”हाथियों के रास्ते में रुकावट नहीं डाल सकते राज्य”, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नए सिरे से सर्वे कराने का दिया निर्देश | ACTPnews

''हाथियों के रास्ते में रुकावट नहीं डाल सकते राज्य'', सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नए सिरे से सर्वे कराने का दिया निर्देश


नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने हाथियों के आने-जाने के रास्ते यानी एलीफेंट कॉरिडोर को लेकर राज्यों को साफ निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि हाथियों के आने से फसल खराब हो रही है, उनके रास्ते में रुकावट नहीं डाली जा सकती।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि वन्यजीवों के रास्ते में किसी तरह की रुकावट नहीं होनी चाहिए। हाथियों के झुंड लंबे रास्ते तय करते हैं और यह उनकी सामान्य आदत है। किसी भी राज्य को यह कह कर उनके रास्ते में बाधा डालने की इजाजत नहीं दी जा सकती कि हाथी फसल बर्बाद कर रहे हैं।

हाथी कॉरिडोर का नए सिरे से सर्वे

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के पर्यावरण मंत्रालय को देश के अलग-अलग राज्यों में मौजूद हाथी कॉरिडोर का नए सिरे से सर्वे करने का आदेश दिया है। मंत्रालय को यह बताना होगा कि इन रास्तों में कहां-कहां रुकावट है और हाथियों की बिना रुकावट आवाजाही के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय की ओर से हाथी कॉरिडोर को सुरक्षित और बिना रुकावट रखने के लिए पहले से जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। लेकिन स्थानीय कारणों से कई जगह इन रास्तों में रुकावट पैदा हो गई है।

फायरिंग और ‘हुल्ला पार्टी’ पर भी रिपोर्ट मांगी

सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय से यह भी बताने को कहा है कि हाथियों को भगाने के लिए फायरिंग या किसी दूसरे सख्त तरीके का इस्तेमाल कहां और कैसे किया जा रहा है।सुनवाई के दौरान वकील ने बताया कि कई बार हाथियों को लोगों की भीड़ बनाकर भगाया जाता है। इससे स्थिति और खराब हो जाती है।वकील ने कहा कि हाथियों की सामान्य आवाजाही में फायरिंग जैसे तरीकों का इस्तेमाल रोकने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही हाथियों को भगाने के लिए बनाई जाने वाली ‘हुल्ला पार्टियों’ पर रोक की जरूरत बताई गई। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि ऐसे जरूरी कदम उठाए जाएं और इसकी जानकारी कोर्ट को दी जाए।

कावेरी का पानी छोड़ने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक सरकार से कहा कि वह तमिलनाडु को कावेरी का पानी छोड़ने के बारे में कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देशों का पालन करे। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने पानी छोड़ने के निर्देश की मांग करने वाली तमिलनाडु की याचिका पर सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तारीख तय की। बेंच ने कहा कि इस मामले पर तब सुनवाई की जा सकती है ताकि पानी छोड़ने की मौजूदा स्थिति की जानकारी कोर्ट के सामने रखी जा सके।

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