शाहरुख की फिल्मों में सबसे ज्यादा मेहनत करते थे:ललित पंडित बोले- आज के संगीत में अच्छे गीतकारों की सबसे ज्यादा कमी खलती है | ACTPnews

शाहरुख की फिल्मों में सबसे ज्यादा मेहनत करते थे:ललित पंडित बोले- आज के संगीत में अच्छे गीतकारों की सबसे ज्यादा कमी खलती है

‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’, ‘कुछ कुछ होता है’, ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘फना’ और ‘हम तुम’ जैसी फिल्मों का संगीत देने वाले ललित पंडित गुरु पूर्णिमा पर साईं बाबा को समर्पित भक्ति गीत ‘साई नाम सांचा’ लेकर आए हैं। इसमें हरिहरन, उदित नारायण, शान, जावेद अली, बेला शेंडे के साथ नई पीढ़ी के कलाकारों को भी मौका मिला है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने नए भजन, 90 के दशक के संगीत, बेटों के करियर, शाहरुख खान और आज की म्यूजिक इंडस्ट्री पर बात की। सवाल: आपने रोमांटिक गानों से लोगों का दिल जीता। अब साईं बाबा पर भक्ति गीत ‘साईं नाम सांचा’ लेकर आए हैं। इसे बनाने का विचार कैसे आया? क्या इसके पीछे कोई निजी अनुभव या आस्था जुड़ी है? जवाब: मैं और मेरी पत्नी अक्सर साईं बाबा के मंदिर जाते हैं। काफी समय से मन था कि साईं बाबा के लिए ऐसा बनाया जाए, जो सिर्फ गाना नहीं, बल्कि श्रद्धा का भाव हो। उसी दौरान मेरे दोनों बेटे संगीत निर्देशन में आगे बढ़ रहे थे। उन्होंने हाल ही में फिल्म ‘अल्फा’ का संगीत तैयार किया है। एक पिता होने के नाते मैंने सोचा कि उनके नए सफर की शुरुआत साईं बाबा के आशीर्वाद से हो। यही भावना इस भजन के पीछे रही। धुन तैयार होने पर मुझे वह पसंद आई और लगा कि इसे रिकॉर्ड कर लोगों तक पहुंचाना चाहिए। सवाल: इस भजन में कई बड़े गायकों के साथ नए गायक भी हैं। इसकी क्या वजह रही? जवाब: मैं चाहता था कि यह सिर्फ बड़े नामों वाला एल्बम न बने। इसमें हरिहरन, उदित नारायण, शान, जावेद अली और बेला शेंडे के साथ नई आवाजों को भी मौका दिया। मीना मंगेशकर की पोती सांजली, मेरे भाई के बेटे स्वर और सारिका कंसारा ने भी गाया है। स्वर पंडित जसराज के आखिरी शिष्यों में रहे हैं। मेरा मानना है कि संगीत तभी आगे बढ़ेगा, जब नई प्रतिभाओं को बड़े कलाकारों के साथ मंच मिलेगा। सवाल: आजकल भक्ति संगीत भी काफी कमर्शियल हो गया है। आपने इसे किस नजरिए से बनाया? जवाब: मैंने इस भजन को कभी कमर्शियल प्रोजेक्ट नहीं माना। इसे पूरी श्रद्धा से बनाया। पूरा खर्च भी मैंने खुद उठाया। कई लोगों ने बड़ी म्यूजिक कंपनी के साथ रिलीज करने की सलाह दी, लेकिन वहां कई सुझाव आने लगते हैं कि किस गायक को लेना है। मैं अपनी रचनात्मक आजादी से समझौता नहीं करना चाहता था। यह फिल्म का गाना नहीं था, इसलिए वही किया जो मुझे सही लगा। मेरा उद्देश्य था कि यह भजन साईं मंदिरों में बजे और लोगों को शांति दे। सवाल: जतीन-ललित की जोड़ी ने 90 के दशक को यादगार बनाया। आज पीछे मुड़कर देखते हैं तो सबसे बड़ी उपलब्धि क्या लगती है? जवाब: बहुत संतोष होता है। हमने सिर्फ हिट गाने नहीं, बल्कि ऐसा संगीत बनाने की कोशिश की जो वर्षों तक जिंदा रहे। आज नई पीढ़ी भी ‘पहला नशा’, ‘तुझे देखा तो’, ‘कुछ कुछ होता है’ और ‘चांद छुपा बादल में’ सुनती है तो लगता है कि मेहनत सफल हुई। कई लोग कहते हैं कि आर.डी. बर्मन के बाद कल्ट संगीत में जतिन-ललित का नाम भी शामिल है। यह सुनकर खुशी होती है। सवाल: अगर आज दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे या कुछ कुछ होता है का संगीत बनाना हो, तो क्या वह वैसा ही होगा या मुश्किल होगा? जवाब: उस समय भी यह आसान नहीं था। हमने हर धुन पर घंटों मेहनत की। किसी अरेंजर पर निर्भर नहीं रहते थे। हर नोट और ऑर्केस्ट्रेशन खुद तैयार करते थे। इसी वजह से हमारे संगीत की पहचान बनी। आज भी ऐसा संगीत बन सकता है, लेकिन इसके लिए निर्देशक का वैसा विजन और निर्माता का भरोसा जरूरी है। सिर्फ अच्छा संगीतकार होना काफी नहीं। सवाल: क्या आज भी निर्देशक 90 के दशक जैसा संगीत मांगते हैं? जवाब: बिल्कुल। आज भी कई निर्देशक वैसी ही मेलोडी की मांग करते हैं। लेकिन काम शुरू होने पर कुछ नया जोड़ने की बात करते हैं। यही सबसे बड़ी चुनौती है। फिल्म संगीत में अपनी नहीं, निर्देशक के विजन के मुताबिक काम करना पड़ता है। इसलिए फिल्म संगीत सबसे मुश्किल काम है। प्राइवेट म्यूजिक या भजन में अपनी सोच के मुताबिक काम किया जा सकता है, लेकिन फिल्मों में नहीं। सवाल: आज के संगीत में आपको सबसे ज्यादा किस चीज की कमी महसूस होती है? जवाब: मुझे लगता है कि आज सबसे ज्यादा कमी अच्छे गीतकारों की है। पहले आनंद बख्शी और मजरूह सुल्तानपुरी जैसे बड़े लेखक थे। उनके शब्दों में गहराई होती थी। आज अच्छे संगीतकार और गायक हैं, लेकिन वैसी लेखनी कम दिखाई देती है। मजबूत शब्द धुन का असर और बढ़ा देते हैं। सवाल: करियर का सबसे मुश्किल गाना कौन-सा रहा, जिस पर सबसे ज्यादा मेहनत करनी पड़ी? जवाब: अगर एक गाने का नाम लूं तो वह ‘पहला नशा’ है। उस समय हम इंडस्ट्री में नए थे। कई लोग हमारे काम करने के तरीके से सहमत नहीं थे और नई सोच स्वीकार नहीं करते थे। उस गाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। ‘पहला नशा’ का पूरा अरेंजमेंट मैंने खुद किया था। उस समय कोई अरेंजर नहीं था। मेरे दिमाग का वही साउंड रिकॉर्ड हुआ। शायद यही वजह है कि आज भी वह गाना वैसा ही महसूस होता है। मेरा मानना है कि कुछ गाने दोबारा नहीं बन सकते और ‘पहला नशा’ हमारे लिए ऐसा ही गाना है। सवाल: क्या कभी ऐसा लगा कि कोई गाना और बेहतर बनाया जा सकता था? जवाब: ऐसे कई गाने हैं। आज भी उन्हें सुनता हूं तो लगता है कि कुछ चीजें बेहतर हो सकती थीं। कई बार तकनीकी वजहों या साथ काम करने वाले लोगों के कारण वैसा रिजल्ट नहीं मिला जैसा हम चाहते थे। लेकिन यही संगीत की खूबसूरती है। हर गाना कुछ नया सिखाकर जाता है। सवाल: शाहरुख खान के साथ आपकी बॉन्डिंग कैसे बनी? जवाब: हमारी और शाहरुख खान की शुरुआत लगभग एक साथ हुई थी। हमारी शुरुआती बड़ी फिल्मों में ‘राजू बन गया जेंटलमैन’ थी और शाहरुख भी उसी दौर में करियर बना रहे थे। वहीं से रिश्ता बना। इसके बाद उनकी हर फिल्म में मैं और जतिन अपना सबसे बेहतरीन काम देने की कोशिश करते थे। शायद इसी वजह से उनकी फिल्मों के लिए हम सबसे ज्यादा मेहनत करते थे। सवाल: शाहरुख खान क्या म्यूजिक सिटिंग में भी शामिल होते थे? जवाब: बिल्कुल। सिर्फ शाहरुख ही नहीं, जूही चावला भी बैठकों में आती थीं, क्योंकि वह प्रोडक्शन से जुड़ी थीं। कई दिन तक गानों पर चर्चा होती थी। हम धुनें सुनाते और वे सुझाव देते थे। शाहरुख की सबसे बड़ी खूबी थी कि अगर उन्हें किसी पर भरोसा हो जाए तो पूरा विश्वास करते थे। कई बार वे कहते थे, “अगर तुम्हें लग रहा है कि यह सही है, तो करो।” एक कलाकार के लिए इससे बड़ा भरोसा नहीं होता। सवाल: शाहरुख, आमिर और सलमान के साथ काम करने का अनुभव कितना अलग था? जवाब: तीनों का अपना-अपना अंदाज था, लेकिन तीनों संगीत को गंभीरता से लेते थे। शाहरुख के साथ सबसे ज्यादा फिल्में कीं, इसलिए उनके साथ भावनात्मक रिश्ता बन गया। आमिर खान हर गाने को ध्यान से सुनते थे। सलमान खान भी संगीत में रुचि लेते थे। अजय देवगन और सनी देओल भी अपने संगीत को लेकर सजग रहते थे। बड़े कलाकार भी गानों पर उतना ही ध्यान देते हैं, जितना निर्देशक। सवाल: क्या कभी कलाकार यह भी बताते थे कि किस गायक से गाना गवाना चाहिए? जवाब: हां, कई बार कलाकारों के सुझाव सही साबित होते थे। रानी मुखर्जी चाहती थीं कि उनके गाने अलका याज्ञनिक गाएं, क्योंकि उनकी आवाज उन पर सबसे ज्यादा सूट करती थी। हमने ‘हम तुम’ में यही किया और परिणाम शानदार रहा। फिल्म संगीत टीमवर्क है। कलाकार की बात सही लगे तो उसे जरूर मानना चाहिए। सवाल: पहले लाइव रिकॉर्डिंग होती थी, अब सब डिजिटल हो गया है। कितना फर्क आया है? जवाब: बहुत बड़ा फर्क आया है। पहले स्टूडियो में 100 से 200 म्यूजिशियन एक साथ रिकॉर्डिंग करते थे। एक व्यक्ति की गलती पर पूरी रिकॉर्डिंग दोबारा करनी पड़ती थी। इसलिए हर कलाकार पूरी तैयारी और रियाज के साथ आता था। आज तकनीक आसान हो गई है। गलती होने पर लोग बाद में सुधार की सोचते हैं। इससे तैयारी और अनुशासन पर असर पड़ा है। लाइव रिकॉर्डिंग की ऊर्जा आज भी मुझे याद आती है। सवाल: क्या आज के संगीतकारों को पहले जैसी आजादी मिलती है? जवाब: नहीं, मुझे ऐसा नहीं लगता। आज के संगीतकार प्रतिभाशाली हैं, लेकिन उन्हें उतनी रचनात्मक स्वतंत्रता नहीं मिलती, जितनी हमें मिली थी। आज प्रोड्यूसर, म्यूजिक कंपनी और दूसरी राय देने वाले लोग बीच में आ जाते हैं। इससे कई बार संगीत की मूल सोच बदल जाती है। अच्छा संगीत तभी निकलता है, जब संगीतकार पर भरोसा किया जाए। सवाल: AI के दौर में क्या आपको लगता है कि संगीतकार की भूमिका बदलने वाली है? जवाब: तकनीक को रोका नहीं जा सकता। जब हम इंडस्ट्री में आए थे, तब भी नई तकनीक आ रही थी। हमें उसे सीखकर अपने काम का हिस्सा बनाना पड़ा। एआई भी उसी बदलाव का हिस्सा है। असली बात यह है कि उसका इस्तेमाल कैसे किया जाए। अगर सोच, धुन और संवेदनाएं मजबूत हैं तो कोई तकनीक उन्हें खत्म नहीं कर सकती। तकनीक सिर्फ माध्यम है, संगीत की आत्मा आज भी इंसान के भीतर से निकलती है। सवाल: आज के नए संगीतकारों में कितना भविष्य देखते हैं? जवाब: आज के लड़कों में टैलेंट की कमी नहीं है। समस्या सिर्फ यह है कि उन्हें हमारी तरह खुलकर काम करने की आजादी नहीं मिलती। हमारे समय में निर्देशक और निर्माता हम पर भरोसा करते थे। आज संगीत बनने से पहले ही कई राय आने लगती हैं। इससे संगीतकार का आत्मविश्वास प्रभावित होता है। खुला माहौल मिले तो आज की पीढ़ी भी यादगार संगीत बना सकती है। सवाल: आपके बेटे रोहांश और अबीर पंडित अब संगीत निर्देशन कर रहे हैं। उन्हें क्या सलाह देते हैं? जवाब: मेरे दोनों बेटे बचपन से संगीत सीखते आए हैं। दोनों गाते हैं और कई वाद्ययंत्र बजाते हैं। सालों तक उन्होंने मेरे लाइव शो में मेरे साथ काम किया। अब वे खुद संगीत बना रहे हैं। उन्होंने फिल्म ‘अल्फा’ का संगीत तैयार किया है। मुझे उनके काम पर गर्व है। मैं उनसे कहता हूं कि किसी की नकल मत करो। अपना संगीत बनाओ, अपनी पहचान बनाओ। उनका संगीत हमारी पीढ़ी से अलग है और यही अच्छी बात है। मैं उनके साथ बैठकर उनका काम सुनता हूं और कई बार उनसे नई चीजें सीखता हूं। सवाल: अब आगे आपके कौन-कौन से प्रोजेक्ट आने वाले हैं? जवाब: अब मैं इंडिपेंडेंट म्यूजिक पर ज्यादा काम करना चाहता हूं। फिल्मों के साथ ऐसे गाने बनाना चाहता हूं, जहां पूरी रचनात्मक आजादी हो। ‘साई नाम सांचा’ उसी दिशा में शुरुआत है। आगे भी ऐसे कई प्रोजेक्ट लेकर आऊंगा। सवाल: गुरु पूर्णिमा आपके लिए कितनी खास है? जवाब: मेरे लिए गुरु पूर्णिमा सिर्फ त्योहार नहीं है। यह गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन है। मेरे और जतिन के सबसे बड़े गुरु हमारे पिता पंडित प्रताप नारायण थे। उन्होंने हमें संगीत सिखाया। हम पांचवीं पीढ़ी से संगीत से जुड़े हैं। हमारा परिवार शास्त्रीय संगीत की परंपरा से आता है। जो सीखा, उन्हीं से सीखा। आज भी मानता हूं कि हर कलाकार का गुरु होना चाहिए। सीखना कभी खत्म नहीं होता। सवाल: आपने अपने गुरु को गुरु दक्षिणा में क्या दिया था? जवाब: सच कहूं तो मैंने अपने पिता को क्या दिया होगा? उन्होंने पूरी जिंदगी हमें ही दिया। गंडा बंधन के समय परंपरा के अनुसार नारियल और मिठाई चढ़ाई थी। लेकिन असली गुरु दक्षिणा यही है कि गुरु की शिक्षा का सम्मान करें और उसे आगे बढ़ाएं। मैं आज भी वही कोशिश करता हूं। सवाल: आपने ‘गंडा बंधन’ का जिक्र किया। यह परंपरा क्या होती है? जवाब: हमारे यहां जब गुरु किसी शिष्य को औपचारिक रूप से स्वीकार करते हैं, तो उसे ‘गंडा बंधन’ कहते हैं। मेरे पिताजी ने मेरा और जतिन का गंडा बांधा था। वे कहते थे कि जब तक गुरु शिष्य को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करते, तब तक उनका पूरा आशीर्वाद नहीं मिलता। गंडा बंधने के बाद जीवनभर गुरु के शिष्य रहते हैं। यह सिर्फ धागा नहीं, बल्कि गुरु और शिष्य के बीच विश्वास और समर्पण का रिश्ता है। सवाल: आखिर में अपने प्रशंसकों से क्या कहना चाहेंगे? जवाब: गुरु पूर्णिमा पर ‘साई नाम सांचा’ रिलीज करना मेरे लिए संतोष की बात है। उम्मीद है कि यह भजन लोगों को सुकून देगा। मैं सभी श्रोताओं का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने पिछले तीन दशकों से हमारे संगीत को प्यार दिया। उसी प्यार की वजह से आज भी नए उत्साह के साथ संगीत बना रहा हूं। उम्मीद है कि आगे भी अच्छे गीत लेकर आता रहूंगा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Latest News

View All

Search the Archives

Access over the years of investigative journalism and breaking reports

You May Have Missed