Nation Builder Vs Homemakers; Wives Role – Domestic Income | ACTPnews

Nation Builder Vs Homemakers; Wives Role - Domestic Income


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नई दिल्ली7 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा परिवार में एक महिला के योगदान के कारण उनके लिए होममेकर (घर संभालने वाली) के बजाय राष्ट्र निर्माता (नेशन बिल्डर) शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने एक दुर्घटना में पत्नी की मौत के बाद उसके पति को अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश देते हुए यह टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक गृहिणी का काम केवल खाना बनाना, बच्चों की देखभाल और घर संभालना भर नहीं है। वह परिवार की नींव को मजबूत बनाती है, अगली पीढ़ी तैयार करती हैं। समाज के विकास में अप्रत्यक्ष लेकिन बेहद महत्वपूर्ण योगदान देती है।

कोर्ट ने एक गृहिणी के घर के काम की वैल्यू निकाली जाए तो उसकी अनुमानित आय 30 हजार रुपए प्रतिमाह बनती है। इसलिए मुआवजा तय करते समय उनके योगदान को केवल सांकेतिक या कम करके नहीं आंका जा सकता।

इस टिप्पणी और फैसले के मायने क्या…

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि यदि किसी सड़क दुर्घटना में गृहिणी घायल हो जाती है या उसकी मौत हो जाती है, तो परिवार को केवल उसकी आय न होने के आधार पर कम मुआवजा नहीं दिया जा सकता।

यानी सुप्रीम कोर्ट ने मोटर वाहन अधिनियम (एमवी एक्ट) के तहत दावों में पत्नी की घरेलू देखभाल के नुकसान को मुआवजे के एक अलग मद के रूप में मान्यता दे दी।

बेंच ने मुआवजा तय करने के लिए कुछ दिशा-निर्देश भी जारी किए। अदालत ने कहा कि गृहिणियों की आय का आकलन करते समय उनकी उम्र, एजुकेशन, स्किल, पारवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक हालात को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

दुर्घटनाओं के मुआवजे पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

  • मोटर दुर्घटना मुआवजा के मामलों का जल्दी निपटारा किया जाए।
  • मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 169 के तहत जो प्रक्रिया तय की गई है, उसका सही ढंग से पालन हो।
  • सभी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ऐसे मामलों की निगरानी करें।
  • यह सुनिश्चित करें मुआवजा मामलों में बिना देर किए समय पर फैसला हो।
  • सुप्रीम कोर्ट से बनाए गए सिद्धांत देशभर के मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) प्रभावी ढंग से लागू करें।

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के 2024 में दिए गए एक फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुनाया। यह मामला 2001 में दो जीपों के बीच हुई सड़क दुर्घटना से जुड़ा था, जिसमें एक महिला की मौत हो गई थी। हाईकोर्ट ने पीड़ित के परिवार, जिसमें उसके पति और तीन बच्चे शामिल थे, को 8 लाख रुपए से ज्यादा का मुआवजा देने का आदेश दिया था।

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