नई दिल्ली3 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) को विन्प डिस्टिलरीज एंड शुगर प्राइवेट लिमिटेड से एथेनॉल खरीद बढ़ाने पर विचार करने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश BPCL की याचिका पर दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकार की मौजूदा पॉलिसी में कोई बदलाव नहीं होगा। BPCL ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण की राष्ट्रीय नीति को प्रभावित कर सकता है।
इस दौरान केंद्र सरकार ने बताया कि पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का प्रोग्राम अभी भी एक्सपेरिमेंट है। इसका पूरा असर अगले साल तक पता चलेगा।

क्या है एथेनॉल सप्लाई का विवाद
एथेनॉल सप्लाई का यह विवाद कर्नाटक की विन्प डिस्टिलरीज एंड शुगर प्राइवेट लिमिटेड की याचिका से जुड़ा है। विन्प ने कर्नाटक हाईकोर्ट में याचिका लगाते हुए दलील दी थी कि उसका एथेनॉल बनाने का प्लांट है। इसकी सलाना उत्पादन क्षमता करीब 9.90 करोड़ लीटर है, लेकिन उसे केवल 3.92 करोड़ लीटर का आवंटन किया गया है।
सरकार ने कहा था कि किसी कंपनी को पहले ज्यादा आवंटन मिला तो इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि कंपनी को हर बार उतनी ही मात्रा में आवंटन मिलेगा। हाईकोर्ट ने BPCL को खरीद कोटा बढ़ाने पर विचार करने को कहा। इस आदेश के खिलाफ BPCL ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी।
कोर्ट रूम लाइव-
अटॉर्नी जनरल: यदि एक सप्लायर का कोटा बढ़ाया जाता है तो अन्य कंपनियां भी समान मांग लेकर अदालत पहुंच सकती हैं। इससे देशभर में ऐसे मामलों की बाढ़ आ सकती है और नेशनल पॉलिसी प्रभावित होगी। एथेनॉल सप्लाई के अनुबंध अक्टूबर 2025 में अंतिम रूप ले चुके हैं। 378 सप्लायर्स को कुल 1,050 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति का आवंटन किया गया था, जिनमें से 18 जून तक 680 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति हो चुकी थी।
सुप्रीम कोर्ट: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि BPCL ने पहले कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में अपील क्यों नहीं की।
अटॉर्नी जनरल: इसी तरह की कई याचिकाएं देश के अलग-अलग हाईकोर्ट में पेंडिंग हैं। इस मुद्दे पर अक्टूबर से पहले फैसला होना जरूरी है, क्योंकि उसी समय एथेनॉल सप्लाई का नया एग्रीमेंट होना है।

हाईकोर्ट ने कहा था- एथेनॉल सप्लाई बढ़ाने पर विचार करें
कर्नाटक हाईकोर्ट ने BPCL, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) को आदेश दिया था कि वे VINP डिस्टिलरीज एंड शुगर्स की 2025-26 के लिए ज्यादा एथेनॉल आवंटन की मांग पर विचार करें।
कोर्ट ने कहा था कि सरकार की नीति के तहत बने ऐसे एथेनॉल प्लांट, जो सिर्फ ऑयल कंपनियों को एथेनॉल बेचते हैं, उन्हें लॉन्ग टर्म ऑफटेक एग्रीमेंट (LTOA) के तहत मिलने वाली प्राथमिकता का लाभ मिलना चाहिए।

सरकार बोली- 1.4 लाख करोड़ की बचत हुई
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण योजना से कच्चे तेल का आयात कम हुआ है और देश को 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ी है और प्रदूषण भी कम हुआ है।
भारत ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले पूरा कर लिया है। 1 अप्रैल से पूरे देश में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल मिल रहा है। अब सरकार ने 2030 तक 30% एथेनॉल मिश्रण का नया लक्ष्य रखा है।
सरकार ने E20 को बताया सुरक्षित
हाल के दिनों में कुछ लोगों, खासकर ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़े लोगों ने आशंका जताई है कि E20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों को नुकसान पहुंच सकता है और ईंधन दक्षता कम हो सकती है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन आशंकाओं को खारिज किया है।
तेल मंत्रालय ने हाल ही में कहा था कि E20 ईंधन से वाहन इंश्योरेंस अमान्य होने या वाहनों को नुकसान पहुंचने के दावों के समर्थन में कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम सुरक्षित, उपभोक्ता हितैषी और आर्थिक रूप से फायदेमंद है।

कई देशों में एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा
सरकार के मुताबिक, अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे कई देशों में एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा है। सरकार का कहना है कि इस योजना से भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ी है, प्रदूषण कम हुआ है और किसानों को भी फायदा मिला है।
भारत पिछले साल ही पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले हासिल कर चुका है। एक अप्रैल से पूरे देश में E20 पेट्रोल की सप्लाई शुरू हो चुकी है। अब सरकार 2030 तक इसे बढ़ाकर 30% करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
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