Highlights
- पाकिस्तान सीमा बंद होने से अफगानिस्तान के अंगूर किसानों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ।
- अच्छी फसल के बावजूद घरेलू बाजार में अंगूर की अधिक सप्लाई से कीमतें तेजी से गिरीं।
- सीमा बंद होने से मजदूरों का रोजगार घटा, 1,500 कामगारों वाले बाग में अब सिर्फ 15 मजदूर।
काबुल: अफगानिस्तान के दक्षिणी प्रांत कंधार में इस साल अंगूर की फसल अच्छी हुई है, लेकिन किसान इस अच्छी पैदावार का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बॉर्डर बंद होने से अंगूर का सबसे बड़ा बाजार पहुंच से बाहर हो गया है। ऐसे में किसान ताजे अंगूर बेचने के बजाय उन्हें सुखाकर किशमिश बनाने को मजबूर हैं। दोनों देशों के बीच महीनों से पहाड़ी सीमा पर रुक-रुककर गोलीबारी हो रही है। इस लड़ाई में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार उन आतंकियों को पनाह दे रही है, जो पाकिस्तान के अंदर हमले करते हैं। अफगानिस्तान इस आरोप से इनकार करता है।
अंगूर की भरपूर फसल, लेकिन खरीदार नहीं
लड़ाई के साथ ही दोनों देशों के बीच रास्ते भी बंद हो गए हैं। इससे अफगानिस्तान के कई उत्पादकों के लिए पाकिस्तान का बाजार पूरी तरह कट गया है। कंधार के जरी जिले में अंगूर के बड़े गोदामों में किसान अपनी फसल सुखाने में जुटे हैं। लंबे गोदाम में पंखे गर्म हवा को चारों ओर घुमा रहे हैं और लकड़ियों पर लटके हरे-भरे अंगूर धीरे-धीरे सूखकर किशमिश में बदल रहे हैं। ताजा अंगूर पाकिस्तान नहीं भेज पाने के कारण किसानों ने उन्हें घरेलू बाजार में बेचना शुरू किया। लेकिन वहां पहले से ही अंगूर की भारी सप्लाई है। ज्यादा माल आने से कीमतें तेजी से गिर गई हैं। अब कई किसान अंगूर को सुखाकर किशमिश बना रहे हैं। हालांकि, किशमिश के दाम भी काफी नीचे गिर चुके हैं।
अंगूर के खेतों में काम करने वालों की संख्या काफी घट गई है।
किशमिश के रेट में भी आई भारी गिरावट
जरी में अंगूर का बाग रखने वाले साखी जान ने बताया कि उनके परिवार में 10 लोग हैं और परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि पहले 7 किलो किशमिश करीब 1000 से 1200 अफगानी में बिक जाती थी। अब इतनी ही किशमिश के लिए केवल 400 से 450 अफगानी मिल रहे हैं। उन्होंने कहा,
‘हम शुक्रगुजार हैं, लेकिन हालात पहले जैसे नहीं हैं। अब संघर्ष बहुत ज्यादा बढ़ गया है। पहले काम लगातार मिलता था। हम कुछ अंगूर बेच लेते थे और आम तौर पर लोगों के पास काम भी रहता था, लेकिन अब मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं। हम अपनी सरकार और पाकिस्तान, दोनों से आग्रह करते हैं कि इन रास्तों को खोलें और किसी समझौते पर पहुंचें। मौजूदा स्थिति लोगों के लिए बहुत बड़ी मुश्किल पैदा कर रही है।’
अंगूर के साथ अनार का कारोबार भी ठंडा
कंधार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इन्वेस्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर अब्दुल बाकी बीना ने बताया कि सीमा बंद होने से अफगानिस्तान के फल निर्यात को बड़ा नुकसान हुआ है। इसका असर सिर्फ अंगूर पर नहीं, बल्कि अनार के कारोबार पर भी पड़ा है। उनके मुताबिक, 2025 में दक्षिणी अफगानिस्तान के 5 प्रमुख अंगूर उत्पादक प्रांतों ने 44,225 टन अंगूर का निर्यात किया था। इसकी कीमत करीब 13.8 मिलियन डॉलर थी। इसमें से करीब 43,000 टन अंगूर पाकिस्तान भेजे गए थे, जबकि बाकी अंगूर बांग्लादेश, इराक और भारत गए थे। लेकिन इस साल अब तक तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अभी तक सिर्फ 256 टन अंगूर का निर्यात हो सका है, जिसकी कीमत करीब 1 लाख डॉलर रही है।
अफगानिस्तान के किसानों को अब घाटे का डर सता रहा है।
1500 मजदूरों वाले बाग में अब 15 कामगार
सीमा बंद होने का असर किसानों और कारोबारियों के साथ-साथ मजदूरों पर भी पड़ा है। अंगूर तोड़ने का काम करने वाले कुदरतुल्लाह पोपल ने बताया कि जिस बाग में वह पिछले साल काम करते थे, वहां करीब 1500 मजदूर काम करते थे। इस साल यह संख्या घटकर सिर्फ 15 के आसपास रह गई है। उन्होंने कहा,
‘फसल अच्छी हुई है। अंगूर भी अच्छे निकले हैं, लेकिन समस्या यह है कि उन्हें दूसरे देशों में निर्यात नहीं किया जा सकता। अब उन्हें घरेलू बाजारों में भेजा जा रहा है, जहां पहले से ही अंगूर की भरमार है। जब रास्ते बंद हो जाते हैं और व्यापार रुक जाता है, तो व्यापारियों, मजदूरों और बाग मालिकों समेत सभी की रोजी-रोटी ठप हो जाती है।’
गरीबी के बीच कमाई घटने से बढ़ी चिंता
अफगानिस्तान पहले से ही गरीबी की गंभीर समस्या से जूझ रहा है और कमजोर वर्गों में कुपोषण भी बड़ी चुनौती है। ऐसे में किसानों, मजदूरों और छोटे कारोबारियों की आमदनी में इतनी बड़ी गिरावट उनके लिए बेहद गंभीर हो सकती है। कंधार के अंगूर उत्पादकों के लिए इस साल समस्या फसल की कमी नहीं, बल्कि बाजार तक पहुंच की है। अच्छी फसल होने के बावजूद सीमा बंद होने से निर्यात रुक गया है, घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ गई है और कीमतें गिर गई हैं। अब किसान अपनी फसल को बचाने के लिए अंगूर को किशमिश में बदल रहे हैं, लेकिन वहां भी कम कीमत मिलने से उनकी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। (AP से इनपुट्स के साथ)
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