जब 4 दिन लगातार फील्डिंग करती रही टीम इंडिया:टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े स्कोर की कहानी, 29 साल से नहीं टूटा रिकॉर्ड | ACTPnews

जब 4 दिन लगातार फील्डिंग करती रही टीम इंडिया:टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े स्कोर की कहानी, 29 साल से नहीं टूटा रिकॉर्ड

2 अगस्त 1997। कोलंबो में भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट शुरू हुआ। श्रीलंका को टेस्ट टीम बने 15 साल हो चुके थे। तब तक 75 टेस्ट में सिर्फ 9 जीत मिली थीं। घर में 32 में 6 और विदेश में 43 में 3 मैच जीते थे। सचिन तेंदुलकर की कप्तानी वाली टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 537/8 पर पारी घोषित कर दी। लगा, अब भारतीय गेंदबाज दबाव बनाएंगे। लेकिन आगे जो हुआ, उसने मैच की पूरी कहानी बदल दी। श्रीलंका ने 271 ओवर बल्लेबाजी कर 952/6 का रिकॉर्ड स्कोर खड़ा कर दिया। सनथ जयसूर्या ने 340 रन और रोशन महानामा ने 225 रन बनाए। दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 576 रन जोड़ दिए। भारत के लिए सबसे अजीब कहानी डेब्यूटेंट निलेश कुलकर्णी की रही। उन्होंने टेस्ट की पहली ही गेंद पर विकेट लिया। इसके बाद भारत को दूसरे विकेट के लिए दो दिन तक इंतजार करना पड़ा। पांच दिन के इस टेस्ट में 1,489 रन बने और सिर्फ 14 विकेट गिरे। मैच ड्रॉ रहा। लेकिन श्रीलंका का 952/6 टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा टीम स्कोर बन गया। यह रिकॉर्ड आज तक नहीं टूट सका है। भारत से तीन बल्लेबाजों ने शतक लगाए सचिन तेंदुलकर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी चुनी। भारत ने 167.3 ओवर में 537/8 का स्कोर बनाया और पारी घोषित कर दी। भारत की ओर से तीन बल्लेबाजों ने शतक लगाए। नवजोत सिंह सिद्धू ने 111 रन, सचिन तेंदुलकर ने 143 रन और मोहम्मद अजहरुद्दीन ने 126 रन बनाए। तेंदुलकर और अजहरुद्दीन ने चौथे विकेट के लिए 221 रन की साझेदारी की। पहली गेंद पर विकेट, फिर 576 रन की साझेदारी श्रीलंका के लिए सनथ जयसूर्या और मरवन अटापट्टू ओपनिंग करने उतरे। दूसरे दिन के आखिरी सेशन में सचिन ने डेब्यूटेंट निलेश कुलकर्णी को गेंद थमाई। कुलकर्णी ने पहली ही गेंद पर अटापट्टू को आउट कर दिया। इसके बाद रोशन महानामा क्रीज पर आए। फिर जयसूर्या और महानामा ने भारतीय गेंदबाजों को विकेट के लिए तरसा दिया। अटापट्टू 39 रन के टीम स्कोर पर आउट हुए। इसके बाद दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 576 रन जोड़े। तीसरे दिन दोनों ने 283 रन और चौथे दिन 265 रन जोड़े। चौथे दिन स्टंप्स तक जयसूर्या 326 और महानामा 211 रन पर नाबाद थे। पांचवें दिन महानामा 561 गेंदों पर 225 रन बनाकर आउट हुए। उनकी पारी में 27 चौके थे। अनिल कुंबले ने उन्हें आउट किया। इसके सिर्फ दो गेंद बाद जयसूर्या भी पवेलियन लौट गए। जयसूर्या टेस्ट में तिहरा शतक लगाने वाले पहले श्रीलंकाई बल्लेबाज बने। उन्होंने 578 गेंदों पर 340 रन बनाए। उनकी पारी में 36 चौके और 2 छक्के शामिल थे। वह 799 मिनट क्रीज पर रहे। उनका 340 रन उस समय टेस्ट इतिहास की चौथी सबसे बड़ी इंडिविजुअल पारी थी। उनसे आगे ब्रायन लारा 375, गैरी सोबर्स 365* और लेन हटन 364 रन पर थे। 576 रन की साझेदारी ने रिकॉर्ड तोड़े जयसूर्या और महानामा ने दूसरे विकेट के लिए 576 रन जोड़कर उस समय की टेस्ट क्रिकेट की सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड बनाया। उनसे पहले यह रिकॉर्ड 467 रन का था, जो न्यूजीलैंड के मार्टिन क्रो और एंड्रयू जोन्स ने बनाया था। दोनों की साझेदारी 500 रन का आंकड़ा पार करने वाली टेस्ट क्रिकेट की पहली साझेदारी बनी। हालांकि, 2006 में श्रीलंका के ही कुमार संगकारा और महेला जयवर्धने ने साउथ अफ्रीका के खिलाफ 624 रन जोड़कर यह रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। जयसूर्या-महानामा के बाद भी नहीं रुका श्रीलंका जयसूर्या और महानामा के आउट होने के बाद भी श्रीलंका की रन नहीं रुके। अरविंद डी सिल्वा ने 126 रन बनाए और अर्जुन रणतुंगा के साथ 175 रन की साझेदारी की। रणतुंगा ने 86 रन बनाए। इसके बाद डेब्यू कर रहे महेला जयवर्धने ने 66 रन जोड़े। श्रीलंका ने इस दौरान 903/7 के उस समय के टेस्ट रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। जयसूर्या को देखने 30 हजार फैंस पहुंचे पांचवें दिन जयसूर्या 326 रन पर नाबाद थे। वह ब्रायन लारा के 375 रन के रिकॉर्ड से सिर्फ 50 रन दूर थे। रिकॉर्ड टूटने की उम्मीद में आर. प्रेमदासा स्टेडियम में 30 हजार से ज्यादा दर्शक पहुंच गए। दर्शकों के लिए करीब 30 हजार मुफ्त टिकट रखे गए थे। हर नजर जयसूर्या पर थी। लेकिन लारा का रिकॉर्ड टूटने से पहले ही उनकी पारी खत्म हो गई। राजेश चौहान की गेंद पर जयसूर्या ने शॉट खेला और प्वाइंट पर सौरव गांगुली ने कैच पकड़ लिया। जयसूर्या 578 गेंदों पर 340 रन बनाकर आउट हुए। 3 भारतीय स्पिनर्स ने 220 ओवर फेंके भारतीय गेंदबाजों ने कुल 271 ओवर किए। राजेश चौहान ने 78 ओवर, अनिल कुंबले ने 72 ओवर और डेब्यूटेंट निलेश कुलकर्णी ने 70 ओवर फेंके। तीनों ने मिलकर 220 ओवर किए और 594 रन खर्च किए। इसके बावजूद तीनों को सिर्फ एक-एक विकेट मिला। सचिन ने पिच को बताया था ‘डेड ट्रैक’ मैच के बाद सचिन तेंदुलकर ने जयसूर्या और महानामा की बल्लेबाजी की तारीफ की। साथ ही उन्होंने आर. प्रेमदासा स्टेडियम की पिच पर सवाल उठाए। उनके मुताबिक पिच पर गेंदबाजों के लिए बहुत कम मदद थी। भारतीय स्पिनर्स ने लंबे स्पेल किए, लेकिन श्रीलंकाई बल्लेबाजों को रोकना मुश्किल रहा। श्रीलंका रिकॉर्ड के पीछे क्यों गया? शुरुआत में जयसूर्या और महानामा का लक्ष्य सिर्फ फॉलोऑन बचाना था। लेकिन चौथे दिन टी-ब्रेक तक जयसूर्या को अंदाजा हो गया कि वह बड़े रिकॉर्ड के करीब पहुंच चुके हैं। इसके बाद श्रीलंका ने पारी घोषित नहीं की। महानामा को बाद में इस बात का अफसोस रहा कि वह जयसूर्या के साथ ज्यादा देर नहीं टिक सके। उनका मानना था कि अगर वह कुछ और समय क्रीज पर रहते, तो जयसूर्या को लारा के 375 रन के रिकॉर्ड के करीब पहुंचने में मदद कर सकते थे।



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