राजस्थान के गेंदबाज ने घर से भागकर शुरू किया क्रिकेट:गोवा के होटल में वेटर की नौकरी की, IPL में गुजरात टाइटंस समेत 5 टीमों में रहे | ACTPnews

राजस्थान के गेंदबाज ने घर से भागकर शुरू किया क्रिकेट:गोवा के होटल में वेटर की नौकरी की, IPL में गुजरात टाइटंस समेत 5 टीमों में रहे

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में गुजरात टाइटंस के तेज गेंदबाज कुलवंत खेजरोलिया (34) ने घर से भागकर क्रिकेट खेलने का सपना पूरा किया। कुलवंत झुंझुनूं जिले के चूड़ी अजीतगढ़ गांव के रहने वाले हैं। कुलवंत की कहानी संघर्ष, जुनून और मेहनत की एक मिसाल है। वे IPL की 5 अलग-अलग फ्रेंचाइजी का हिस्सा रह चुके हैं। बाएं हाथ के तेज गेंदबाज कुलवंत गेंद को स्विंग कराने और अपने अलग एंगल से बल्लेबाजों को परेशान करने के लिए जाने जाते हैं। क्रिकेटर बनने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने परिवार की आर्थिक मदद करते हुए किराने की दुकान पर काम किया। गोवा के एक होटल में वेटर की नौकरी की और टेबल तक साफ कीं। उन्होंने अपने क्रिकेट करियर, IPL के अनुभव, राजस्थान के प्लेयर्स की चुनौतियों और युवा खिलाड़ियों के लिए जरूरी सीख को लेकर दैनिक भास्कर से खास बातचीत की। सवाल: इंडियन प्रीमियर लीग का यह सीजन आपके लिए कैसा रहा? जवाब: इस बार IPL का सफर मेरे लिए काफी शानदार रहा। हमारी टीम फाइनल तक पहुंची। शुरुआत से लेकर आखिर तक यही कोशिश रही कि टीम अच्छा प्रदर्शन करे। निश्चित तौर पर इस बात का अफसोस है कि हम फाइनल नहीं जीत सके, लेकिन पूरे टूर्नामेंट का अनुभव बेहद खास रहा। मुझे कई बड़े और अनुभवी खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने का मौका मिला। हर मैच और हर परिस्थिति से कुछ नया सीखने को मिला। यही सीख भविष्य में मेरे क्रिकेट करियर के लिए काफी काम आएगी। IPL ऐसा मंच है जहां हर दिन आपको कुछ नया सिखाता है। सवाल: आप 5 IPL टीमों का हिस्सा रह चुके, यह सफर कैसा रहा? जवाब: हर टीम का अपना अलग माहौल और अलग अनुभव होता है। मेरा IPL डेब्यू मुंबई इंडियंस से हुआ था। वह मेरे करियर का पहला IPL सीजन था और उस समय मेरे पास ज्यादा अनुभव नहीं था। लेकिन दिल और दिमाग में केवल एक जुनून था कि IPL में अपनी पहचान बनानी है। मुंबई इंडियंस में मुझे लसिथ मलिंगा, जसप्रीत बुमराह और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के साथ खेलने और सीखने का मौका मिला। उसके बाद जब मैं रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) में पहुंचा तो विराट कोहली और एबी डीविलियर्स जैसे महान खिलाड़ियों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करने का अवसर मिला। हर टीम से मुझे अलग-अलग चीजें सीखने को मिलीं। इन अनुभवों का फायदा सिर्फ IPL में ही नहीं बल्कि, घरेलू क्रिकेट में भी मिला और मैं लगातार अपने खेल में सुधार कर पाया। सवाल: सबसे यादगार पल कौन-सा रहा? जवाब: मेरे लिए IPL में डेब्यू करना ही सबसे यादगार पल था। वह ऐसा लम्हा है, जिसे मैं पूरी जिंदगी नहीं भूल सकता। किसी भी खिलाड़ी के लिए IPL में पहला मैच खेलना एक सपना होता है और मेरा वह सपना पूरा हुआ। इसके अलावा जब मैं RCB का हिस्सा था, तब कोलकाता के ईडन गार्डन्स में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ खेला गया मुकाबला भी मेरी जिंदगी के सबसे यादगार अनुभवों में शामिल है। सवाल: राजस्थान के होने के बावजूद आप यहां की रणजी टीम से नहीं खेलते। इसकी क्या वजह रही? जवाब: जब मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया तो सबसे पहले दिल्ली चला गया था। वहीं, मेरी गेंदबाजी पर गौतम गंभीर सर की नजर पड़ी। उन्होंने मुझे रणजी ट्रॉफी कैंप में नेट बॉलर के रूप में शामिल करवाया। वहीं से मेरे क्रिकेट करियर की असली शुरुआत हुई। कैंप में मेरी गेंदबाजी से कई खिलाड़ी और कोच प्रभावित हुए। इसके बाद मुझे दिल्ली की रणजी टीम में मौका मिला और मैंने अपने पेशेवर क्रिकेट करियर की शुरुआत दिल्ली से ही की। इसलिए मेरा पूरा क्रिकेटिंग सफर वहीं से आगे बढ़ता गया। सवाल: राजस्थान के कई खिलाड़ी दूसरे राज्यों से खेल रहे हैं। क्या इससे राजस्थान की टीम कमजोर होती है? जवाब: मुझे लगता है कि राजस्थान की टीम आज भी शानदार प्रदर्शन कर रही है। जहां तक खिलाड़ियों के दूसरे राज्यों से खेलने की बात है तो हर खिलाड़ी की परिस्थितियां अलग होती हैं। राजस्थान में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। लेकिन वहां से आगे बढ़ने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है। कई बार बेहतर कोचिंग, बेहतर सुविधाओं और सही अवसरों के लिए खिलाड़ियों को अपना घर और शहर छोड़ना पड़ता है। आज क्रिकेट में कॉम्पिटिशन बहुत बढ़ चुका है। ऐसे में जहां खिलाड़ी को सही समय पर बेहतर अवसर मिलता है, वह उसी दिशा में आगे बढ़ता है। यही वजह है कि कई खिलाड़ी दूसरे राज्यों से खेल रहे हैं। सवाल: किसान परिवार से निकलकर IPL तक पहुंचने का सफर कितना कठिन रहा? जवाब: मेरी कहानी थोड़ी अलग है। मैंने अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत घर से भागकर की थी। जब मैं घर छोड़कर गया था, तब मेरे परिवार को यह तक नहीं पता था कि मैं क्रिकेट खेलने के लिए जा रहा हूं। असल में हमारे इलाके में क्रिकेट को करियर के रूप में देखने का माहौल नहीं था। वहां 12वीं पास करने के बाद युवाओं को सेना में भर्ती कराने की सोच ज्यादा थी। मेरे पिता खेती करते थे और परिवार चलाने के लिए परचूनी (किराना) की दुकान भी चलाते थे। उन्हें भी यह जानकारी नहीं थी कि क्रिकेट में आगे बढ़ने के लिए क्या करना चाहिए। लेकिन मेरे अंदर क्रिकेट को लेकर जुनून था। उसी जुनून ने मुझे दिल्ली पहुंचा दिया। वहां मैंने संघर्ष देखा, कठिन दिन देखे, लेकिन धीरे-धीरे सही लोग और सही रास्ता मिलता गया। आज मैं जिस मुकाम पर हूं, उसके पीछे वही संघर्ष और मेहनत है। मैं युवा खिलाड़ियों से यही कहना चाहूंगा कि अगर सपनों को पूरा करना है तो कठिन मेहनत करनी होगी। कई बार घर छोड़कर भी आगे बढ़ना पड़ता है। सवाल: वैभव सूर्यवंशी इस समय भारतीय क्रिकेट का चर्चित चेहरा हैं। क्या गेंदबाज उनसे डरते हैं? जवाब: क्रिकेट में कोई खिलाड़ी छोटा या बड़ा नहीं होता। इसलिए किसी गेंदबाज के मन में उनके प्रति डर जैसी कोई बात नहीं होती। हालांकि मैं इतना जरूर कहूंगा कि वैभव बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। उनके पास शानदार स्किल है और सबसे बड़ी बात यह है कि वह बहुत निडर हैं। उनके खेल में आत्मविश्वास साफ दिखाई देता है। उनके अंदर डर नाम की चीज नहीं दिखती और यही क्वालिटी उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाता है। सवाल: IPL की सबसे बड़ी सीख क्या रही, जिसे आप युवा खिलाड़ियों के साथ साझा करना चाहेंगे? जवाब: जब मैं रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का हिस्सा था, तब विराट कोहली ने मुझे एक बात कही थी, जो आज भी मेरे दिमाग में हमेशा रहती है। उन्होंने कहा था कि मैच अच्छा जाए या खराब, टीम में मौका मिले या नहीं मिले, लेकिन अपने रूटीन और मेहनत में कभी बदलाव नहीं करना चाहिए। हर दिन उसी समर्पण और उसी जुनून के साथ मेहनत करनी चाहिए। विराट भैया की यही सीख मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। मैं आज भी उसी बात को अपने करियर में लागू करने की कोशिश करता हूं। मेरा मानना है कि कोई भी खिलाड़ी तभी सफल बन सकता है जब वह हर दिन अपना 100 प्रतिशत दे और अपने काम के प्रति पूरी तरह ईमानदार रहे। बता दें कि किसान परिवार में जन्मे कुलवंत के पिता शंकर सिंह गांव में किराना की छोटी-सी दुकान चलाते हैं। गांव में आज भी लोग उन्हें प्यार से छोटू कहकर बुलाते हैं। करीब छह महीने तक उन्होंने अपने क्रिकेट संघर्ष को परिवार से छुपाए रखा और लगातार मेहनत करते हुए आखिरकार आईपीएल तक का सफर तय किया। पहली बार मुंबई इंडियंस ने खरीदा था कुलवंत को आईपीएल 2017 की नीलामी में मुंबई इंडियंस ने 10 लाख रुपए की बेस प्राइस पर खरीदा था। इसके बाद वह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु, दिल्ली कैपिटल्स, कोलकाता नाइट राइडर्स और गुजरात टाइटंस जैसी टीमों का हिस्सा रहे।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *