मीनाक्षी के नामांकन पर चुनाव आयोग का फैसला बाकी:शिकायत के 5 घंटे बाद भी डिसीजन नहीं, कल खड़गे लेंगे बैठक; राष्ट्रपति से मिलेंगे विधायक | ACTPnews

मीनाक्षी के नामांकन पर चुनाव आयोग का फैसला बाकी:शिकायत के 5 घंटे बाद भी डिसीजन नहीं, कल खड़गे लेंगे बैठक; राष्ट्रपति से मिलेंगे विधायक

मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस के 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को दिल्ली में निर्वाचन आयोग से मुलाकात की। कांग्रेस सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द करने का रिटर्निंग ऑफिसर (RO) का फैसला गलत है और कानून के मुताबिक नहीं है। जिस आधार पर नामांकन रद्द किया गया, उसका कानून में कोई प्रावधान नहीं है। नटराजन के खिलाफ ऐसा कोई आपराधिक मामला नहीं था, जिसका उन्हें खुलासा करना पड़ता। कोर्ट ने सिर्फ एक नोटिस भेजा था। इसमें नटराजन से पूछा गया था कि मामले में आगे सुनवाई शुरू की जाए या नहीं। प्रतिनिधिमंडल में केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, रणदीप सुरजेवाला, सचिन पायलट, भूपेश बघेल, विवेक तन्खा शामिल थे। एमपी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने बताया कि चुनाव आयोग ने प्रतिनिधिमंडल को 2 घंटे के भीतर फैसला लेने का आश्वासन दिया है। हालांकि, 5 घंटे बीत चुके हैं। आयोग ने कोई फैसला नहीं लिया है। इधर, भोपाल में कांग्रेस के कार्यकर्ता बुधवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (सीईओ) दफ्तर पहुंचे। गेट बंद मिलने पर उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यूनिफॉर्म दफ्तर के बाहर गेट पर टांग दी। दरअसल, मंगलवार को चुनाव अधिकारियों ने हलफनामे में अनियमितताएं पाए जाने के आधार पर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। जिसके बाद कांग्रेस नेताओं ने दिल्ली और भोपाल में चुनाव आयोग के दफ्तरों के बाहर धरना दिया था। भाजपा का आरोप था कि उन्होंने शपथ पत्र में हैदराबाद कोर्ट के एक लंबित मामले की जानकारी छिपाई। नटराजन का नामांकन खारिज होने को कांग्रेस ने लोकतंत्र की हत्या और सीट चोरी बताया। सिंघवी की 4 बड़ी बातें…. संज्ञान लिए बिना मामला लंबित नहीं माना जा सकता- किसी भी आपराधिक मामले में सबसे पहले मजिस्ट्रेट यह तय करते हैं कि उसकी सुनवाई शुरू होगी या नहीं। इसे संज्ञान लेना कहा जाता है। जब तक अदालत संज्ञान नहीं लेती, तब तक मामला शुरू हुआ नहीं माना जाता। उम्मीदवार को हर मामले की जानकारी देना जरूरी नहीं- चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक उम्मीदवार को सिर्फ उन्हीं मामलों की जानकारी देनी होती है, जिनमें दो साल या उससे ज्यादा की सजा का प्रावधान हो और जिनमें अदालत आरोप तय कर चुकी हो। यह जांचना रिटर्निंग ऑफिसर की जिम्मेदारी है। अभी संज्ञान भी नहीं, फिर नामांकन कैसे रद्द हुआ?- इस मामले में अभी मजिस्ट्रेट ने संज्ञान तक नहीं लिया है। इसके बाद जांच होगी, चार्जशीट दाखिल होगी और फिर आरोप तय होंगे। यानी अभी कई कानूनी प्रक्रियाएं बाकी हैं। इसके बावजूद रिटर्निंग ऑफिसर ने इसे लंबित आपराधिक मामला मानते हुए नामांकन रद्द कर दिया। चुनाव आयोग के पास फैसला बदलने का अधिकार- चुनाव आयोग रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला बदलने या रद्द करने का पूरा अधिकार रखता है। आयोग पहले भी हरियाणा और गुजरात के मामलों में ऐसा कर चुका है। इसलिए इस मामले में भी कार्रवाई की जा सकती है। राज्यसभा चुनाव- झारखंड में परिमल नाथवानी का नामांकन वैध झारखंड में राज्यसभा चुनाव के लिए एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को रिटर्निंग ऑफिसर ने वैध ठहरा दिया है। हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। मंगलवार को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान परिमल नाथवानी के पर्चे में कुछ त्रुटियां मिलने की बात सामने आई थी। इसके खिलाफ कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा परिसर में जमकर हंगामा किया। परिमल नाथवानी के नामांकन को रद्द करने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कैंडिडेट का नाम कैसे बदल गया। कांग्रेस नेताओं का आरोप था कि 2008 के राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार का नाम ‘परिमल नाथवानी’ दर्ज था, जबकि 2026 के नामांकन पत्र में ‘नाथवानी परिमल’ लिखा गया है, जिस पर उन्होंने आपत्ति जताई। पढ़ें पूरी खबर खबर के मिनट-टु-मिनट अपडेट के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…



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