अमेरिकी एयरफोर्स का ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट C-17 ग्लोबमास्टर मंगलवार को मॉस्को के एक एयरपोर्ट पर उतरा। अमेरिका और रूस में जारी तनाव के बीच इस अमेरिकी सैन्य विमान की रूस में लैंडिंग लोगों को चौंका रही है। खास बात यह है कि विमान ने 23 अगस्त को वॉशिंगटन डीसी के पास मौजूद जॉइंट बेस एंड्रयूज से उड़ान भरी थी। यही वह अमेरिकी सैन्य अड्डा है, जहां राष्ट्रपति के विमान खड़े रहते हैं। इसमें एयरफोर्स वन भी शामिल है। विमान को मॉस्को क्यों भेजा गया, इसमें कौन सवार था और क्या सामान ले जाया गया, इसका जवाब अभी नहीं मिला है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, रूस का कहना है कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। अमेरिका ने भी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। C-17 की मॉस्को में लैंडिंग का वीडियो का सोशल मीडिया पर वायरल है… रूसी हवाई इलाके से गुजरा अमेरिकी विमान रिकॉर्ड के मुताबिक, C-17 23 अगस्त को पहले लातविया की राजधानी रीगा पहुंचा। फिर इसके बाद आज मॉस्को के लिए सुबह करीब 9 बजे रवाना हुआ। इसमें उसे 74 मिनट लगे। इस उड़ान की एक और खास बात यह रही कि विमान रूस के हवाई क्षेत्र से होकर मॉस्को पहुंचा। यह प्लेन RCH4555 नाम से उड़ रहा था। रूस ने भले ही कहा हो कि उसे इस विमान की यात्रा की जानकारी नहीं है, लेकिन नियम के मुताबिक किसी भी अमेरिकी सैन्य विमान को इस रास्ते से उड़ान भरने के लिए रूसी अधिकारियों की मंजूरी जरूरी है। यूएस डिफेंस मिनिस्टर के रूस जाने की चर्चा कुछ दिनों से आ रही मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के साथ रुकी हुई बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए मॉस्को जा सकते हैं। अमेरिका और यूरोपीय अधिकारियों ने रूस के सामने रखने के लिए एक नया प्रस्ताव तैयार किया है। अमेरिका और रूस के बीच यूक्रेन युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत फिलहाल लगभग ठप है। रिपोर्टों के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रम्प का ध्यान ईरान युद्ध की ओर जाने के बाद इस बातचीत में रुकावट आई है। रूसी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, मॉस्को की सड़कों पर अमेरिकी राजनयिक नंबर प्लेट वाली गाड़ियों का काफिला देखा गया। सोशल मीडिया पर इससे जुड़े वीडियो भी वायरल हैं… यूएस का जॉइंट बेस एंड्रयूज अहम क्यों? C-17 ग्लोबमास्टर: टैंक से सैनिकों तक इस्तेमाल C-17 ग्लोबमास्टर III अमेरिकी वायुसेना का भारी सैन्य परिवहन विमान है। इसका इस्तेमाल सैनिकों, टैंकों, सैन्य वाहनों और भारी सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किया जाता है।
इसके अलावा यह हवा से सामान गिराने, घायल सैनिकों को निकालने और आपदा के समय राहत सामग्री पहुंचाने के काम भी आता है। यह लड़ाकू विमान या बॉम्बर नहीं है। इसकी रफ्तार करीब 834 किमी/घंटा है और यह करीब 3,500 फीट लंबी रनवे से भी उड़ान भर सकता है। इसकी खासियत है कि यह पीछे की ओर भी चल सकता है। भारत के पास भी 11 C-17 ग्लोबमास्टर भारत के पास C-17 ग्लोबमास्टर के 11 प्लेन हैं। भारत ने 2011 में अमेरिका से 10 C-17 ग्लोबमास्टर III खरीदने का करीब 4.1 अरब डॉलर का सौदा किया था। पहला प्लेन जून 2013 में भारत पहुंचा और बाकी 9 विमानों की डिलीवरी 2014 तक पूरी हो गई। इसके बाद भारत को 2019 में 11वां C-17 मिला। खास बात यह है कि यह प्लेन पहले से बना हुआ था और बोइंग के पास बिना किसी खरीदार के रखा था। भारत ने इसे अपनी जरूरत के मुताबिक तैयार करवाकर हासिल किया। भारत के सभी 11 C-17 ग्लोबमास्टर भारतीय वायुसेना की 81 स्क्वाड्रन ‘स्काई लॉर्ड्स’ का हिस्सा हैं। इस यूनिट का बेस हिंडन एयरबेस में है। यमन से लेकर लद्दाख तक दिखा चुका है ताकत ————————– ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन: इनमें सोना, टेक्नोलॉजी और शिपिंग शामिल, कहा- जो देश बिजनेस करेंगे, उन पर भी कार्रवाई अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 अहम क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। पूरी खबर पढ़ें…
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