पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में शुक्रवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई। क्वेटा से पेशावर जा रही एक यात्री बस बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा की सीमा के पास स्थित दाना सर इलाके में अनियंत्रित होकर गहरी पथरीली खाई में गिर गई। हादसे में आठ अन्य लोग घायल हुए हैं। बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने बताया कि बस पहाड़ी राजमार्ग पर चल रही थी, तभी चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया और बस गहरी खाई में जा गिरी। दुर्घटना दूरदराज के पहाड़ी क्षेत्र में होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण रहा। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, बस तेज रफ्तार में थी और उसमें क्षमता से अधिक यात्री सवार थे। वहीं रॉयटर्स ने बचाव एजेंसी के हवाले से बताया कि बस क्वेटा से इस्लामाबाद की ओर जा रही थी। उसमें 48 यात्री सवार थे। शुरुआती जानकारी में तेज रफ्तार, ओवरलोडिंग और पहाड़ी मार्ग पर नियंत्रण खोना हादसे की संभावित वजह मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… वेनेजुएला में चमत्कार: मलबे में 8 दिन से फंसा कुत्ता जिंदा मिला, रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित निकाला वेनेजुएला में मलबे के नीचे लगातार आठ दिन तक फंसे रहने के बाद एक कुत्ते को जीवित बाहर निकाल लिया गया। लंबे समय तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद उसके सुरक्षित मिलने की घटना को लोग किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं। जानकारी के अनुसार, कुत्ता किसी आपदा के बाद मलबे में दब गया था। समय बीतने के साथ उसके जीवित मिलने की उम्मीद बेहद कम होती गई, लेकिन बचाव दल ने तलाश अभियान बंद नहीं किया। आखिरकार लगातार प्रयासों के बाद रेस्क्यू टीम उसे सुरक्षित बाहर निकालने में सफल रही। कुत्ते के जीवित मिलने के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली। इस घटना ने एक बार फिर साबित किया कि आपदा के बाद शुरुआती दिनों के बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी रखना कितना महत्वपूर्ण होता है। रेस्क्यू के बाद कुत्ते की स्वास्थ्य जांच की गई और उसे आवश्यक देखभाल के लिए सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया। आठ दिन बाद उसके जीवित मिलने की यह घटना पूरे अभियान की सबसे भावुक और प्रेरक तस्वीर बनकर सामने आई है। ब्रिटेन के हर पांचवें विश्वविद्यालय में श्वेत छात्र अल्पसंख्यक: 27 संस्थानों में 50% से कम दाखिला
ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों में छात्र आबादी का जातीय स्वरूप तेजी से बदल रहा है। 2024-25 के आधिकारिक उच्च शिक्षा आंकड़ों के द टेलीग्राफ द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार, देश के 147 विश्वविद्यालयों में से 27 में गोरे ब्रिटिश छात्रों की हिस्सेदारी 50% से कम रह गई है। दस साल पहले ऐसे विश्वविद्यालयों की संख्या केवल 13 थी। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ विश्वविद्यालयों में गोरे ब्रिटिश छात्रों की हिस्सेदारी 25% से भी कम है। एस्टन यूनिवर्सिटी में यह 23%, यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रैडफोर्ड में 26% और ब्रुनेल यूनिवर्सिटी लंदन व SOAS यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में 27% दर्ज की गई। विश्लेषण में यह भी सामने आया कि 80 ब्रिटिश विश्वविद्यालयों में गोरे ब्रिटिश छात्रों का प्रतिनिधित्व देश की कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी की तुलना में कम है। वहीं प्रतिष्ठित रसल ग्रुप के 24 विश्वविद्यालयों में से 15 में भी यही स्थिति देखने को मिली। रिपोर्ट के अनुसार, कम-से-कम 10 ऐसे विश्वविद्यालय जहां गोरे ब्रिटिश छात्र अब अल्पसंख्यक हैं, वहां आज भी केवल ब्लैक एशियन एंड माइनॉरिटी एथनिक (BAME) समुदाय के छात्रों के लिए आरक्षित छात्रवृत्तियां और आर्थिक सहायता योजनाएं संचालित की जा रही हैं। कुछ योजनाओं में सालाना 18 हजार पाउंड तक की वित्तीय सहायता दी जाती है। यूनिवर्सिटी ऑफ बकिंघम के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर एरिक कॉफमैन ने इन छात्रवृत्तियों का विरोध करते हुए कहा कि नस्ल आधारित सहायता योजनाएं समाप्त होनी चाहिए क्योंकि वे नस्लीय भेदभाव को बढ़ावा देती हैं। हंटर बाइडेन का ट्रम्प पर तंज: बोले- एक ही युद्ध 38 बार खत्म करने के लिए नोबेल पीस प्राइज मिलना चाहिए
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के बेटे हंटर बाइडेन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर तीखा व्यंग्य किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की बात कही। हंटर ने कटाक्ष करते हुए लिखा कि इतिहास में किसी राष्ट्रपति ने एक ही युद्ध को इतनी बार खत्म नहीं किया। हंटर बाइडेन ने अपनी पोस्ट में लिखा, “मैं आधिकारिक तौर पर डोनाल्ड जे. ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करता हूं। इतिहास में किसी भी राष्ट्रपति ने एक ही युद्ध को इतनी बार खत्म नहीं किया।” इसके बाद उन्होंने दावा किया कि CNN की गिनती के अनुसार ट्रम्प ईरान के साथ युद्ध खत्म होने की घोषणा कम से कम 38 बार कर चुके हैं। उन्होंने लिखा कि यह उपलब्धि नोबेल पुरस्कार समिति के संज्ञान में लाई जानी चाहिए। हंटर का यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रम्प लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उन्होंने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को समाप्त कराया है। कुछ महीने पहले ट्रम्प ने कहा था कि उन्होंने आठ बड़े युद्ध रुकवाए हैं और सिद्धांत रूप से हर युद्ध रोकने पर उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। बाद में उन्होंने ट्रुथ सोशलl पर यह दावा भी किया कि कुछ लोगों के मुताबिक उन्होंने 100 से अधिक युद्ध रुकवाए हैं। हंटर बाइडेन की पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ यूजर्स ने इसे ट्रम्प के दावों पर तीखा व्यंग्य बताया, जबकि कई लोगों ने हंटर के पुराने विवादों का हवाला देते हुए उनकी आलोचना की। वहीं कुछ यूजर्स ने कहा कि व्यक्तिगत विवादों से अलग इस मुद्दे पर उनका तंज काफी सटीक और मजेदार है।
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वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में बस खाई में गिरी, 40 यात्रियों की मौत | ACTPnews

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