शहीद जितेंद्र शर्मा का कॉफिन परिजनों के सामने नहीं खुलेगा:50 घंटे बाद मां को पता चला तो दहाड़े मारकर रोई; असम विमान हादसे में हुई थी मौत | ACTPnews

शहीद जितेंद्र शर्मा का कॉफिन परिजनों के सामने नहीं खुलेगा:50 घंटे बाद मां को पता चला तो दहाड़े मारकर रोई; असम विमान हादसे में हुई थी मौत

असम में विमान हादसे में अलीगढ़ के जितेंद्र शर्मा शहीद हो गए। उनका पार्थिव शरीर आज (सोमवार) दोपहर करीब 2 बजे गांव पहुंचेगा। सीओ खैर संजीव कुमार तोमर ने परिजनों को बताया कि अधिकारियों से बातचीत के बाद निर्णय लिया गया है कि शहीद जितेंद्र के कॉफिन को नहीं खोला जाएगा। उधर, बेटे की शहादत की सूचना उनकी 72 वर्षीय मां राजेश्वरी देवी को पार्थिव शरीर पहुंचने से कुछ घंटे पहले दी गई। बड़े भाई रमाकांत ने जैसे ही उन्हें यह खबर दी, वह दहाड़ें मारकर रोने लगीं। बोलीं- मेरा बेटा अब फोन नहीं करता…अब नहीं पूछता, मां खाना खा लिया, पहले तो दिन में कई बार फोन करके हालचाल पूछता था। अरे मेरे लाल, मेरे फौजी जीतू… तू कहां चला गया बेटा, एक बार आ जा, तेरी मां तेरा इंतजार कर रही है। तेरी आवाज सुनने को तरस गई हूं बेटा… एक बार आ जा। राजेश्वरी देवी लंबे समय से हृदय रोग से पीड़ित हैं, इसलिए परिजनों ने उनकी तबीयत को देखते हुए यह जानकारी तत्काल नहीं दी थी। इधर, अंतिम संस्कार की तैयारियां चाचा के घर से चल रही थीं। जितेंद्र के भाई-बहन गांव पहुंचने के बाद वहीं रुके। परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में शहीद जितेंद्र शर्मा अमर रहें के जयकारे गूंज रहे हैं। जगह-जगह बैनर और होर्डिंग्स लगाए गए हैं। इनमें लिखा है- ‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।’ दरअसल, शनिवार सुबह करीब 10 बजे भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में जितेंद्र समेत चार अन्य लोगों की भी जान चली गई थी। पहले जानिए कौन थे सार्जेंट जितेंद्र शर्मा अलीगढ़ के गांव सालपुर निवासी जितेंद्र शर्मा सात भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। परिवार में उनकी मां राजेश्वरी देवी और दो बड़े भाई रमाकांत व भूपेंद्र साथ रहते हैं। उनका चयन 1 जनवरी 2015 को भारतीय वायुसेना में हुआ था। करीब 11 वर्षों तक उन्होंने देश की सेवा की। उन्होंने टप्पल क्षेत्र के डीआरजी इंटर कॉलेज, धनीपुरा कुराना से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद अलीगढ़ में कोचिंग कर भारतीय वायुसेना में चयनित हुए थे। जितेंद्र के पिता कालीचरण उर्फ करुआ शर्मा का करीब 12 वर्ष पहले निधन हो गया था। पिता की मौत के बाद मां राजेश्वरी देवी ने ही सभी बच्चों का पालन-पोषण किया। परिजन ने बताया कि जितेंद्र हाल ही में छुट्टी पर गांव आए थे और 5 जून को ड्यूटी पर लौटे थे। घर में उनकी शादी की तैयारियों को लेकर भी चर्चा चल रही थी। उन्होंने विवाह के लिए एक लड़की भी देखी थी और परिवार जल्द ही शादी की प्रक्रिया आगे बढ़ाने वाला था। लेकिन इससे पहले ही हादसे में उनकी मौत हो गई, जिससे पूरे परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं। अलीगढ़ के शहीद सार्जेंट जितेंद्र शर्मा से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लाग से गुजर जाइए…



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