे अलग है। ISS पर अमेरिका, रूस, फ्रांस और कनाडा के अंतरिक्ष यात्री साथ काम करते हैं।

धरती पर इन देशों के बीच राजनीतिक तनाव और मतभेद हैं, लेकिन अंतरिक्ष स्टेशन पर उनके वैज्ञानिक एक साथ काम करते हैं। ओस्लो पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक हाकोन जेरलोव ने इसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उदाहरण बताया है।

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पृथ्वी से करीब 400 किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में मौजूद है। यह करीब 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी का चक्कर लगाता है।

ISS करीब 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा कर लेता है। यानी वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्री एक दिन में करीब 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त देख सकते हैं। (फोटो क्रेडिट-नासा)

ISS करीब 90 मिनट में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा कर लेता है। यानी वहां मौजूद अंतरिक्ष यात्री एक दिन में करीब 16 बार सूर्योदय और सूर्यास्त देख सकते हैं। (फोटो क्रेडिट-नासा)

सूडान का आम लोगों का नेटवर्क भी दावेदार

सूडान के इमरजेंसी रिस्पॉन्स रूम्स (ईआरआर) का नाम भी प्रमुख दावेदारों में है। 2023 में सूडान में गृहयुद्ध शुरू होने के बाद विदेशी राहतकर्मी बड़ी संख्या में देश छोड़कर चले गए। इसके बाद स्थानीय लोगों ने खुद अपने इलाकों में राहत का काम संभाला।

उन्होंने सामुदायिक रसोई और क्लिनिक चलाए। विदेश में रहने वाले सूडानी लोगों ने भी पैसे भेजकर इन अभियानों की मदद की। अंतरराष्ट्रीय सहायता कम होने के बावजूद यह नेटवर्क लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाता रहा।

शांति का नोबेल स्वीडन की बजाय नॉर्वे में क्यों?

नोबेल के बाकी पुरस्कार स्वीडन में दिए जाते हैं, लेकिन शांति का नोबेल नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में दिया जाता है। इसकी वजह करीब 130 साल पुरानी है। यह व्यवस्था खुद अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में तय की थी।

1895 में लिखी अपनी वसीयत में नोबेल ने तय किया था कि शांति पुरस्कार का फैसला नॉर्वे की संसद द्वारा चुनी गई समिति करेगी। उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक ही राजा के अधीन थे, हालांकि दोनों की अपनी संसद और अलग राजनीतिक व्यवस्था थी।

नोबेल ने यह नहीं बताया था कि शांति पुरस्कार के लिए उन्होंने नॉर्वे को ही क्यों चुना। नोबेल की 1896 में मौत हुई और 1901 से पुरस्कार दिए जाने लगे। उस समय स्वीडन और नॉर्वे एक संघ में थे।

1905 में दोनों देश अलग हो गए, लेकिन नोबेल की वसीयत में शांति पुरस्कार के लिए नॉर्वे को दी गई जिम्मेदारी जारी रही। इसी वजह से आज भी फिजिक्स, केमिस्ट्री, मेडिसिन, साहित्य और अर्थशास्त्र के नोबेल स्वीडन में, जबकि शांति का नोबेल नॉर्वे में दिया जाता है।

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