Delhi Student Protest | International Media Coverage NYT Guardian | ACTPnews

Delhi Student Protest | International Media Coverage NYT Guardian


नई दिल्ली4 मिनट पहले

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में सोमवार को दिल्ली में जंतर-मंतर से संसद तक मार्च निकाला गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प हुई। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, जबकि प्रदर्शनकारियों ने भी पथराव किया। दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए।

न्यूयॉर्क टाइम्स, द गार्जियन समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने इस घटनाक्रम को प्रमुखता से कवर किया है। पढ़िए, भारत के इस युवा आंदोलन पर विदेशी मीडिया ने क्या लिखा…

न्यूयॉर्क टाइम्स: प्रदर्शनकारियों का खून बहा, लेकिन वे अडिग

अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे हजारों युवा पुलिस कार्रवाई के बावजूद पीछे नहीं हटे। अखबार के मुताबिक, संसद मार्च के दौरान हुई झड़प और पुलिस कार्रवाई के अगले ही दिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर पहुंच गए और सरकार से जवाबदेही की मांग पर डटे रहे।

रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था की खामियों और उससे जुड़े मुद्दों पर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। अखबार ने लिखा कि संसद की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा कि प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे समूहों के अनुसार, सोमवार की झड़प में 150 प्रदर्शनकारी घायल हुए। वहीं, दिल्ली पुलिस ने 118 पुलिसकर्मियों के घायल होने और करीब 70 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की बात कही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस कार्रवाई के बावजूद आंदोलनकारियों ने प्रदर्शन जारी रखने का फैसला किया।

द गार्डियन: प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं

ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि दिल्ली में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ युवा आंदोलन पुलिस कार्रवाई के बाद भी थमता नहीं दिख रहा है। अखबार के मुताबिक, सोमवार को हुई झड़प के अगले दिन भी हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे रहे और आंदोलन जारी रखने की बात कही।

रिपोर्ट में कहा गया कि सोमवार को 50 हजार से ज्यादा लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद की ओर बढ़ रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। अखबार के अनुसार, इसके लिए बैरिकेडिंग की गई, इंटरनेट सेवाएं बंद की गईं और बाद में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े तथा लाठीचार्ज किया।

द गार्जियन ने प्रदर्शनकारियों और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से लिखा कि पुलिस ने महिलाओं और बच्चों पर भी बल प्रयोग किया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि करीब 60 लोग घायल हुए, जबकि एक प्रदर्शनकारी की हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू में वेंटिलेटर पर भर्ती कराया गया।

अखबार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग से आगे बढ़कर बड़ी संख्या में युवाओं के असंतोष की अभिव्यक्ति बनता नजर आ रहा है। वहीं, पुलिस का कहना है कि उसने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों के जवाब में कार्रवाई की।

अल जजीरा: पुलिस कार्रवाई के अगले दिन छात्र फिर सड़कों पर

अल जजीरा ने लिखा कि संसद मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई के बावजूद छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के अगले ही दिन बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी फिर जंतर-मंतर लौट आए और आंदोलन जारी रखने का ऐलान किया।

रिपोर्ट में कहा गया कि संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इस कार्रवाई में 100 से ज्यादा छात्र घायल हुए। अल जजीरा ने घटनास्थल पर टूटे बैरिकेड, बिखरे सामान और संघर्ष के निशानों का भी जिक्र किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवेश परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और मूल्यांकन में गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर युवाओं में पिछले दो महीनों से नाराजगी है। अखबार ने यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अब तक आंदोलन पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

वहीं, विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में आवाज उठाई। विश्लेषकों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि इस आंदोलन ने सरकार की जवाबदेही और लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर बहस तेज कर दी है।

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