‘प्रहार, द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ जल्द होगी रिलीज:निकम बोले- राजकुमार ने मेरी नकल नहीं की, पूरी बॉडी लैंग्वेज आत्मसात की | ACTPnews

‘प्रहार, द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ जल्द होगी रिलीज:निकम बोले- राजकुमार ने मेरी नकल नहीं की, पूरी बॉडी लैंग्वेज आत्मसात की

राजकुमार राव स्टारर फिल्म ‘प्रहार: द उज्ज्वल निकम स्टोरी’ जल्द ही रिलीज होगी। इसकी तैयारी और राजकुमार की मेथड एक्टिंग को लेकर खुद वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व पब्लिक प्रॉसिक्यूटर निकम ने खास बातें साझा कीं उज्ज्वल निकम बताते हैं कि ‘राजकुमार राव ने पारंपरिक रिसर्च की तरह लगातार सवाल नहीं पूछे। वह लंबे समय तक सामने बैठकर केवल यह देखते थे कि मैं कैसे बैठता हूं, फाइल कैसे पकड़ता हूं और अदालत में बहस करते समय हाथों का इस्तेमाल कैसे करता हूं। राजकुमार ने मेरी नकल नहीं की, बल्कि पूरी बॉडी लैंग्वेज को आत्मसात किया। उन्होंने मुझसे सवाल कम पूछे, लेकिन मेरी हर सूक्ष्म बारिकियों को बखूबी पकड़ा।’ संवाद रटने से ज्यादा व्यक्तित्व समझने पर फोकस किया गया निकम के मुताबिक, ‘राजकुमार की दिलचस्पी संवाद याद करने से ज्यादा उस व्यक्तित्व को समझने में थी, जिसे उन्हें परदे पर जीना था। वह रियल लाइफ में इंट्रोवर्ट हैं लेकिन किरदार की तैयार के लिहाज से की जाने वाली हर चीज जेहन में दर्ज करते जाते हैं। खास बात ये है कि वह अनावश्यक बातचीत में समय नहीं गंवाते। यही उनकी तैयारी की सबसे बड़ी ताकत है।’ वॉइस पर भी खास मेहनत की गई निकम का कहना है कि ‘अदालत में किसी वकील की पहचान केवल कानूनी ज्ञान से नहीं, बल्कि प्रस्तुति से भी बनती है। वॉइस कब ऊंची होगी, कब धीमी होगी और किस तर्क पर कितना विराम लेना है। इन बारीकियों पर राजकुमार ने खास तौर पर विशेष मेहनत की। उन्होंने सिर्फ संवाद याद नहीं किए, बल्कि उस लय को पकड़ने की कोशिश की जिसमें मैं अदालत में दलीलें रखता हूं।’ पुराने वीडियो देखकर राजकुमार ने पकड़ी निकम की शैली व्यक्तिगत मुलाकातों के अलावा राजकुमार ने निकम की कई पुराने दलीलों और रिकॉर्डिंग्स को बार-बार देखा। बकौल निकम, ‘मैंने देखा कि वह शब्दों पर जोर, बोलने की स्पीड और चेहरे के भावों को समझने के लिए मेरे वीडियोज बार-बार देखते थे। यह किसी संवाद को याद करने का नहीं, बल्कि एक इंसान के व्यक्तित्व को आत्मसात करने का अभ्यास था।’ निर्देशक के साथ असली कोर्ट जाकर लाइव माहौल भी समझा निर्देशक अविनाश अरुण के साथ राजकुमार ने वास्तविक अदालत की कार्यवाही भी देखी। निकम कहते हैं कि ‘राजकुमार को असल कोर्ट में जाकर समझ आया कि कोर्टरूम फिल्मों से बिल्कुल अलग दुनिया है। वहां हर शब्द का महत्व होता है, हर प्रतिक्रिया नियंत्रित होती है। अभिनय से ज्यादा संयम जरूरी होता है।’ शूटिंग के दौरान खुद सेट पर पहुंचे थे निकम, बोल दिए संवाद निकम के अनुसार, किसी व्यक्ति की हूबहू नकल करना आसान है लेकिन उसे परदे पर विश्वसनीय बनाना मुश्किल। राजकुमार ने मेरी आवाज या चाल की कॉपी करने की कोशिश नहीं की। उन्होंने मेरी सोच, प्रतिक्रिया और ऊर्जा को समझने की कोशिश की। एक कोर्ट सीन की शूटिंग के दौरान मैं अचानक सेट पर पहुंच गया था और वह संवाद खुद बोल दिया, जिसे राजकुमार बोलने वाले थे। कुछ पल के लिए पूरी यूनिट चौंक गई। बाद में जब सभी को पता चला कि यह मजाक था, तो सेट पर ठहाके गूंज उठे।’



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