संसद मार्च की कोशिश, जंतर-मंतर पर लंबे समय से चल रहे आंदोलन और सरकार के साथ हुई बातचीत के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि इस पूरे आंदोलन का आगे क्या होगा। प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर कूच करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस दौरान हल्का बल प्रयोग और आंसू गैस का इस्तेमाल भी किया गया। हालांकि, स्थिति को नियंत्रित रखने की कोशिश की गई और बड़े टकराव से बचा गया। इन्हीं मुद्दों को लेकर इंडिया टीवी के खास कार्यक्रम ‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’ चर्चा की गई। इस दौरान कार्यक्रम में शो के एंकर और इंडिया टीवी के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा के साथ गेस्ट के रूप में वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह, वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री और इंडिया टीवी के पॉलिटिकल एडिटर देवेंद्र पाराशर मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों ने रखी 3 मांगे
आज आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात हुई। इस बैठक में प्रदर्शनकारियों ने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग थी कि सोनम वांगचुक को अस्पताल से जंतर-मंतर लाकर उनके सामने अनशन तुड़वाया जाए। दूसरी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। तीसरी मांग उन परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की थी, जिनके बच्चों की मौत नीट विवाद के बाद हुई।
सरकार की ओर से दिया गया भरोसा
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैठक सकारात्मक माहौल में हुई और प्रदर्शनकारियों की बातें गंभीरता से सुनी गईं। सरकार की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया कि उनकी मांगों को उचित मंच पर रखा जाएगा और उन पर विचार किया जाएगा। साथ ही उनसे आंदोलन समाप्त करने की अपील भी की गई। सरकार का कहना है कि संवाद की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है। अब आगे का फैसला प्रदर्शनकारियों को करना है।
सोशल मीडिया के जरिए लोग हुए एकजुट
चर्चा के दौरान यह भी सवाल उठा कि आंदोलन की शुरुआत किस मुद्दे को लेकर हुई थी और बाद में उसका फोकस किस दिशा में चला गया। पैनल में मौजूद वक्ताओं का मानना था कि समय के साथ आंदोलन का केंद्र बदलता गया और कई दूसरे मुद्दे भी इससे जुड़ते चले गए। उनका कहना था कि सोशल मीडिया के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को एकजुट करने की कोशिश की गई, जिससे संसद मार्च के दिन भीड़ पहले की तुलना में कहीं अधिक दिखाई दी।
संसद की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस के सामने चुनौती भी बड़ी थी। अलग-अलग रास्तों और मेट्रो स्टेशनों से लोग संसद क्षेत्र की ओर बढ़े, जिसके चलते पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी। हालांकि, प्रदर्शनकारियों को संसद परिसर तक नहीं पहुंचने दिया गया और हालात को नियंत्रित कर लिया गया।
चर्चा में यह भी कहा गया कि किसी भी आंदोलन की सफलता उसके मुद्दे, नेतृत्व और जनसमर्थन पर निर्भर करती है। यदि आंदोलन व्यापक जनसमर्थन हासिल नहीं कर पाता, तो उसका प्रभाव सीमित रह जाता है। वहीं सरकार के सामने भी यह चुनौती रहती है कि वह जनभावनाओं का सम्मान करे, लेकिन केवल दबाव या विरोध के आधार पर फैसले न ले।
आंदोलन के अगले चरण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं
फिलहाल जंतर-मंतर का मंच हटाया जा चुका है और सोनम वांगचुक अस्पताल में हैं। ऐसे में आंदोलन के अगले चरण को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर संसद के भीतर विपक्ष इस मुद्दे को उठाने की तैयारी में है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार आगे क्या रुख अपनाती है और प्रदर्शनकारी अपनी रणनीति में क्या बदलाव करते हैं।
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