तिब्बत और नेपाल में आए बाढ़ ने बड़े स्तर पर तबाही मचाई है। इस त्रासदी में हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। 26 अगस्त को जब तिब्बत की तरफ से तबाही का सैलाब आया तो नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, त्रिशूली और देवीघाट इलाकों में लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। ऐसा विध्वंसकारी मंजर नेपाल ने कभी नहीं देखा था। अब इस पूरी त्रासदी पर संयुक्त राष्ट्र यानी UN का बयान भी सामने आ गया है। UN के जलवायु प्रमुख ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र को बड़ा खतरा
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने कहा है कि नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने और अचानक बाढ़ आने की त्रासदी ने इस बात की याद दिला दी है कि पर्वतीय पर्यावरण खासकर हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र में कितना ज्यादा नाजुक हो सकता है। साइमन स्टील ने कहा कि स्थानीय समुदाय के लोग और वैज्ञानिक बीते कई सालों से चेतावनी देते आ रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिंदूकुश हिमालय क्षेत्र को बड़ा खतरा है।
‘ऐसी घटनाओं की आशंका बढ़ रही’
तिब्बत-नेपाल में आई बाढ़ को लेकर साइमन स्टील ने रविवार को कहा- “हमें ये बात भी पता है कि भारी मात्रा में कोयला, तेल और गैस के इस्तेमाल से गर्मी पैदा हो रही है। इसके कारण जलवायु भी गर्म हो रही है और ऐसी आपदाएं और दुनियाभर में ऐसी घटनाओं की आशंका बढ़ती जा रही है। इन घटनाओं के कारण सबसे ज्यादा प्रभाव संवेदनशील समुदाय पर पड़ता है।” साइमन स्टील ने दुनिया के जीवाश्म ईंधनों से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेज बदलाव और जलवायु संबंधी लचीलेपन में अधिक निवेश पर जोर दिया है। आपको बता दें कि नेपाल में आई तबाही से प्रभावित लोगों की मदद के लिए इंडिया टीवी ने हेल्पलाइन ई-मेल जारी किया है। इसमें लोग अपने मिसिंग परिजनों की तस्वीरें शेयर कर सकते हैं।
4,000 से ज्यादा लोग लापता
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण ने जानकारी दी है कि देश में आई महातबाही में मरने वालों का आंकड़ा सोमवार को 900 के पार पहुंच गया है। वहीं, 4,000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। लोगों ती तलाश में लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अब तक 9 हजार 500 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू भी कर लिया गया है। (इनपुट: भाषा)
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