यूरोप में इस साल गर्मी का लोगों की जिंदगी व अर्थव्यवस्था, दोनों पर सीधा असर पड़ा। यूरोप के 23 देशों में रिकॉर्ड-ब्रेकिंग हीटवेव दर्ज की गई। कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा और कई शहरों में अस्पतालों, बिजली ग्रिड, परिवहन और खेती पर दबाव बढ़ गया। अलग-अलग अनुमानों में इस गर्मी से 20 हजार से ज्यादा मौतों का दावा किया जा रहा है। भीषण गर्मी का यूरोप की जीडीपी पर भी असर हुआ है। एलियांज रिसर्च मॉडल के आधार पर की गई गणनाओं के अनुसार, गर्मी यूरोपीय अर्थव्यवस्था को ₹11 लाख करोड़ तक का झटका दे सकती हैं। वहीं, 2030 तक यूरोप को 61 लाख करोड़ रु. तक का आर्थिक नुकसान सहना पड़ सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह उत्पादकता में गिरावट, बिजली की मांग में उछाल, फसल नुकसान, पर्यटन पर असर और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ता दबाव है। विशेषज्ञों के मुताबिक संकट यहीं नहीं रुकेगा। यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी का अनुमान है कि अगले साल तक यूरोप की करीब 34% आबादी जल संकट की चपेट में आ सकती है। दक्षिणी यूरोप में यह संकट और गहरा होगा, जहां गर्मियों में पानी की मांग और बढ़गी। भारत में 45 डिग्री झेल लेते हैं फिर यूरोप में 36 आफत क्यों? भारत में 45 डिग्री तापमान सूखी गर्मी में होता है, इसलिए पसीना जल्दी सूखकर शरीर को ठंडा करता है। यूरोप में 36° डिग्री गर्मी भी उमस के साथ आती है, तो पसीना सूख नहीं पाता और शरीर गर्म रहता है। इसे वेट-बल्ब खतरा कहते हैं। वेट-बल्ब तापमान लंबे समय तक रहे तो स्वस्थ व्यक्ति के लिए भी जानलेवा हो सकता है। इससे हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है और किडनी और लिवर फेल हो सकते हैं। उछाल… ब्रिटेन में एसी बिक्री 330%, फ्रांस में 1000% बढ़ी भीषण गर्मी ने एसी को लग्जरी से जरूरत बना दिया है। ब्रिटेन में एसी की बिक्री 330% तक तो फ्रांस में 1000% तक बढ़ी। तापमान बढ़ते ही कई बाजार में स्टॉक घटने लगा। पंखों व पोर्टेबल कूलर की मांग भी कई गुना तेजी से बढ़ी। 23 देशों में गर्मी के रिकॉर्ड टूटे, स्पेन में पारा 45 डिग्री पार हुआ यूरोप की हीटवेव ने तापमान के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कम से कम 23 देशों में जून की गर्मी ने नए रिकॉर्ड बनाए। स्पेन में पारा 45 डिग्री के पार पहुंचा, जबकि फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड्स व ब्रिटेन में भी रिकॉर्ड गर्मी दर्ज हुई। भास्कर एनालिसिस भीषण हीटवेव के पीछे ओमेगा ब्लॉक; इसमें गर्म हवा फंसकर बढ़ा रही तबाही ओमेगा ब्लॉक क्या पैटर्न होता है? यह मौसम का ऐसा पैटर्न है, जिसमें हाई-प्रेशर सिस्टम दो लो-प्रेशर सिस्टम के बीच फंस जाता है। इसका आकार ग्रीक अक्षर ओमेगा जैसा दिखता है। इस पैटर्न से गर्मी क्यों बढ़ने लगती है? हाई-प्रेशर सिस्टम गर्म हवा को एक जगह रोक देता है। बादल कम बनते हैं, बारिश रुकती है और जमीन लगातार गर्म होती रहती है। इससे यह संकट होता है। यूरोप की हीटवेव इस पैटर्न से कैसे जुड़ी है? ओमेगा ब्लॉक ने उत्तरी अफ्रीका और भूमध्यसागर की गर्म हवा को यूरोप के ऊपर रोक दिया। इसलिए कई देशों में तापमान 40 डिग्री या उससे ऊपर रहा। इस पैटर्न से और क्या असर पैदा होता है? जहां हाई-प्रेशर रहता है, वहां गर्मी और सूखा बढ़ता है। लो-प्रेशर में भारी बारिश-बाढ़ का खतरा बढ़ता है। जलवायु बदलाव से खतरा क्यों बढ़ गया है? ओमेगा ब्लॉक पहले भी बनते थे, लेकिन अब धरती ज्यादा गर्म है। इसलिए ऐसे पैटर्न में फंसी हवा पहले से ज्यादा गर्म और जानलेवा होने लगी हैं। यूरोप दुनिया में सबसे तेजी से गर्म हो रहा है। इसलिए ओमेगा ब्लॉक यहां ज्यादा खतरनाक हो रहे हैं। यूरोप के 20% घरों में ही एसी; इसलिए भी संकट ज्यादा यूरोप में हीटवेव इसलिए भी ज्यादा घातक साबित हो रही है, क्योंकि वहां सिर्फ 20% घरों में ही एसी है। अमेरिका में एसी 90% से भी ज्यादा घरों में है। यूरोप की ज्यादातर इमारतें ठंडे मौसम के हिसाब से बनी हैं। इसलिए तापमान ज्यादा होने पर घर, अस्पताल व नर्सिंग होम तक गर्म हो जाते हैं। बुजुर्गों, बच्चों व बीमार लोगों पर खतरा और बढ़ जाता है।
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यूरोप के 23 देशों में रिकॉर्ड-तोड़ हीटवेव:गर्मी से 11 लाख करोड़ का नुकसान, अगले साल 34% आबादी पानी को तरसेगी | ACTPnews

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