45 मिनट पहले
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यामी गौतम ने ‘आर्टिकल 370’ में NIA अधिकारी जूनी हक्सर और ‘चंदू चैंपियन’ में कार्तिक आर्यन ने मुरलीकांत पेटकर का किरदार निभाया था।
फिल्म आर्टिकल 370 को शनिवार को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में वर्ष 2024 की बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार मिला। वहीं, फिल्म ‘श्रीकांत’ को बेस्ट हिंदी फिल्म का पुरस्कार मिला और यामी गौतम को लीडिंग रोल में बेस्ट एक्ट्रेस का पुरस्कार दिया गया।
वहीं, ‘ब्रमायुगम’ के लिए ममूटी और ‘चंदू चैंपियन’ के लिए कार्तिक आर्यन को संयुक्त रूप से लीडिंग रोल में बेस्ट एक्टर का पुरस्कार दिया गया।

यामी गौतम को मिला पहला नेशनल अवॉर्ड
बेस्ट फीचर फिल्म का पुरस्कार जीतने वाली ‘आर्टिकल 370’ का निर्देशन आदित्य सुहास जांभले ने किया था। फिल्म में यामी गौतम ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जिसके लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला। जो उनका पहला नेशनल अवॉर्ड होगा। सैकनिल्क के मुताबिक, करीब 20 करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने दुनियाभर में लगभग 110 करोड़ रुपए का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन किया।

आदित्य सुहास जांभले को इससे पहले 2016 में शॉर्ट फिल्म ‘आबा ऐकताय ना?’ के लिए बेस्ट डायरेक्शन (नॉन-फीचर) और 2019 में शॉर्ट फिल्म ‘खारवस’ के लिए बेस्ट शॉर्ट फिक्शन फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था।

कार्तिक आर्यन और ममूटी को संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर का पुरस्कार मिला। यह कार्तिक का पहला नेशनल अवॉर्ड है, जबकि ममूटी का यह चौथा नेशनल अवॉर्ड है।

राजकुमार राव की ‘श्रीकांत’ बनी बेस्ट हिंदी फिल्म
बेस्ट हिंदी फिल्म का पुरस्कार जीतने वाली फिल्म ‘श्रीकांत’ का डायरेक्शन तुषार हीरानंदानी ने किया था। फिल्म में मुख्य भूमिका में राजकुमार राव नजर आए थे। फिल्म में ज्योतिका, अलाया एफ और शरद केलकर भी अहम भूमिकाओं में थे। सैकनिल्क के मुताबिक, 35 करोड़ रुपए के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब 60 करोड़ रुपए कमाए।

तुषार हीरानंदानी ने फिल्म ‘सांड की आंख’ (2019) और वेब सीरीज ‘स्कैम 2003’ (2023) का भी डायरेक्शन किया है।
फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के लिए रणदीप हुड्डा को बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर का सम्मान मिला। वहीं, फिल्म ‘भक्षक’ के लिए संजय मिश्रा को बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का अवॉर्ड मिला।

फिल्म ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ में रणदीप हुड्डा ने न केवल एक्टिंग की, बल्कि फिल्म को डायरेक्ट और को-प्रोड्यूस भी किया।
वहीं, तमिल फिल्म ‘रायन’ को बेस्ट तमिल फिल्म, ‘कमेटी कुर्रोल्लू’ को बेस्ट तेलुगु फिल्म, ‘लाहरी’ को बेस्ट ओड़िया फिल्म, ‘मुक्काम पोस्ट बॉम्बिलवाड़ी’ को बेस्ट मराठी फिल्म और ‘सुनीता’ को बेस्ट मणिपुरी फिल्म का पुरस्कार मिला।



नेशनल फिल्म अवॉर्ड का इतिहास-
नेशनल अवॉर्ड की शुरुआत 1954 में हुई।
शुरुआत में इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय सिनेमा को प्रोत्साहित करना और अलग-अलग भाषाओं की श्रेष्ठ फिल्मों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता देना था।
उस समय इसे ‘स्टेट अवॉर्ड फॉर फिल्म्स’ (State Awards for Films) कहा जाता था।
पहली बार यह पुरस्कार तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्रस्तुत किया गया।

पहला नेशनल फिल्म अवॉर्ड (1954)
बेस्ट फीचर फिल्म (President’s Gold Medal): श्यामची आई (Shyamchi Aai) – मराठी फिल्म
बेस्ट डॉक्यूमेंट्री फिल्म: महात्मा गांधी
बेस्ट बच्चों की फिल्म: जागृति
शुरुआत में यह पुरस्कार सिर्फ बेस्ट फीचर फिल्म, बेस्ट डॉक्यूमेंट्री और बेस्ट बच्चों की फिल्म के लिए दिया जाता था। हालांकि समय के साथ इसमें देशभर की अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों के लिए कैटेगरी जोड़ी गईं।
1968 में इसका नाम बदलकर “National Film Awards” कर दिया गया।
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2025 में 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में शाहरुख खान को ‘जवान’ और विक्रांत मैसी को ’12th फेल’ के लिए संयुक्त रूप से बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला था। रानी मुखर्जी को ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस चुना गया था। तीनों कलाकारों का यह पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार था। पूरी खबर पढ़ें…














