यह विजुअल 2-3 जून की दरमियानी रात 12.59 बजे का बताया जा रहा है, जिसमें चंबल नदी से रेत का अवैध खनन किया जा रहा है।
मुरैना जिले की चंबल नदी से अवैध तरीके से रेत निकालने का एक और वीडियो सामने आया है। यह वीडियो 2-3 जून की दरमियानी रात करीब 12:59 बजे महुआ थाना क्षेत्र के खुर्द घाट का बताया जा रहा है। इसमें देखा जा सकता है कि लोडर मशीन से रेत निकाली जा रही है और ट्रैक
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वहीं वीडियो सामने आने के बाद संबंधित विभागों में हलचल बढ़ गई है। देवरी घड़ियाल अभयारण्य के अधीक्षक श्याम सिंह चौहान ने बताया कि विभाग को वीडियो और अवैध खनन की सूचना मिली है। मामले की जांच के लिए वन विभाग और महुआ पुलिस के सहयोग से संयुक्त टीम रवाना की गई है।
वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वीडियो 2-3 जून की दरमियानी रात करीब 12:59 बजे महुआ थाना क्षेत्र के खुर्द घाट का बताया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खनन रोकने के आदेश दिए हैं
गौरतलब है कि चंबल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही सख्त रुख अपना चुका है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन को अभयारण्य क्षेत्र में अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
इसके बावजूद क्षेत्र में अवैध खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे प्रशासनिक निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह रेत का परिवहन किया जा रहा है।
एमपी, यूपी और राजस्थान सरकार को लगाई थी फटकार
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों के संचालन पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि अवैध खनन रोकने के लिए राज्यों की कार्रवाई अभी भी नाकाफी है।
बिना नंबर प्लेट वाले वाहन खुलेआम रेत परिवहन कर रहे हैं। कोर्ट ने 6 महीने के भीतर निगरानी तंत्र विकसित करने, CCTV कैमरे लगाने और अवैध खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की जब्ती के निर्देश दिए हैं।

मौके पर कोई भी सुरक्षा कर्मी नहीं दिखाई दे रहा।
ऑर्गनाइज्ड इलीगल माइनिंग नेटवर्क शब्द का इस्तेमाल किया
20 मई की सुनवाई में कोर्ट ने “organized illegal mining network” शब्द इस्तेमाल किया था, यानी इसे सिर्फ छोटे स्तर का अवैध खनन नहीं माना गया, जो पर्यावरण, वन्यजीव और कानून व्यवस्था तीनों के लिए खतरा बन चुका है। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कोर्ट के दबाव में होने वाली औपचारिक कार्रवाई नहीं हो सकती, यह राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
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