मिडिल ईस्ट में लगातार तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर डील टूटने के बाद दोनों देशों ने वापस से एक दूसरे पर हमले शुरू कर दिए। अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की तो वहीं ईरान ने भी मिडिल ईस्ट में अमेरिका के सैन्य बेस को निशाना बनाया। ईरान के हमले में जॉर्डन में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत की भी खबर आई। हालांकि, बीते दो दिनों से दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमले रोक दिए हैं। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने ऐसा दावा किया है जिसने सभी को चौंका दिया है। जेलेंस्की ने दावा किया है कि ईरान को मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों की जानकारी रूस द्वारा मुहैया कराई जा रही है। अब इस दावे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी बयान आया है।
जेलेंस्की ने क्या कहा?
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा- मैं हमारे देश की इंटेलिजेंस एजेंसी को निर्देश दूंगा कि वे हमारे सहयोगियों के साथ रूस की ओर से ईरान को दी जा रही नई मदद के बारे में जानकारी को साझा करे। जुलाई की शुरुआत से ही, हमने खाड़ी देशों और वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर रूस की सक्रिय सैटेलाइट निगरानी देखी है। ये तस्वीरें बाद में ईरान में दिखाई देती हैं। साथ ही, इन जगहों की रूसी सैटेलाइट तस्वीरों और ईरान के हमलों के बीच एक साफ रिश्ता दिखता संबंध है। हमले से पहले उनकी तैयारी के दौरान और हमले के बाद हुए नुकसान का आकलन करने के लिए भी। सिर्फ 19 और 20 जुलाई को, चार एयर बेस रूसी सैटेलाइट्स की नजर में आए- दो बहरीन में, एक जॉर्डन में और एक कुवैत में।
डोनाल्ड ट्रंप क्या बोले?
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के इस दावे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- “हम पता लगाएंगे कि यह सच है या नहीं। मैं पुतिन से इस बारे में पूछूंगा। हम पता लगा लेंगे। इसका कोई खास असर नहीं हुआ है क्योंकि हमने उन्हें (ईरान को) बुरी तरह हराया है। रूस ने वेनेजुएला को बहुत सारे हथियार दिए थे। वेनेजुएला के पास रूस के ही सारे हथियार थे। उसका क्या नतीजा निकला? कुछ खास नहीं। हो सकता है कि वे मदद कर रहे हों, लेकिन अगर कर भी रहे हैं, तो उसका कोई असर नहीं हुआ है क्योंकि ईरान के पास न तो सेना है, न एयर फोर्स है, न नेवी है, उनके पास कुछ भी नहीं है। मुझे नहीं लगता कि वे ऐसा कर रहे हैं, कम से कम बड़े स्तर पर तो बिल्कुल नहीं। और अगर उन्होंने ऐसा किया भी है, तो उसका कोई खास असर नहीं हुआ है।” बता दें कि इससे पहले हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि चीन और रूस ईरान की मदद नहीं करते, करेंगे तो बहुत बुरा होगा।
हो सकता है कोई डील हो जाए- ट्रंप
वहीं, ईरान के बारे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा- “हमने उनकी सेना को लगभग खत्म ही कर दिया है। वे हमसे मिलना चाहते हैं और हम मिल रहे हैं। देखते हैं क्या होता है। हो सकता है कि कोई समझौता हो जाए। उन्होंने अपने डेलिगेशन के माध्यम से और सीधे भी मीटिंग की गुजारिश की थी, और हम मिल रहे हैं। अच्छी चीजे हो सकती हैं, अगर हमारी स्थिति खराब होती तो वे मीटिंग की गुजारिश नहीं करते। उनके मिलने की इच्छा का एकमात्र कारण यह है कि हमने उन पर बहुत जोरदार प्रहार किए हैं।”
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