भारत की जगह चीन से महंगी बिजली खरीद रहा बांग्लादेश:दोगुनी कीमत चुका रहा, फैसले के लेकर देश में विरोध | ACTPnews

भारत की जगह चीन से महंगी बिजली खरीद रहा बांग्लादेश:दोगुनी कीमत चुका रहा, फैसले के लेकर देश में विरोध

बांग्लादेश भारत से मिलने वाली सस्ती बिजली के बावजूद चीन से महंगी बिजली खरीद रहा है। ढाका के पास अमीनबाजार में लग रहे वेस्ट-टू-एनर्जी प्रोजेक्ट से मिलने वाली बिजली के लिए बांग्लादेश 25 टका यानी करीब 19.25 रुपए प्रति यूनिट देगा। भारत से बांग्लादेश को करीब 11 टका यानी 8.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली मिल रही है। यानी चीन से मिलने वाली बिजली की कीमत भारत से दोगुने से भी ज्यादा है। इस फैसले को लेकर बांग्लादेश में विरोध हो रहा है। भारत के 1 पैसे के चार्ज पर भी बांग्लादेश ने जताई आपत्ति भारत के केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ने सीमा-पार बिजली लेनदेन और ग्रिड से जुड़े खर्च के लिए 1 पैसे प्रति यूनिट का शुल्क प्रस्तावित किया था। बांग्लादेश पावर डेवलपमेंट बोर्ड (BPDB) ने इस पर आपत्ति जताई। इसके बाद भारत ने प्रस्तावित शुल्क को घटाकर आधा पैसा प्रति यूनिट करने की बात कही। यानी भारत के बिजली ट्रांसमिशन से जुड़े सिर्फ 1 पैसे के प्रस्तावित चार्ज पर बांग्लादेश ने आपत्ति जताई, जबकि चीन से बिजली के लिए भारत के मुकाबले दोगुने से ज्यादा कीमत देने जा रहा है। चीन से 25 टका में बिजली खरीदने का करार ढाका के पास अमीनबाजार में कचरे से बिजली बनाने का प्रोजेक्ट लगाया जा रहा है। इसके लिए बांग्लादेश करीब 25 टका यानी 19.25 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदेगा। इस प्रोजेक्ट की क्षमता 42 MW है और इसके लिए 25 साल का करार किया जा रहा है। भारत से मिलने वाली करीब 8.50 रुपए प्रति यूनिट बिजली की तुलना में चीन से मिलने वाली बिजली की कीमत करीब 127% ज्यादा है। महंगी बिजली खरीदने के फैसले का विरोध बांग्लादेश इस समय बिजली की कमी, पावर कट और विदेशी मुद्रा की समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में चीन से महंगी बिजली खरीदने के फैसले को लेकर देश में विरोध हो रहा है। ढाका में पिछले दिनों इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन भी हुए हैं। विरोध के बीच बांग्लादेश सरकार चीन की कंपनी CMEC के साथ बिजली करार कर रही है। चीन के प्रोजेक्ट से कचरे की समस्या भी कम होगी अमीनबाजार प्रोजेक्ट का मकसद सिर्फ बिजली बनाना नहीं है। इससे ढाका में बढ़ती कचरे की समस्या को भी कम किया जाएगा। करीब 2.3 करोड़ आबादी वाले ढाका में रोजाना करीब 8 हजार मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इस कचरे का इस्तेमाल कर बिजली बनाई जाएगी। इस लिहाज से यह प्रोजेक्ट भारत से मिलने वाली बिजली का सीधा विकल्प नहीं है। लेकिन दोनों देशों से मिलने वाली बिजली की कीमत में बड़ा अंतर होने के कारण बांग्लादेश में इस फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चीन बांग्लादेश के पावर सेक्टर में बढ़ा रहा पकड़ चीन बांग्लादेश के पावर इंफ्रास्ट्रक्चर में भी अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। चीन तीस्ता नदी पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत बिजली से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए बांग्लादेश के ऊर्जा क्षेत्र में चीन की भूमिका और बढ़ेगी। चीन की योजना बांग्लादेश के रास्ते म्यांमार तक भी अपनी ऊर्जा पहुंच बढ़ाने की है। इसके लिए ढाका में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में निवेश किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन की योजना 2030 तक ढाका के इस प्लांट से म्यांमार को भी बिजली सप्लाई करने की है।



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