राजकुमार हिरानी ने वेब सीरीज ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ से ओटीटी डेब्यू किया। इससे उनके बेटे वीर का भी डेब्यू हुआ। बॉक्स ऑफिस के बाद अब हिरानी ओटीटी पर भी इतिहास रच रहे हैं। पढ़िए खास बातचीत… इस कहानी में ऐसा क्या था कि आपने इससे जुड़ने का फैसला किया? आज तकनीक रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है, लेकिन बुजुर्गों या तकनीक से कम परिचित लोगों के लिए यह आसान नहीं है। ट्रेन की टिकट बुक करने से लेकर बैंकिंग तक हर काम ऑनलाइन हो गया है। साइबर क्राइम की कुछ कहानियां पढ़ने के बाद लगा कि अब अपराध करने के तरीके ही नहीं, उन्हें सुलझाने का तरीके भी बदल चुके हैं। यहीं से मेरे मन में एक कहानी जन्मीं, जिसमें एक ईमानदार पुलिस अधिकारी अचानक साइबर सेल में भेज दिया जाए तो वह इस नई दुनिया में कैसे खुद को ढालेगा और क्राइम की जांच कैसे करेगा। इसके बाद प्रीतम का किरदार जुड़ा, जो युवा हैकर है। दोनों की अलग सोच और अनुभव से एक अनोखी दोस्ती और रोमांचक कहानी बनती है। शूटिंग के दौरान कौन-सा पल वेब सीरीज की असली जान लगा? शो की सबसे बड़ी ताकत आखिर में आने वाला गाना है। उसके बोल हैं- ‘कभी किसी से माफी मांग लो, कभी किसी को माफ कर भी दो। जिंदगी के सफर को थोड़ा आसान कर दो।’ कहानी लिखते समय मेरे मन में यही सवाल था कि आखिर हम दर्शकों से कहना क्या चाहते हैं। मैं नहीं चाहता था कि यह सिर्फ दोस्ती, जांच-पड़ताल या साइबर क्राइम तक सीमित रह जाए। जब ‘माफी’ का यह भाव कहानी का मूल विषय बनकर सामने आया, तब लगा कि सीरीज को उसकी असली आत्मा मिल गई। सीरीज से जुड़ा कोई ऐसा किस्सा जो अभी तक साझा नहीं किया हो? क्रिकेट खिलाड़ी वीरेंद्र सहवाग का सीरीज में गेस्ट अपीयरेंस। शूट के दौरान उन्होंने अपना पूरा सीन एक ही टेक में परफेक्ट कर दिया था। मैं खुद हैरान था। मैंने उनसे मजाक में कहा…‘शॉट तो परफेक्ट है, लेकिन एक और टेक कर लेते हैं। ऐसा लग रहा है जैसे आज स्कूल की छुट्टी जल्दी हो गई।’ मुझे याद है कि जब उन्हें फोन पर अप्रोच किया था तो उन्हें बताया कि सीरीज में एक छोटा-सा रोल है। उन्होंने बिना एक पल गंवाए जवाब दिया कि ‘मैं फलां तारीख को दिल्ली लौट रहा हूं, उसी दिन शूट कर लेते हैं।’ सहवाग के साथ साथ काम करने का अनुभव बेहद सुखद रहा। आम लोगों की असाधारण कहानियां कहने का नजरिया कहां से आता है? एक कहावत है…‘जिंदगी तब अच्छी लगती है, जब उसमें टकराव न हो। वहीं फिल्म तब अच्छी बनती है, जब उसमें टकराव हो।’ मेरा मानना है कि कहानी का नायक भले ही एक आम इंसान हो, लेकिन उसकी जिंदगी आम नहीं होनी चाहिए। अगर कहानी में कॉन्फ्लिक्ट न हो, तो उसका रोमांच और असर दोनों कम हो जाते हैं। क्या ओटीटी ने कहानी कहने का तरीका बदला है या सिर्फ मंच? फिल्मों और ओटीटी की राइटिंग में कुछ फर्क जरूर है, पर ड्रामा और इमोशन के मूल सिद्धांत वही रहते हैं। ओटीटी पर समय-सीमा नहीं होती। इसलिए आप लंबी कहानियां कह सकते हैं, किरदारों को अधिक डेप्थ से रच सकते हैं। साथ ही, दर्शकों की रुचि बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। वहीं दर्शकों को कुछ नया और रोमांचक भी देना पड़ता है, क्योंकि बोर हुए तो उनके पास दूसरे शो भी मौजूद हैं। हमेशा अलग कहानी कैसे लाते हैं? सबसे पहली कोशिश यही होती है कि ऐसी कहानी मिले, जो दर्शकों ने पहले कभी न देखी हो। हालांकि अब यह आसान नहीं है। हर साल ढेरों फिल्में और सीरीज बन रही हैं। दर्शकों के पास दुनिया भर का सिनेमा, डबिंग और सबटाइटल्स में मौजूद है। ऐसे में एक नई कहानी ढूंढना चुनौती है। आज सबसे अहम बात दर्शकों को अंत तक बांधे रखना है। सबसे ज्यादा खुशी किसी प्रोजेक्ट की सफलता से मिलती है या लोगों से? इसका सबसे बड़ा पैमाना दर्शकों की प्रतिक्रिया ही है। ‘प्रीतम एंड पेड्रो’ के बाद जितने संदेश मिले, उतने शायद किसी फिल्म के बाद भी नहीं मिले। कई लोगों ने मुझे संदेश भेजकर कहा, ‘सोचा था सिर्फ एक एपिसोड देखेंगे, लेकिन पूरी रात निकल गई। 3 बजे तक जागकर सभी छह एपिसोड देख डाले।’ एक फिल्मकार के लिए यह प्यार और सराहना ही सबसे बड़ा सुकून है। बेटे वीर के साथ काम करते वक्त सबसे ज्यादा उत्साह था या जिम्मेदारी? मैंने बहुत पहले फैसला लिया था कि मैं वीर का पहला प्रोजेक्ट डायरेक्ट नहीं करूंगा। मैंने सिर्फ कहानी लिखी और सीरीज को प्रोड्यूस किया है। इसे अविनाश अरुण ने डायरेक्ट किया है। रोचक बात है कि वीर से पहले यह रोल कोई और एक्टर कर रहे थे। फिर कुछ डेट्स इश्यू हुए तो वीर ने इच्छा जताई कि वह यह रोल करना चाहते हैं। मैंने कहा, अविनाश से बात कीजिए और ऑडिशन दीजिए। फिर वीर ने अविनाश को पहले अपना नाटक ‘लेटर्स ऑफ सुरेश’ दिखाया, जिसे फिरोज अब्बास खान ने डायरेक्ट किया है। उन्होंने सीरीज के कम से कम 15 सीन्स ऑडिशन किए। यह सिलसिला कई दिनों तक चला। फिर एक दिन अविनाश ने आकर कहा कि वीर, प्रीतम के रोल के लिए बिल्कुल परफेक्ट हैं। क्या है इस सीरीज की कहानी गोवा की पृष्ठभूमि पर बनी इस 6-एपिसोड की सीरीज में पेड्रो (अरशद वारसी) एक पुराने खयालात वाले पुलिस वाले हैं, जिन्हें साइबर सेल में ट्रांसफर कर दिया जाता है। वहां उनकी मुलाकात प्रीतम (वीर हिरानी) से होती है, जो एक जीनियस एथिकल हैकर हैं। दोनों मिलकर अपहरण और साइबर अपराध जैसे जटिल मामलों को सुलझाते हैं। इस सीरीज में विक्रांत मैसी एक सनकी नेगेटिव किरदार में दिखाई दिए हैं, जबकि बोमन ईरानी और मोना सिंह भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में शामिल हैं।
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इंटरव्यू : राजकुमार हिरानी:बेटे वीर के लिए कोई शॉर्टकट नहीं रखा, कई ऑडिशन देकर बने 'प्रीतम' | ACTPnews

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