चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई:2023 के कानून को चुनौती, चुनाव आयुक्तों के चयन वाले पैनल से CJI को हटाने पर सवाल | ACTPnews

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई:2023 के कानून को चुनौती, चुनाव आयुक्तों के चयन वाले पैनल से CJI को हटाने पर सवाल

सुप्रीम कोर्ट आज उस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फिर सुनवाई करेगा, जिसके तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाले पैनल से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) को हटाया गया था। यह मामला 2023 में बने उस कानून से जुड़ा है, जिसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति समिति में CJI की जगह केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया था। पहले चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम Court ने एक व्यवस्था तय की थी। इसके तहत प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और CJI की समिति नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होती थी। हालांकि, केंद्र सरकार ने 2023 में नया कानून लाकर चयन समिति की संरचना बदल दी। नए कानून में CJI की जगह एक केंद्रीय मंत्री को शामिल किया गया। याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि इससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट में इन्हीं याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। अगर सरकार को ही फैसला करना है तो स्वतंत्रता का दिखावा क्यों? सुप्रीम कोर्ट सुप्रीम कोर्ट ने बीती 14 मई को हुई सुनवाई में चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया। कोर्ट ने कहा था- अगर सरकार को ही फैसला करना है तो सिलेक्शन कमेटी में नेता विपक्ष (LoP) को रखकर स्वतंत्रता का दिखावा करने की जरूरत क्या है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि CBI डायरेक्टर की सिलेक्शन कमेटी में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल होते हैं, लेकिन चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति वाली समिति में कोई स्वतंत्र सदस्य नहीं रखा गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा- 2023 का कानून चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर करता है याचिकाओं में कहा गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ा 2023 का कानून चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कमजोर करता है। इसमें चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटा दिया गया है। दरअसल, 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘अनूप बरनवाल बनाम भारत संघ’ मामले में कहा था कि जब तक संसद नया कानून नहीं बनाती, तब तक चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और CJI की समिति करेगी। बाद में केंद्र सरकार नया कानून लेकर आई, जिसमें CJI को समिति से बाहर कर दिया गया। इसी कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। 6 मई: SC ने पूछा था- क्या हमारे पास कानून बनवाने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने 6 मई को मामले की सुनवाई के दौरान पूछा था कि क्या अदालत संसद को नया कानून बनाने का निर्देश दे सकती है। बेंच ने कहा कि एक याचिका में संसद को कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है। लेकिन क्या अदालत ऐसा निर्देश दे सकती है और क्या यह याचिका सुनवाई योग्य है क्योंकि कानून बनाना संसद का विशेषाधिकार है। पूरी खबर पढ़ें…
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया… 29 दिसंबर 2023 को ही CEC और EC की नियुक्ति का कानून बदला है। इसके मुताबिक, विधि​ मंत्री और दो केंद्रीय सचिव की सर्च कमेटी 5 नाम शॉर्ट लिस्ट कर चयन समिति को देगी। प्रधानमंत्री, एक केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता या सबसे बड़े विरोधी दल के नेता की तीन सदस्यीय समिति एक नाम तय करेगी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नियुक्ति होगी। नए कानून पर विपक्ष ने आपत्ति दर्ज कराई थी विपक्षी दलों का कहना था कि सरकार सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के आदेश के खिलाफ बिल लाकर उसे कमजोर कर रही है। इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2023 में एक आदेश में कहा था कि CEC की नियुक्ति प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और विपक्ष के नेता की सलाह पर राष्ट्रपति करें। याचिका में आरोप- ये कानून सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उल्लंघन जया ठाकुर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि धारा 7 और 8 स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के सिद्धांत का उल्लंघन है क्योंकि यह चुनाव आयोग के सभी सदस्यों की नियुक्ति के लिए फ्री सिस्टम प्रदान नहीं करता है। ये कानून सुप्रीम कोर्ट के मार्च 2023 के फैसले को पलटने के लिए बनाया गया, जिसने CEC-EC को एकतरफा नियुक्त करने की केंद्र की शक्तियां छीन ली थीं। यह वो प्रथा है जो आजादी के बाद से चली आ रही है। 12 मई : राहुल बोले- विपक्ष का नेता रबर स्टैंप नहीं राहुल गांधी ने 12 मई को पीएम आवास पर हुई मीटिंग में नए CBI डायरेक्टर के सेलेक्शन पर अपनी असहमति जताई थी। राहुल ने आरोप लगाया कि चयन के लिए जिन 69 उम्मीदवारों की लिस्ट दी है। उन्हें उनकी डिटेल उपलब्ध नहीं कराई। उन्होंने बैठक के बाद कहा- सरकार ने चयन प्रक्रिया को केवल एक औपचारिकता बना दिया है। किसी पहले से तय व्यक्ति का चयन होता है। विपक्ष का नेता रबर स्टांप नहीं होता। प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर हुई इस बैठक में CJI सूर्यकांत भी शामिल हुए थे। बैठक करीब एक घंटे चली। मीटिंग से निकलने के बाद राहुल ने सोशल मीडिया पर एक लेटर शेयर किया। जिसमें अपनी असहमति का कारण बताया। पूरी खबर पढ़ें… —————— ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला- क्या हमारे पास कानून बनवाने का अधिकार:कहा- यह संसद का अधिकार, चुनाव आयुक्त की नियुक्ति मामले पर सुनवाई क्या अदालत संसद को नया कानून बनाने का निर्देश दे सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए यह सवाल किया। पूरी खबर पढ़ें…



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