भारत-नेपाल बॉर्डर पर पुल को लेकर विवाद:नेपाल बोला- हमारी जमीन पर लगे बोर्ड पर भारतीय गांव का नाम; भारत सरकार ने काली पट्टी लगाई | ACTPnews

भारत-नेपाल बॉर्डर पर पुल को लेकर विवाद:नेपाल बोला- हमारी जमीन पर लगे बोर्ड पर भारतीय गांव का नाम; भारत सरकार ने काली पट्टी लगाई

उत्तराखंड के पिथौरागढ़-नेपाल बॉर्डर पर धारचूला के पास काली नदी पर बने भारत-नेपाल पुल के स्वागत बोर्ड को लेकर विवाद हो गया है। नेपाल की सीमा में लगाए गए बोर्ड पर भारतीय क्षेत्र के गांव ‘छारछुम’ का नाम लिखे जाने पर नेपाली पक्ष ने आपत्ति जताई। शुक्रवार को लगाए गए इस बोर्ड पर ‘काली नदी, छारछुम’ लिखा था। आपत्ति के बाद बोर्ड पर लिखे नाम को काली पन्नी से ढक दिया गया। PWD के AE हेम पांडेय ने बताया कि आपत्ति के बाद बोर्ड को काली पन्नी से ढका गया है। इस बोर्ड को शीघ्र ही हटा दिया जाएगा और बाद में इसके स्थान पर नया बोर्ड लगाया जाएगा। 32.98 करोड़ रुपए की लागत से बने इस पुल का पूरा खर्च भारत ने उठाया है, जबकि इसका दूसरा छोर नेपाल में है। अब तक पिथौरागढ़ से नेपाल जाने के लिए कोई मोटर पुल नहीं होने के कारण लोगों को करीब 200 किलोमीटर दूर बनबसा जाना पड़ता था। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ते थे। छारछुम पुल शुरू होने के बाद धारचूला से नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक सड़क संपर्क आसान होगा। पुल से वाहनों की आवाजाही भी हो सकेगी, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। विवाद से जुड़ी तीन तस्वीरें- 5 पॉइंट में पूरी खबर… 1. उद्घाटन से पहले बोर्ड पर विवाद- पिथौरागढ़ के धारचूला में छारछुम के पास काली नदी पर भारत-नेपाल को जोड़ने वाला मोटर पुल बनकर तैयार है। संचालन शुरू होने से पहले नेपाल की ओर लगाए गए स्वागत बोर्ड को लेकर विवाद खड़ा हो गया। शुक्रवार को लगाए गए बोर्ड पर भारतीय क्षेत्र के गांव ‘छारछुम’ का नाम लिखा था। नेपाल की आपत्ति के बाद बुधवार को इस नाम को काली पन्नी से ढक दिया गया। 2. नेपाली हिस्से में भारतीय गांव का नाम लिखने पर आपत्ति- नेपाल की ओर लगे ‘वेलकम टू नेपाल’ बोर्ड पर ‘काली नदी, छारछुम’ लिखा गया था। नेपाल के स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक दलों ने इस पर आपत्ति जताते हुए बोर्ड पर नेपाली क्षेत्र का नाम लिखने की मांग की। नेपाल की ओर इस स्थान का पता महाकाली नगरपालिका-8, असिगड़ा, दार्चुला बताया गया है। मामले की जानकारी नेपाल के परराष्ट्र मंत्रालय (विदेश मंत्रालय) और जिला प्रशासन को भी दी गई। 3. आपत्ति के बाद नाम ढका, नया बोर्ड लगाने की तैयारी- विवाद बढ़ने के बाद भारतीय पक्ष ने बोर्ड पर लिखे ‘छारछुम’ नाम को ढक दिया। धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी के अनुसार, अब नेपाली क्षेत्र का नाम दर्ज कर नया बोर्ड लगाए जाने की तैयारी है। 4. 2022 में शिलान्यास, ₹32.98 करोड़ की लागत- मल्ला छारछुम में काली नदी पर बना यह करीब 110 मीटर लंबा मोटर पुल है। इसका शिलान्यास सितंबर 2022 में हुआ था और निर्माण लागत 32 करोड़ 98 लाख रुपए है। फरवरी 2022 में भारत-नेपाल के बीच महाकाली नदी पर मोटरेबल पुल बनाने का समझौता हुआ था। परियोजना के लिए भारत सरकार ने अनुदान सहायता दी है। 5. 200km का चक्कर बचेगा, वाहनों की आवाजाही और व्यापार आसान होगा- पिथौरागढ़ से नेपाल जाने के लिए अब तक वाहनों को करीब 200 किलोमीटर दूर बनबसा होकर जाना पड़ता था। पुल शुरू होने के बाद धारचूला से नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक सीधा सड़क संपर्क मिलेगा और वाहनों की आवाजाही आसान होगी। इससे समय और खर्च बचने के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। पिथौरागढ़ की नेपाल से करीब 275 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है और जिले में दोनों देशों के बीच आवाजाही के लिए 10 अंतरराष्ट्रीय झूलापुल भी हैं। ————————————– ये खबर भी पढ़ें… टनल के अंदर चार मंजिला बिल्डिंग, बिना ऑक्सीजन फंसे मजदूर:माउंट एवरेस्ट विजेता रेस्क्यू में जुटे; कहीं बिना सिर की बॉडी, कहीं सिर्फ पैर मिला ‘मैं टनल में रेस्क्यू के लिए घुसा, तो दलदल में धंसने लगा। जितना हिलता, उतना ही धंसता गया। फिर समझ आया कि यहां जमीन ही निगल रही है। मैं कमर तक धंसा था। निकलने में करीब 1 घंटे लग गए। रसुवा की इस टनल में जो देखा, ऐसा अनुभव पहले कभी नहीं हुआ।’ ये बता रहे माउंटेन गाइड विक्रम कर्के रसुवा की टनल में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा हैं। वे चिलिमे, त्रिशूली-1 और त्रिशूली-3 A टनल के रेस्क्यू में शामिल हैं, जहां 100 से ज्यादा लोग फंसे हुए हैं। इन्हें निकालने के लिए नेपाल और भारतीय सेना समेत कई देशों की रेस्क्यू टीमें जुटी हैं। टनल के अंदर का हाल बताते हुए विक्रम कहते हैं, ‘मशीनों के बिना यहां फंसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल है। विक्रम ने हमें रेस्क्यू की पूरी कहानी बताई…(पढ़ें पूरी खबर)



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