पूर्व सीजेआई बीआर गवई ने गुरुवार को दैनिक भास्कर को इंटरव्यू दिया। इस दौरान उन्होंने कहा- दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई भी संस्था भ्रष्टाचार से अछूती नहीं है, लेकिन अन्य क्षेत्रों की तुलना में न्यायपालिका में यह कम है। रिटायरमेंट के बाद जजों के राजनीति में आने पर पूर्व सीजेआई बोले- मेरा मानना है कि अगर हमें सरकार से किसी पद की उम्मीद नहीं है, तो काम करते समय मन पर कोई दबाव नहीं रहता। मैंने 2019 में ही तय कर लिया था कि सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद नहीं लूंगा। भास्कर के साथ पूर्व CJI का पूरा इंटरव्यू पढ़ें… सवाल: सुप्रीम कोर्ट में ‘कॉकरोच’ और ‘पैरासाइट’ जैसे शब्द कहे गए, आप इसे कैसे देखते हैं? जवाब: इस बात को बेवजह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है। न्यायाधीश भी इंसान हैं। कोर्ट में सुनवाई के दौरान बिना किसी बुरे इरादे के अनजाने में कोई शब्द निकल जाता है। सोशल मीडिया के कारण बिना संदर्भ समझे ऐसे शब्दों का गलत अर्थ निकालकर विवाद खड़ा कर दिया जाता है, जो सही नहीं है। हमें सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान दोनों को स्वीकार करना होगा। सवाल: आपने बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री से भेंट की। आलोचना हुई, इस पर क्या कहेंगे? जवाब: मेरे पिता रा.सु. गवई धर्मनिरपेक्ष विचारों के व्यक्ति थे। मैं बचपन से इसी माहौल में पला-बढ़ा हूं। मेरे पिता के मित्र अलग-अलग धर्मों और विचारधाराओं के थे। इनमें कांग्रेस के शरद पवार, जनसंघ के उत्तमराव पाटिल और समाजवादी विचारक बापूसाहेब कालदाते, ये सभी हमारे घर आते थे। इसलिए मैं मंदिर, दरगाह, गुरुद्वारा, मस्जिद जैसे सभी धर्मस्थलों पर जाता हूं। हर धर्म का सम्मान करता हूं। डॉ. आंबेडकर ने हमें संविधान के माध्यम से धर्मनिरपेक्षता दी है, जो हर नागरिक को ‘उपासना और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता’ का मौलिक अधिकार देती है। सवाल: देश में रोज भ्रष्टाचार के कई केस सामने आ रहे हैं, क्या कोर्ट भी इसका अपवाद नहीं है? जवाब: यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई भी संस्था भ्रष्टाचार से अछूती नहीं है, लेकिन अन्य क्षेत्रों की तुलना में न्यायपालिका में इसका प्रमाण लगभग नगण्य है। न्यायपालिका खुद लगातार सुधार के उपाय करती रहती है। हमें यह पद सत्ता चलाने के लिए नहीं, बल्कि जनता की सेवा और उनका विश्वास हासिल करने के लिए मिला है। संविधान का सम्मान हर किसी को करना ही चाहिए। सवाल: क्या जजों को रिटायरमेंट के बाद सरकारी या राजनीतिक पद स्वीकार करना चाहिए? जवाब: ये निजी मामला है, पर मेरा व्यक्तिगत मानना है कि अगर हमें सरकार से किसी पद की उम्मीद नहीं है, तो काम करते समय मन पर कोई दबाव नहीं रहता। मैंने 2019 में शीर्ष कोर्ट में जज बनते समय ही तय कर लिया था कि सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद नहीं लूंगा। मैं अपनी स्वतंत्रता को मजबूत और कायम रखना चाहता था और मैंने वही किया। सवाल: जज रहते हुए परिवार को समय कैसे देते थे, सेवानिवृत्ति के बाद अब क्या कर रहे हैं? जवाब: जज रहते परिवार को समय नहीं दे पाया। लोग कहते हैं कि जजों का काम सुबह 10 से शाम 5 तक होता है, पर मामलों के अध्ययन के बाद ही कोर्ट जाना पड़ता है। शनिवार-रविवार को भी वकीलों के सामाजिक कार्यक्रमों में जाना पड़ता था। टेनिस खेलना और तैरना पसंद है। अब ये शौक पूरे कर रहा हूं। ———————————- ये खबर भी पढ़ें… CJI गवई बोले-40 साल की यात्रा से बेहद संतुष्ट हूं:कहा- न्यायपालिका की स्वतंत्रता संविधान की मूल संरचना है, 23 नवंबर को रिटायरमेंट भारत के 52वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बीआर गवई का शुक्रवार को आखिरी वर्किंग डे था। CJI गवई ने अपने अंतिम कार्य दिवस पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता को संविधान की मूल संरचना बताते हुए कहा कि 2021 के ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स कानून की प्रमुख धाराओं को रद्द करने का फैसला इसी सिद्धांत पर आधारित था। पूरी खबर पढ़ें…
Source link
पूर्व CJI बोले- कोई भी संस्था भ्रष्टाचार से अछूती नहीं:पर न्यायपालिका में यह कम; कहा- सरकार से किसी पद की उम्मीद नही करनी चाहिए | ACTPnews

Previous Post
Next Post
Leave a Reply
Latest News
Search the Archives
Access over the years of investigative journalism and breaking reports











