MP में तीसरी संतान वाला अफसर नौकरी से बर्खास्त:CM ने 3 दिन पहले कहा था- नौकरी नहीं छिनेगी; विभाग बोला- हमें आदेश नहीं मिला | ACTPnews

MP में तीसरी संतान वाला अफसर नौकरी से बर्खास्त:CM ने 3 दिन पहले कहा था- नौकरी नहीं छिनेगी; विभाग बोला- हमें आदेश नहीं मिला

मध्यप्रदेश में तीसरी संतान के आधार पर एक अफसर की नौकरी चली गई। आईजी पंजीयन अमित तोमर ने गुरुवार को सिंगरौली के सब-रजिस्ट्रार अशोक सिंह परिहार को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उस घोषणा के 48 घंटे बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दो से अधिक संतान होने के आधार पर किसी कर्मचारी की नौकरी नहीं जाएगी। अफसर को बर्खास्त करने का आदेश गुरुवार को जारी किया गया। यह शुक्रवार को सामने आया। नौकरी के दौरान हुआ तीसरी संतान का जन्म दरअसल, अशोक सिंह परिहार के खिलाफ शिकायत की गई थी कि शासकीय सेवा के दौरान उनकी तीसरी संतान का जन्म हुआ है। मामले की जांच के लिए पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और बाद में विभागीय जांच बैठाई गई। जांच अधिकारी के रूप में वरिष्ठ जिला पंजीयक जबलपुर पवन अहिरवार को नियुक्त किया गया था। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर आरोप सही जांच में सामने आया कि परिहार की तीसरी संतान अभिषेक सिंह का जन्म 19 नवंबर 2003 को हुआ था। कलेक्टर सिंगरौली की संयुक्त जांच समिति की रिपोर्ट, जन्म संबंधी दस्तावेज और अन्य अभिलेखों के आधार पर आरोप सही पाए गए। जांच अधिकारी ने 9 दिसंबर 2025 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी परिहार को दोषी माना था। अफसर ने कहा था- नियम की जानकारी नहीं जवाब में परिहार ने कहा था कि उन्हें दो से अधिक संतान संबंधी नियम की जानकारी नहीं थी और विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई विशेष जानकारी नहीं दी गई थी। हालांकि विभाग ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। आदेश में कहा गया कि परिहार वर्ष 1992 से नियमित शासकीय सेवा में थे, इसलिए यह मानना संभव नहीं है कि उन्हें सेवा नियमों की जानकारी नहीं थी। CM ने तीन संतान वाला प्रस्ताव किया था रद्द
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 9 जून को सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उस ड्राफ्ट प्रावधान को निरस्त करने के निर्देश दिए थे, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रस्ताव था। मुख्यमंत्री ने ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाने और संशोधित प्रस्ताव जारी करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद माना जा रहा था कि दो से अधिक संतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को राहत मिल सकती है। फिर कार्रवाई क्यों हुई पंजीयन विभाग का कहना है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप अब तक कोई संशोधित शासकीय आदेश जारी नहीं हुआ है। ऐसे में विभाग ने वही नियम लागू माना, जो वर्तमान में प्रभावी हैं। इसी आधार पर सब-रजिस्ट्रार के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई। क्या कहता है नियम 10 मार्च 2000 को जारी अधिसूचना के अनुसार, जिन व्यक्तियों की दो से अधिक जीवित संतान हैं और उनमें से किसी एक संतान का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, वे शासकीय सेवा के लिए पात्र नहीं माने जाते। परिहार का मामला इसी प्रावधान के दायरे में पाया गया। अब आगे क्या अशोक सिंह परिहार के पास विभागीय अपील का विकल्प मौजूद है। वे बर्खास्तगी आदेश को शासन स्तर पर चुनौती दे सकते हैं। इसके अलावा हाईकोर्ट में भी राहत की मांग की जा सकती है। यदि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप सरकार अलग से आदेश जारी करती है, तो इस मामले में नया कानूनी पहलू भी जुड़ सकता है।
——————– ये खबर भी पढ़ें.. 2 से ज्यादा बच्चे, फिर भी मिलेगी सरकारी नौकरी मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए प्रस्तावित “दो बच्चों की अधिकतम सीमा” वाला प्रावधान लागू नहीं होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के उस ड्राफ्ट नियम को निरस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें दो से अधिक जीवित संतान वाले उम्मीदवारों को सरकारी सेवा के लिए अपात्र घोषित करने का प्रावधान रखा गया था। पढ़िए पूरी खबर।



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