मेटा के सीईओ मार्क ज़करबर्ग ने child sexual abuse material, डीपफेक कंटेंट और कंटेंट मॉडरेशन में हुई गलतियों के लिए भारत सरकार से माफी मांगी। मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर ने दिल्ली में आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की और उन्हें ज़करबर्ग का लिखित माफीनामा सौंपा। मेटा ने माना है कि कुछ खास तरह के कंटेंट को बूस्ट करने के लिए बहुत पैसे दिए गए थे। कंपनी ने इस कंटेंट पर ध्यान नहीं दिया लेकिन भविष्य में मेटा अपनी ज़िम्मेदारी का पूरा ख्याल रखेगा, ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।
दरअसल जंतर मंतर पर छात्रों के आंदोलन के दौरान हजारों डीफ फेक वीडियो सर्कुलेट हुए, AI जेनरेटेड कंटेंट को पोस्ट करके अफवाहें फैलाई गईं, पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे हैंडल्स से भड़काऊ पोस्ट किए गए, फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर ये मैसेज तेजी से वायरल हुए, इन्हें बूस्ट किया गया, लेकिन मेटा ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इंस्टाग्राम और फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट किया था जिसमें GenZ के लिए उनका संदेश था। प्रधानमंत्री के इस वीडियो को मेटा ने फेसबुक से 5-6 घंटे के लिए हटा दिया था, लेकिन जब आपत्ति दर्ज की गई तो इस वीडियो को रीस्टोर कर दिया गया।
मेटा ने इसे टेक्निकल गलती बताकर माफी भी मांगी लेकिन आईटी मंत्रालय ने इस पर सख्ती दिखाई, मेटा को तलब किया गया। संसदीय समिति ने मार्क ज़करबर्ग को 3 दिन के अंदर अपनी गलतियों के लिए माफी मांगने का अल्टीमेटम दिया था। ये भी बताया गया कि अगर ज़करबर्ग माफी नहीं मांगते तो सरकार सेफ हार्बर क्लॉज के तहत मेटा को मिलने वाला प्रोटैक्शन खत्म कर देगी। ‘सेफ हार्बर क्लॉज’ हटने से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के अधिकारियों के खिलाफ सीधे FIR दर्ज करने का रास्ता साफ हो जाता। इसीलिए बुधवार को समय सीमा खत्म होने से पहले ज़करबर्ग ने मोदी सरकार से माफी मांग ली।
मार्क ज़करबर्ग का माफी मांगना बड़ी बात है। मेरी जानकारी ये है कि IT मंत्री अश्विनी वैष्णव ने META के global officers को अच्छी तरह से grill किया। अश्विनी वैष्णव IIT से पढ़े हैं, टेक्नोलोजी expert हैं, इसलिए उनके सामने technical error जैसी दलीलें नहीं चल पाई। अश्विनी वैष्णव इस बात को भी समझते हैं कि Meta के लिए भारत कितना बड़ा मार्केट है। इस साल भारत से Meta को 29 हजार 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की आमदनी हुई, इसलिए Meta को भारत की जरूरत है। Meta दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे ताकतवर कंपनियों में से एक है लेकिन उसने अपनी गलती मानी और माफी मांगी। ये भारत की ताकत को दिखाता है। कहा गया है कि कंपनियां झुकती हैं, झुकाने वाला चाहिए।
नकली घी, मिलावटी मसाले बेचने वाले, नरसंहार के दोषी
अगर आप सस्ता घी, हल्दी, मिर्च या जीरा जैसी चीजें खरीदते हैं तो सावधान हो जाइए। हो सकता है, जो घी आप खरीद रहे हों, उसमें एक बूंद भी असली घी न हो। गुजरात के गांधीनगर जिले के कलोल इलाके में पुलिस ने 30 हजार लीटर नकली घी ज़ब्त की। ये नकली घी ट्रेडिंग कम्पनियों को बेचा जाता था जो इस पर अपनी कम्पनी का नाम छाप कर अपनी ब्रांड के घी के तौर पर बेचती थीं। पुलिस को रिफाइंड पाम ऑयल (RPO) के साथ साथ 200 लीटर वाले 223 बैरल में पीले रंग के केमिकल RM enhancer मिले। कुल 1.67 करोड़ रुपये का ये संदिग्ध पाम ऑयल और केमिकल का जखीरा एफ.एस.एल. तथा खाद्य एवं औषधि विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में जब्त किया गया।
पूछताछ के दौरान कारखाने के मालिक ने बताया कि वह पाम ऑयल तैयार करने के लिए केमिकल एवं वेजिटेबल फैट मिलाकर low quality का पाम ऑयल बनाता था। उसने बताया कि वो पाम आयल में RM enhancer इसलिए मिलाता था ताकि फाइनल प्रोडक्ट की कीमत बढ़ सके। साथ ही उसमे BT NEGATIVE नाम का प्रोडक्ट मिलाता था। अक्सर नकली घी बनाने वाले लोग इस प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हैं। कारखाने का मालिक बिना किसी ब्रांडिंग के उसे बेच देता था ताकि आगे ट्रेडर उसे घी कह कर बेच सके। इस प्रकार तैयार किए गए पाम ऑयल का यदि खाद्य पदार्थ के रूप में उपयोग किया जाए, तो इससे मनुष्यों में हृदय रोग, उच्च कोलेस्ट्रॉल तथा उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इस कंपनी के मालिक को दो साल पहले भी नकली घी के धंधे में पकड़ा गया था लेकिन वो जमानत पर छूट गया। इसके बाद फिर इसी काम में लग गया। वह गुजरात, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र में नकली घी की सप्लाई कर रहा था। पंजाब के लुधियाना में भी बुधवार को नकली घी का एक godown पकड़ा गया। यहां तीन हजार लीटर नकली घी बरामद हुआ। इस नकली घी की सप्लाई भी अहमदाबाद से की गई थी। उत्तर प्रदेश के कानपुर में नकली मसाले बनाने वाली फैक्ट्री पकड़ी गई। यहां 2,000 किलो ऐसी हल्दी मिली जिसमें हल्दी का एक टुकड़ा भी असली नहीं था। खराब क्वालिटी के चावल का पाउडर बनाने के बाद उसमें कैमिकल कलर डालकर इसे हल्दी जैसा रंगा जाता था और मार्केट में हल्दी बेची जा रही थी। इसी तरह लाल रंग डालकर मिर्च और लकड़ी के बुरादे को रंग कर धनिया पाउडर बना कर बेचा जाता था। खाद्य विभाग ने 5 लाख 86 हजार रुपये के नकली मसालों का स्टॉक जब्त किया है।
हैदराबाद में तीन दुकानों से पॉलिश्ड लौंग और जीरा बरामद हुआ। मसालों को फ्रेश दिखाने के लिए कपड़ों को रंगने वाली डाई का इस्तेमाल होता था। घी, हल्दी, जीरा, लौंग जैसी चीजों में केमिकल मिलाना महापाप है। ये सामूहिक नरसंहार से कम नहीं है। ज्यादातर मामलों में मिलावट करने वालों को ज़मानत मिल जाती है। बरसों तक केस चलते हैं, बहुत से मामलों में वे छूट जाते हैं। इसीलिए उनकी हिम्मत बढ़ती है। संसद में दी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक़, देश भर में पिछले पांच साल में 8 लाख 86 हजार फूड सैम्पल लिए गए जिनमें 20% सैंपल मिलावटी पाए गए। मिलावट के 75% से ज्यादा मामलों में सिर्फ आर्थिक जुर्माना लगाया गया। केवल 3 प्रतिशत मामलों में ही सज़ा हुई है।
मैं हैदराबाद पुलिस की तारीफ करूंगा कि उसने मिलावट करने वालों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया। गैर इरादतन हत्या के केस में बेल मिलना भी मुश्किल होगा और सज़ा भी अच्छी खासी मिलेगी। बाकी राज्यों को भी इसी रास्ते पर चलना चाहिए ताकि अपराधियों के दिल में, मिलावट करने वालों के दिमाग में कानून का खौफ पैदा हो।
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 05 अगस्त, 2026 का पूरा एपिसोड
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