अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ एक सीक्रेट डील की है। एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक इस डील के तहत हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वे लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। इसके बदले में अमेरिका यमन में हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य मदद नहीं करेगा। अमेरिकी अधिकारियों और हूती नेताओं के बीच यह बातचीत पिछले हफ्ते के आखिर में ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिकी दूतावास हुई थी। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को भी पुष्टि की कि अमेरिका हूतियों के सीधे संपर्क में है। सऊदी के जहाजों को अभी भी निशाना बनाएंगे हूती हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाज उनके निशाने पर नहीं होंगे। लेकिन सऊदी जहाजों और सऊदी तेल ले जाने वाले जहाजों को वे अब भी टारगेट करेंगे। मामले से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, 2025 में अमेरिका और हूतियों के बीच हुआ सीजफायर कायम है। हूतियों ने कहा है कि वे अमेरिकी शिपिंग को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, जबकि सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के खिलाफ उनका रुख बरकरार रहेगा। हूतियों की दलील है कि यमन पर सऊदी अरब की नाकेबंदी और सैन्य कार्रवाई के चलते सऊदी जहाजों को निशाना बनाना उनका अधिकार है। हूतियों से सऊदी को अकेले लड़ना पड़ सकता है पिछले हफ्ते हूतियों ने यमन के पश्चिमी हिस्से में लाल सागर के किनारे का बड़ा इलाका अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद सऊदी अरब को उम्मीद थी कि अमेरिका उसके साथ खड़ा होगा। लेकिन अमेरिका ने अब तक हूतियों के खिलाफ सऊदी के समर्थन में कोई सीधी सैन्य कार्रवाई नहीं की है। अमेरिका ने जरूर कहा है कि हूतियों की गतिविधियां बाब अल-मंदब स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही के लिए खतरा हैं। अमेरिका पहले से ईरान के साथ संघर्ष में उलझा हुआ है। ईरान ही हूतियों का समर्थन करता है। ऐसे में यमन में सीधे उतरने से अमेरिका पर एक और सैन्य मोर्चे का दबाव बढ़ सकता है। सऊदी का आरोप- हूतियों ने मक्का पर ड्रोन से हमला किया सऊदी अरब ने आरोप लगाया है कि हूतियों ने मक्का की तरफ ड्रोन भेजकर हमला करने की कोशिश की। सऊदी डिफेंस फोर्सेस ने ड्रोन को नष्ट करने का दावा किया है। सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्किये अल-मलिकी के मुताबिक, ड्रोन को स्थानीय समयानुसार मंगलवार शाम करीब 6:50 बजे मक्का के प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र के पास रोका गया। सऊदी अरब ने कहा कि मक्का पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह उसके लिए ‘रेड लाइन’ है। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार और 57 देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) ने भी कथित हमले की निंदा की है। हूतियों ने सऊदी के आरोप को ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताया हूती नेतृत्व ने सऊदी अरब के दावे को खारिज कर दिया। हूतियों ने इसे ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताते हुए कहा कि इस तरह के दावों से पहले भी लोगों को गुमराह करने की कोशिश की गई है। हूती उप विदेश मंत्री अब्दुल वहीद अबू रास ने उल्टा सऊदी अरब पर मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। हूतियों ने सऊदी F-15 गिराने का भी दावा किया हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने मारिब के पास सऊदी अरब का F-15 लड़ाकू विमान गिराया है। साथ ही लाल सागर के बंदरगाह शहर यानबू में सऊदी तेल कंपनी अरामको के एक संयंत्र पर हमला करने का दावा किया। हालांकि, हूती सैन्य प्रवक्ता ने इन दावों के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया। हूती वार्ता टीम के प्रमुख मोहम्मद अब्दुल सलाम ने कहा कि F-15 गिराने का दावा पश्चिमी देशों के लिए चेतावनी है कि वे सऊदी ‘प्रचार’ का शिकार न बनें। सऊदी अरब पाकिस्तान और तुर्किये से मदद मांग रहा हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य मोहम्मद अल-फराह ने कहा कि सऊदी अरब यमन में मुश्किल स्थिति में है। उनके मुताबिक, सऊदी अरब ने युद्ध और नाकेबंदी के बावजूद अपने लक्ष्य हासिल नहीं किए। उन्होंने दावा किया कि अब सऊदी अरब पाकिस्तान, तुर्किये, अमेरिका, इजराइल और मिस्र से समर्थन मांग रहा है और मक्का पर हमले के दावे के जरिए मुस्लिम देशों को अपने साथ लामबंद करने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-इजराइल समेत अरब देशों के सैन्य प्रमुखों की गुप्त बैठक इस बीच, इजराइली अधिकारियों ने अमेरिका, इजराइल और कई अरब देशों के सैन्य अधिकारियों की जर्मनी में हुई एक गुप्त बैठक की जानकारी लीक की है। एक्सिओस के पत्रकार बराक रैविड के मुताबिक, अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने पिछले सप्ताह यह बैठक आयोजित की थी। बैठक में इजराइल, सऊदी अरब, UAE, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, छह महीने से ज्यादा समय पहले अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यह इस तरह की पहली बैठक थी। इजराइल, जिसे पहले हूती हमलों का सामना करना पड़ा था, अब सऊदी अरब की ओर से यमन में हस्तक्षेप करने की पेशकश कर रहा है। UN में लाल सागर बंद करने की कोशिश की निंदा मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में लाल सागर को बंद करने की किसी भी कोशिश की निंदा की गई। बैठक में रूस के रुख में भी बदलाव के संकेत मिले। रूसी प्रतिनिधि ने पहले जहां यमन में अदन स्थित अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को ही एकमात्र वैध सरकार माना था, अब उससे कुछ दूरी बनाते हुए नजर आए। चीन पहुंचा ईरान, होर्मुज पर समर्थन की कोशिश बुधवार को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य के प्रशासन को लेकर ईरान की योजनाओं पर समर्थन हासिल करने की कोशिश की गई। ईरान और अमेरिका की अलग-अलग नाकेबंदी के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य अभी बंद है। चीन ने कहा कि वह नहीं चाहता कि क्षेत्रीय तनाव यमन और लाल सागर तक फैले। बीजिंग ने अमेरिका से जून में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के आधार पर बातचीत फिर शुरू करने की अपील की। चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है और चाहता है कि क्षेत्र में जल्द कोई समझौता हो।
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रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की:अमेरिकी जहाजों पर हमला नहीं करेंगे हूती लड़ाके, बदले में सऊदी की मदद नहीं करेगा अमेरिका | ACTPnews

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