फर्जी डॉक्टर रैकेट का मास्टरमाइंड भोपाल से गिरफ्तार:दमोह एसपी बोले- नेटवर्क में 50 से ज्यादा लोग; तीन आरोपियों की पुलिस रिमांड बढ़ी | ACTPnews

फर्जी डॉक्टर रैकेट का मास्टरमाइंड भोपाल से गिरफ्तार:दमोह एसपी बोले- नेटवर्क में 50 से ज्यादा लोग; तीन आरोपियों की पुलिस रिमांड बढ़ी

दमोह में फर्जी MBBS डिग्री के सहारे नौकरी करने के मामले का मास्टरमाइंड हीरा सिंह कौशल पुलिस की पकड़ में आ गया है। दमोह पुलिस ने उसे बुधवार को भोपाल के कोहेफिजा इलाके से गिरफ्त में लिया। एसपी आनंद कलादगी ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत संजीवनी क्लिनिकों में फर्जी डिग्री से नौकरी कर रहे ऐसे डॉक्टर्स की संख्या 50 से ज्यादा हो सकती है। हीरा सिंह ने नेटवर्क में शामिल कई लोगों के नाम का खुलासा किया है। इनकी तलाश में पुलिस की टीमें भोपाल, ग्वालियर, मुरैना, धार, मंडला और जबलपुर में दबिश दे रही हैं। बता दें कि हीरा सिंह को मिलाकर मामले में अब तक कुल चार गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। इससे पहले गिरफ्तार डॉ. कुमार सचिन यादव, डॉ. राजपाल गौर और डॉ. अजय मौर्य को बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें और दो दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया। पुलिस जांच में पता चला है कि हीरा सिंह कौशल ही इस पूरे गिरोह को चला रहा था। उसने सबसे पहले अजय मौर्य की फर्जी डिग्री बनवाई थी। फिर अजय के जरिए कुमार सचिन यादव और राजपाल गौर ने भी फर्जी डिग्री और रजिस्ट्रेशन बनवाकर सरकारी नौकरी हासिल कर ली। दूसरे डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन नंबर पर कर रहे थे नौकरी इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब दमोह सीएमएचओ डॉ. राजेश अठ्या ने गोपनीय सूचना के बाद इन तीनों डॉक्टर्स की डिग्रियों की जांच करवाई। मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल की जांच में राजपाल गौर का रजिस्ट्रेशन फर्जी निकला। उसने साल 2018 के एक पुराने रजिस्ट्रेशन नंबर को बदलकर 2023 का बना लिया था। असल में वह रजिस्ट्रेशन नंबर डॉ. अभिषेक यादव का था, जो नर्मदापुरम में पदस्थ हैं। जांच के दौरान ये भी खुलासा हुआ है कि तीनों आरोपियों ने 8 से 10 लाख रुपए में MBBS की फर्जी डिग्री और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया का फर्जी रजिस्ट्रेशन खरीदे थे। सचिन यादव और राजपाल गौर दमोह के सरकारी आरोग्य केंद्र और संजीवनी क्लिनिक में काम कर रहे थे। वहीं, अजय मौर्य पिछले ढाई साल से जबलपुर में संजीवनी अस्पताल में डॉक्टर के रूप में काम कर रहा था। फर्जी डिग्री मामले में जीवाजी यूनिवर्सिटी और रीवा मेडिकल कॉलेज का नाम भी सामने आ रहा है। NHM भोपाल को नियुक्ति रद्द करने लिखा पत्र जांच में सामने आया कि डॉ. सचिन यादव के पास बीडीएस की असली डिग्री है। वह करीब पांच महीने पहले संजीवनी क्लिनिक में नियुक्त हुआ था। वहीं, राजपाल गौर करीब एक साल से काम कर रहा था। उसके पास बीएचएमएस की डिग्री मिली है। दमोह सीएमएचओ डॉ. राजेश अठ्या ने बताया कि फर्जी डॉक्टरों की नियुक्ति राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के माध्यम से हुई थी। नियुक्ति रद्द करने का अधिकार भी NHM के पास है। उन्हें इस बारे में पत्र लिखा गया है। दमोह जिले के सभी डॉक्टरों की डिग्रियों की होगी जांच मामला सामने आने के बाद दमोह के स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर में डॉक्टरों की डिग्रियों की जांच के आदेश जारी किए हैं। सीएमएचओ कार्यालय के अनुसार, शहर में कुल 6 संजीवनी क्लिनिक संचालित हैं, जिनमें 4 डॉक्टर तैनात हैं। इनमें से दो डॉक्टर फर्जी पाए गए, जबकि दो की डिग्रियां सही मिली हैं। अब दमोह जिले में सभी रेगुलर, NHM और बॉन्ड वाले डॉक्टरों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी। आंकड़ों के मुताबिक, जिला अस्पताल में 38, NHM में 15 और ब्लॉक स्तर पर करीब 28 डॉक्टर तैनात हैं। स्वास्थ्य विभाग सभी की डिग्रियों और रजिस्ट्रेशन की जांच कर रहा है। यह खबर भी पढ़ें… एक नाम-दो डॉक्टर, सरकारी अस्पताल में 15 साल से फर्जी इलाज मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। एक ही एमबीबीएस डिग्री पर दो डॉक्टर 15 साल से ज्यादा समय से सरकारी नौकरी कर रहे हैं। दोनों ने करोड़ों की सैलरी ली और सरकारी अस्पतालों में इलाज के साथ निजी क्लीनिक भी चलाए। सबसे चौंकाने वाली बात है कि विभाग को इसकी भनक नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports