मेवाड़ के इतिहास में अपने पुत्र का बलिदान देकर राजवंश की रक्षा करने वाली मां ‘पन्नाधाय’ की जाति को लेकर उदयपुर में नया विवाद खड़ा हो गया है। गुर्जर समाज ने ‘पन्नाधाय’ को गुर्जर जाति का बताते हुए भारत सरकार की किताब ‘भारत के नारी रत्न’ में दिए गए तथ्यों पर कड़ा एतराज जताया है। भारत सरकार के प्रकाशन विभाग की ओर से वर्ष 2022 में छपी (8वां संस्करण) पुस्तक ‘भारत के नारी रत्न’ में पन्नाधाय को ‘खीची राजपूत वंश की क्षत्राणी’ बताया गया है। गुर्जर समाज ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों के साथ छेड़छाड़ और वास्तविक पहचान को बदलने का प्रयास बताया है। कलेक्टर के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, संशोधन की मांग 31 जुलाई को गुर्जर समाज सेवा समिति उदयपुर के बैनर तले अलग-अलग इलाकों से आने वाले समाज के प्रतिनिधियों का एक मंडल उदयपुर जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल से मिलने पहुंचा। कलेक्टर के मौजूद न होने पर समाज के लोगों ने एसडीएम (गिर्वा) अवुल साईकृष्णा को ज्ञापन सौंपा। गुर्जर समाज सेवा समिति के अध्यक्ष नारायण लाल गुर्जर ने कहा- ‘भारत के नारी रत्न’ के पेज नंबर-8 पर पन्नाधाय की मूल ऐतिहासिक पहचान को बदल दिया गया है। यह न केवल पन्नाधाय के महान बलिदान का अपमान है, बल्कि भावी पीढ़ी के सामने गलत इतिहास परोसने की कोशिश है। गुर्जर समाज ने दिए ये प्रमाण और संदर्भ गुर्जर समाज की प्रतिनिधि कामिनी गुर्जर व समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने ज्ञापन के साथ सबूत देने का दावा किया। 1- सरकारी पैनोरमा और दीर्घाएं- राजसमंद के कमेरी स्थित ‘पन्ना धाय पैनोरमा’, चित्तौड़गढ़ के पाण्डोली स्थित ‘पन्ना धाय पैनोरमा’, उदयपुर के गोवर्धन विलास स्थित ‘पन्ना धाय दीर्घा’ व मूर्ति का हवाला दिया गया, जहां राजस्थान सरकार द्वारा प्रामाणिक इतिहास अंकित किया गया है। 2- ऐतिहासिक किताबें- उदयलाल धाभाई द्वारा प्रमाणित ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख करते हुए पुस्तक में तत्काल संशोधन की मांग की गई। विरोध तेज करने की चेतावनी विरोध जताने वालों में गुर्जर समाज उदयपुर के अध्यक्ष नारायणलाल गुर्जर, उपाध्यक्ष हरीश धायभाई, कोषाध्यक्ष रामचंद्र धाभाई, संरक्षक देवनारायण धायभाई सहित तमाम प्रतिनिधि मौजूद रहे। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और संबंधित प्रकाशन विभाग ने प्रामाणिक दस्तावेजों के आधार पर किताब में संशोधन नहीं किया, तो विरोध तेज किया जाएगा। इस तरह सामने आया मामला गुर्जर समाज सेवा समिति उदयपुर के संरक्षक देवनारायण धाभाई ने बताया- हमारे समाज के हेमंत धाभाई और रवि धाभाई भारत के नारी रत्न किताब पढ़ रहे थे। किताब में धाय मां को खीची राजपूत बताने पर दोनों ने समाज के सामने यह बात रखी। महाराणा उदय सिंह लेकर महाराणा भोपाल सिंह तक सभी की धाय माता गुर्जर समाज से ही रही थीं। कौन थीं पन्नाधाय पन्नाधाय राणा सांगा के बेटे राणा उदयसिंह की धाय मां (पालन-पोषण करने वाली) थीं। वह चित्तौड़गढ़ के किले में रहती थीं। राणा सांगा के बेटे उदयसिंह को मां के स्थान पर दूध पिलाने के कारण ‘पन्नाधाय’ मां कहलाईं। उदयसिंह की मां कर्मावती के जौहर के बाद बेटे उदयसिंह की परवरिश का दायित्व संभाला था। इस तरह दिया था बेटे का बलिदान दासी का बेटा बनवीर चित्तौड़ का शासक बनना चाहता था। उसने राणा के वंशजों को एक-एक कर मार डाला। बनवीर एक रात महाराजा विक्रमादित्य की हत्या करके उदयसिंह को मारने के लिए उसके महल की ओर रवाना हुआ। इसकी सूचना पहले ही पन्नाधाय को मिली। उन्होंने राजवंश की रक्षा के लिए उदयसिंह को बांस की एक टोकरी में सुलाकर पत्तलों से ढककर एक सेवक के साथ महल से बाहर भेज दिया। बनवीर को धोखा देने के लिए पन्नाधाय ने अपने बेटे चंदन को उदयसिंह के पलंग पर सुला दिया। बनवीर खून से सनी तलवार लिए उदयसिंह के कमरे में आया और उसके बारे में पूछा। पन्ना ने उदयसिंह के पलंग की ओर इशारा किया जिस पर उसका बेटा सोया था। बनवीर ने पन्ना के बेटे को उदयसिंह समझकर मार डाला। बनवीर के जाने के बाद अपने मृत बेटे को चूमकर राजकुमार को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए निकल पड़ी। बाद में उसे उदयसिंह के साथ कुंभलगढ़ में शरण मिल गई।
Source link
उदयपुर में पन्नाधाय की जाति को लेकर छिड़ा विवाद:गुर्जर समाज बोला- धाय मां गुर्जर थीं; भारत सरकार की किताब में 'खीची राजपूत' बताया गया | ACTPnews

Previous Post
Next Post
Leave a Reply
Latest News
Search the Archives
Access over the years of investigative journalism and breaking reports












