कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर से भगवान राम को कथित तौर पर ‘मिथकीय पात्र’ बताए जाने संबंधी टिप्पणी को लेकर दायर शिकायत मामले में वाराणसी की विशेष MP-MLA अदालत ने बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के FIR दर्ज करने की मांग खारिज करने वाले आदेश को रद्द करते हुए मामले की नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया है। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने कहा कि संबंधित मजिस्ट्रेट सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के फैसलों के आलोक में मामले की दोबारा सुनवाई करें और कानून के अनुसार नया आदेश पारित करें। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हरिशंकर पांडेय बनाम राहुल गांधी एवं अन्य में 27 मई 2025 को पारित मजिस्ट्रेट का आदेश निरस्त किया जाता है और मामले पर पुनः विचार किया जाए। भगवान राम को पौराणिक बताया, वकील ने याचिका दायर की दरअसल, राहुल गांधी पर अमेरिका के न्यूयॉर्क में ब्राउन यूनिवर्सिटी में भगवान राम को काल्पनिक कहने का आरोप है। राहुल ने भगवान श्रीराम को लेकर विवादित बयान दिए थे। उन्होंने भगवान राम को ‘पौराणिक’ बताया था और उस युग पर बताई जाने वाली कहानियों को काल्पनिक कहा था। इस मामले में वकील हरिशंकर पांडेय ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल की है। राहुल गांधी के खिलाफ याचिका दायर करने वाले वकील की दलील
वाराणसी के एडवोकेट हरीशंकर शंकर पाण्डेय ने 12 मई 2025 को याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने दावा किया था कि राहुल गांधी 21 अप्रैल को अमेरिका के बोस्टन गए थे। यहां पर ब्राउन यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स के साथ उनका एक सेशन था। कोर्ट में उन्होंने कहा- राहुल गांधी ‘राम द्रोही’ हैं। भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाकर देश की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। उनकी सरकार ने राम मंदिर का विरोध किया और वह विदेश में जाकर भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठा रहे हैं। वकील की मांग, राहुल के बयानों पर केस दर्ज किया जाए एडवोकेट ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी लगातार सनातन धर्म के पूर्व अवतारों और महान प्रतीकों पर अनाप-शनाप बयान देकर हिंदुओं को अपमानित कर रही। उन्होंने कोर्ट से राहुल के इन स्टेटमेंट पर केस दर्ज करने की मांग की। साथ ही फैसले में केस दर्ज करने और गिरफ्तारी तक के आदेश की संभावना जताई। कोर्ट में याचिकाकर्ता की मेंटेनिबिलिटी (मानसिकता) पर पहले बहस होगी इसके बाद तय होगा कि राहुल गांधी के खिलाफ केस चलाया जाए या नहीं। हालांकि इससे पहले MP-MLA कोर्ट ने आवेदन देखने के बाद एडवोकेट को 16 मार्च डेट दी थी। कोर्ट ने ऑर्डर रिजर्व रख लिया और बाद में याचिका को खारिज कर दिया। 12 मई को पहली याचिका, फिर 26 सितंबर को रिवीजन पिटीशन
हरिशंकर पांडेय ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) की अदालत में परिवाद दायर किया था। सुनवाई बाद विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एमपी-एमएलए) की अदालत ने परिवाद को 12 मई, 2025 को निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ हरिशंकर पांडेय ने 26 सितंबर को जिला जज की कोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। राहुल ने कहा था- BJP का दृष्टिकोण नफरत फैलाने वाला
राहुल गांधी से पूछा गया था कि हिंदू राष्ट्रवाद के दौर में धर्मनिरपेक्ष राजनीति कैसी होनी चाहिए? क्या महात्मा गांधी के विचारों को इसके खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है? जवाब में राहुल गांधी ने कहा था- भारत के सभी महान सुधारक और विचारक, जैसे बुद्ध, गुरु नानक, गांधी और अंबेडकर बिना भेदभाव के रहे। ये लोग क्षमाशील, दयालु और सहिष्णु थे। लेकिन, भाजपा का दृष्टिकोण हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व नहीं, नफरत फैलाने वाला है।
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वाराणसी कोर्ट ने मजिस्ट्रेट का आदेश रद्द किया:राहुल गांधी के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका पर फिर होगी सुनवाई | ACTPnews

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