पीढ़ियों के बीच में आपसी इज्जत बहुत जरूरी है। हम ये न सोचें कि जो हमसे बाद में पैदा हुआ है, उसमें हमसे ज्यादा अक्ल कैसे हो सकती है। इसी तरह युवा पीढ़ी ये न सोचे कि जो कल पैदा हुए थे, उनमें आज की अक्ल कहां से आ सकती है। दोनों गलत बातें हैं। चलिए, हम दो समझदार लोगों को लेते हैं- एक बुजुर्ग और एक युवा। समझदार बुजुर्ग आदमी ने ज़िंदगी गुजारी है, सर्द-गर्म देखा है, कई तरह के मौसम देखे हैं, अजीब-अजीब दौर देखे हैं। उसकी भी कुछ अंडरस्टैंडिंग है; वो भी कुछ जानता है। लेकिन ये दुनिया अब नई हो गई है। इस दुनिया में जो युवा इंसान है- औरत हो या मर्द- उसको पता है कि अब यहां नया क्या हो रहा है। लेकिन ये जो पुराना आदमी था, वो थोड़ा किनारे लग गया है। इस बूढ़े आदमी को हर बात की खबर नहीं है। दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि आपकी एक नजर किसी मंजर पर पड़े कि दूसरा आ जाता है। दूसरे को ठीक से देखें तब तक तीसरा आ जाता है। और वक्त के साथ बदलने की स्पीड बढ़ रही है। जो आज दुनिया में हो रहा है, वो हम नहीं जानते-समझते, वो यंग लोग समझते हैं। जब दुनिया बदलती है, तो सबकुछ बदलता है। तब हमें यंग लोगों की बातों पर ध्यान देना चाहिए। कल तक जो एक औरत घर में चौका-चूल्हा करती रहती थी, उसकी हिम्मत भी जागी है, उसके भी सपने जागे हैं। और हो सकता है, पुराने लोग जरा ठीक से न समझ पाए हों कि वो औरत क्या चाहती है। तो उनको अपने दिमाग के दरवाजे खुले रखना चाहिए। यह भी चाहिए कि वो यंग लोगों से इज्जत से बात करें और उनकी बातें ध्यान से सुनें। हालांकि मैं ये नहीं कहता कि उनकी सारी बातें मान जाओ, या मैं यंग लोगों से भी नहीं कह रहा कि जो बड़े हैं, वे जो कहें वो सब मान जाओ। मगर सुनो कि वे पुराने लोग क्या कह रहे हैं। सारी बातें मानना भी संभव नहीं है क्योंकि सच वक्त के साथ बदल रहा है। अगर हम एक-दूसरे की जो हमारी दौलत है- कुछ उनके पास है; कुछ हमारे पास है- उन दोनों को इकट्ठा कर सकें तो अच्छी बात है। पच्चीस-तीस साल बाद यही समस्या यंग जनरेशन को भी होने वाली है। जब उनसे नए लोग आ जाएंगे तो ये पुराने युवा लोग हमारी जगह आ जाएंगे। जब वो आएंगे तब इन्हें ये मालूम होगा कि नहीं, ये बात तो सही है। तो दोनों तरफ से जनरेशनों को यकीन और भरोसा होना चाहिए, ताकि वो एक-दूसरे से सीख सकें। ये सोचना- कि मैं बड़ा हूं और मैं पहले पैदा हुआ था इसलिए मैं ही सिखा सकता हूं, मुझे कुछ सीखना नहीं है- गलत है। ये सोचना भी- कि ये तो आउटडेटेड हो गए हैं, इन्हें क्या मालूम है, दुनिया तो कुछ और है- गलत है। एयरपोर्ट पर आपने कन्वेयर बेल्ट देखा होगा, जिस पर आपके सामान बेल्ट के साथ चलते रहते हैं। वो कन्वेयर बेल्ट चल रही है; चीजें नई-नई आती जा रही हैं। ये थोड़ी है कि आगे वाली बेल्ट अलग थी और पीछे वाली बेल्ट अलग थी। बेल्ट एक ही चल रही है, मगर उसमें सामान बदलता जा रहा है। ऐसे ही कुछ चीजें लगातार चल रही हैं। कुछ चीजें बदल रही हैं। ज़िंदगी एक कन्वेयर बेल्ट है, उस पर नए-नए विचार, जीने के नए-नए तरीके, नई अंडरस्टैंडिंग, नई साइंस, नॉलेज चल रही होती हैं। हम इन सब बातों को समझें तो मैं नहीं समझता कि जिसे हम जनरेशन गैप कहते हैं, वह कोई समस्या है। हम अलग भी हैं और जुड़े हुए भी हैं। (संपादन और समन्वय- अरविंद मण्डलोई)
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लहर-लहर:हम अलग भी हैं और आपस में जुड़े हुए भी, जनरेशन गैप कोई समस्या नहीं | ACTPnews

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