ललित मोदी बोले- मैं भगोड़ा नहीं, पूरी दुनिया घूम रहा:भारत सरकार की पहुंच बहुत लंबी, आप उनसे पंगा नहीं ले सकते | ACTPnews

ललित मोदी बोले- मैं भगोड़ा नहीं, पूरी दुनिया घूम रहा:भारत सरकार की पहुंच बहुत लंबी, आप उनसे पंगा नहीं ले सकते

IPL के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने कहा कि उनके लिए भगोड़े शब्द का इस्तेमाल मीडिया की तरफ से इस्तेमाल किया गया। उनके खिलाफ आज तक कोई केस नहीं हुआ है। न्यूज एजेंसी ANI को गुरुवार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने आगे कहा कि मैं बिल्कुल भी नहीं भाग रहा हूं। मैं पूरी दुनिया में घूम रहा हू। अगर मैं भाग रहा होता, तो आप मुझे कहीं न कहीं पकड़ ही लेते। भारत सरकार की पहुंच बहुत लंबी है। आप भारत सरकार से पंगा नहीं ले सकते। और मेरा ऐसा कोई इरादा भी नहीं है। IPL को लेकर उन्होंने कहा कि मैं इसको लेकर हमेशा से पैशनेट रहा। आखिरकार IPL मेरे बच्चे जैसा है। मैं भले ही उससे जुड़ा हूं या नहीं, मुझे फर्क नहीं पड़ता। मेरे पिता अच्छे बिजनेसमैन थे लेकिन आज मेरे परिवार को ललित मोदी की वजह से जाना जाता है। अब पढ़िए इंटरव्यू में ललित मोदी से सवाल-जवाब सवाल: आप IPL लेकर आए उसे फेमस किया और गायब हो गए। इसके बारे में क्या सोचते हैं? जवाब: मैं आज भी मैच देखता हूं। मैं इसको लेकर हमेशा से पैशनेट रहा। आखिरकार IPL मेरे बच्चे जैसा है। मैं भले ही उससे जुड़ा हूं या नहीं, मुझे फर्क नहीं पड़ता। मेरे पिता अच्छे बिजनेसमैन थे लेकिन आज मेरे परिवार को ललित मोदी की वजह से जाना जाता है। मैं कहीं जाता हूं तो लोग मुझे जानते हैं। यह सबकुछ आईपीएल की वजह से हुआ। सवाल: आपने भारत की ज्यूडिशियरी के बारे में काफी बातें की हैं। आपके लिए भगोड़े शब्द का इस्तेमाल होता है। क्या कहना है? जवाब: मैं बिल्कुल भी नहीं भाग रहा हूं। मैं पूरी दुनिया में घूम रहा हू। अगर मैं भाग रहा होता, तो आप मुझे कहीं न कहीं पकड़ ही लेते। भारत सरकार की पहुंच बहुत लंबी है। आप भारत सरकार से पंगा नहीं ले सकते। और मेरा ऐसा कोई इरादा भी नहीं है। हमारे देश में कभी सुनवाई होती ही नहीं है। न्याय मिलता तो है, लेकिन इसमें बहुत देर लग जाती है। देर से मिलने वाला न्याय भी एक तरह की सजा ही है। मेरे खिलाफ एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है अगर मैं इतना ही बुरा हूं तो ठीक है, भाई लोगों, जाओ और मुझ पर मुकदमा चलाओ। सवाल: क्या ललित मोदी अपना नाम बेदाग करने के लिए भारत लौटने की योजना बना रहे हैं? जवाब: जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अपना नाम औपचारिक रूप से बेदाग साबित करने के लिए भारत लौटने की योजना बना रहे हैं, तो क्रिकेट जगत के इस पूर्व दिग्गज ने साफ कर दिया कि नहीं, अब मेरी प्राथमिकताएं बदल गई हैं। अब खुद को सही साबित करने की चाहत खत्म हो चुकी है। एक समय था जब मैं सच में वापस आना चाहता था। और मेरे पास वापस आने के सभी कारण भी थे। लेकिन अब वापस आकर क्या करूंगा। अगर आप मुझे गिरफ्तार करना चाहते हैं, तो आपको मुझे कोर्ट ले जाना होगा। 17 साल हो गए, आप मुझे कोर्ट नहीं ले जाए पाए। तो अचानक आज आप मुझे कैसे अरेस्ट कर सकते हैं? अगर कुछ होता, तो अब तक सामने आ गया होता। सवाल: कांग्रेस के सीनियर लीडर रहे पी चिदंबरम से आपका क्या विवाद हुआ था? जवाब: जिन लोगों के पास राजनीतिक रसूख है और जिनके अपने निजी स्वार्थ हैं। वही लोग मेरे खिलाफ विवाद खड़ा करने के लिए जिम्मेदार हैं। मुझे कानून से डर नहीं लगता। मुझे जिस बात का डर है, वह यह है कि कुछ लोग हैं जो राजनीतिक से जुड़े हैं। चाहे वे विपक्ष में बैठते हों या कहीं और, उनकी मेरे खिलाफ कोई न कोई खुन्नस है। और उनका काफी दबदबा भी है। इसलिए उन्होंने माहौल खराब कर दिया। शुरुआत में मेरे हर सरकार के साथ दोस्ताना व्यवहार थे, लेकिन स्थिति तब बिगड़ गई जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने 2009 के आम चुनावों का हवाला देते हुए टूर्नामेंट के लिए सुरक्षा देने से इनकार कर दिया। तब IPL को दक्षिण अफ्रीका ले जाने से पहले हमने शेड्यूल में 154 बार बदलाव किया। और फिर आखिरकार मिस्टर चिदंबरम का फरमान आया। उस समय वे गृह मंत्री थे। वे बहुत ज़्यादा ताकतवर थे। कांग्रेस सरकार ने कहा था कि वे कांग्रेस-शासित राज्यों में अनुमति नहीं देंगे। बस यहीं से संबंध बिगड़ना शुरू हुए। सवाल: साउथ अफ्रीका से लौटने के बाद 2009 में शशि थरूर, सुनंदा पुष्कर और कोच्चि IPL फ्रेंचाइजी से जुड़ा विवाद क्या था? जवाब: 2010 में कोच्चि टस्कर्स IPL फ्रेंचाइजी को लेकर काफी विवाद हुआ था। दरअसल मैंने टीम को खरीदने वाले मालिकों के समूह पर सवाल उठाए थे। क्योंकि इसमें शशि थरूर की दिवंगत पत्नी, सुनंदा पुष्कर से जुड़ा एक कथित तौर पर धोखाधड़ी वाला इक्विटी ढांचा शामिल था। उस समय की सत्ताधारी UPA सरकार की पूरी मशीनरी उन्हें गिराने के लिए एकजुट हो गई। शशि थरूर को सोनिया गांधी का सपोर्ट था। हर तरफ से मुझ पर हमले हो रहे थे। उन दिनों मुझे अहमद पटेल के फोन आए। मुझे प्रणब मुखर्जी के फोन आए। मैं उन सभी का दोस्त था। राजीव शुक्ला मेरे पास आते थे और मुझसे कहते थे, यह करो, वह करो। बेंगलुरु में देर रात हुई एक मीटिंग के दौरान मैंने फ्रेंचाइजी समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। मुझे जानता था कि कंपनी में’शैडो शेयरहोल्डर्स’ (छिपे हुए शेयरधारकों) कौन हैं। मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि सुनंदा पुष्कर कौन थीं। मैंने टीम के सह-मालिकों से पूछा कि यह महिला कौन है? एक आदमी ने कहा कि वह एक ऑटोमोबाइल डीलर की बेटी हैं और एक मशहूर मार्केटिंग प्रोफेशनल हैं। मैंने कहा, ‘अरे, मैं भी भारत में एक मार्केटिंग प्रोफेशनल हूं और मुझे नहीं पता कि वह कौन हैं। तभी मुझे शशि थरूर का कॉल आया। उन्होंने कहा, ‘ललित, सुनंदा पुष्कर के बारे में मत पूछो। वह मेरी बहुत अच्छी दोस्त हैं।’ मैंने पूछा, ‘क्यों?’ तो उन्होंने कहा, ‘अगर तुमने पूछा, तो मैं सुबह तुम्हारे यहां छापा पड़वा दूंगा।’ तभी मैंने कहा, ‘भाड़ में जाओ। तुम खुद को समझते क्या हो? तुम भले ही भारत के विदेश मंत्री हो, लेकिन दोबारा कभी मुझसे ऐसी बात कहने की हिम्मत मत करना। मैंने जोर से फोन पटक दिया और कहा कि मैं साइन नहीं करूंगा। हालांकि बाद में तत्कालीन BCCI अध्यक्ष शशांक मनोहर ने उन्हें देर रात फोन करके जबरस्ती साइन करने पर मजबूर किया।



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