ऊना जिले के मलांगड़ मियां गांव निवासी सेना के हवलदार विशम्बर सिंह की पार्थिव देह देहरादून से उनके पैतृक गांव पहुंच गई है। पार्थिव देह घर पहुंचते ही माता शीला देवी और पत्नी सोनिया देवी ताबूत से लिपट गई। विशम्बर के माता-पिता, पत्नी और दोनों बेटों का रो-रोक बुरा हाल है। विशम्बर सिंह की पार्थिव देह को अभी घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया है। क्षेत्र के बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे हैं। उनका कुछ बाद गांव के ही श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। पूरा क्षेत्र विशम्बर सिंह अमर रहे के नारों से गूंज रहा है।
विशम्बर ने 18 साल तक देश सेवा की हवलदार विशम्बर सिंह जुलाई 2008 में भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में भर्ती हुए थे। सेना में भर्ती के कुछ साल बाद में उनका विवाह सोनिया देवी से हुआ। विशम्बर का बड़ा बेटा केंद्रीय विद्यालय बंगाणा में छठी कक्षा में पढ़ता हैं, जबकि छोटा बेटा अभी छह महीने का है। पिता रसीला राम भी सेना से रिटायर विशम्बर सिंह के पिता रसीला राम भी जैक राइफल में सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वर्तमान में वह चंडीगढ़ में कार्यरत हैं। उन्हें सोमवार शाम को चंडीगढ़ ड्यूटी पर लौटना था, लेकिन सुबह ही उन्हें देहरादून से बड़े बेटे विशम्बर सिंह के निधन की सूचना मिली। विशम्बर के भाई का पांच साल पहले निधन हो चुका यह परिवार के लिए दूसरा बड़ा आघात है, क्योंकि पांच साल पहले उन्होंने अपने छोटे बेटे जसविंदर सिंह को भी खो दिया था, वह भी सेना में थे। विशम्बर सिंह लगभग डेढ़ माह पहले छुट्टी बिताने के बाद देहरादून में अपनी ड्यूटी पर लौटे थे। उन्होंने रविवार शाम को अपने पिता रसीला राम और पत्नी सोनिया देवी से फोन पर आखिरी बार बात की थी और सब ठीक होने की बात कही थी। बता दें विशम्बर सिंह कल अपनी यूनिट में पीटी में शामिल हुए थे। पीटी पूरी होने के बाद जब वह साइकिल से यूनिट लौट रहे थे, तो अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद साथी जवानों ने उन्हें अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। विशम्बर सिंह की अंतिम शव यात्रा के PHOTOS…
Source link
हिमाचल के जवान विशम्बर की पार्थिव देह पैतृक गांव पहुंची:पत्नी ताबूत से लिपटी; दो बेटे और माता-पिता पीछे छूटे, देहरादून में ड्यूटी के दौरान निधन | ACTPnews

Previous Post
Next Post
Leave a Reply
Latest News
Search the Archives
Access over the years of investigative journalism and breaking reports









