यूपी के आजमगढ़ के भोजपुर माधोपट्टी में योगेंद्र यादव के घर एक चारपाई पर उनकी तस्वीर, रूसी सेना की टोपी और झंडा रखा है। तीन बेटियों के पिता योगेंद्र का शव अब भी घर नहीं आ पाया है। परिजनों को बताया गया है कि 3 जून 2024 को यूक्रेन जंग में मोर्चे पर उनकी मौत हो गई थी और अब वहां से अवशेष निकालना संभव नहीं है। रूस ने सिर्फ टोपी, झंडा और मृत्यु प्रमाणपत्र भेजा है। हालांकि, योगेंद्र यादव अकेले नहीं हैं। मऊ और आजमगढ़ के 13 युवक 2024 की शुरुआत में सुरक्षा गार्ड की नौकरी के लिए रूस गए थे। आरोप है कि इन सभी को धोखे में रखकर यूक्रेन जंग में भेज दिया। इनमें 10 की मौत हो चुकी है। होमेश्वर लापता हैं और राकेश-ब्रजेश लौट आए हैं। पांच युवकों के अवशेष आए, योगेंद्र समेत चार के घर शव की जगह टोपी-झंडे पहुंचे। वहीं, दीपक के परिजन उन्हें लापता मानकर लौटने की उम्मीद में हैं। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक रूसी रक्षा मंत्रालय दीपक की मौत की सूचना भारत को दे चुका है। इस पर दिल्ली स्थित रूसी दूतावास से पक्ष मांगा गया, पर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं मिला। दीपकः बहन की शादी के लिए कमाने गया था, अब भी इंतजार
बहन की शादी के लिए दीपक पैसे जुटाना चाहते थे। भाई पवन के मुताबिक, एजेंट विनोद ने सुरक्षा गार्ड की नौकरी बता उसे रूस भेजा। उससे जबरन अनुबंध साइन कराया और मोर्चे पर भेज दिया। दीपक ने भारत लौटने की कोशिश की, पर सफल नहीं हुआ। वह कहते हैं कि हम उस दिन को कोसते हैं, जब उसने विनोद की बात पर भरोसा किया। होमेश्वरः ‘मोर्चे पर… फंस गए हैं’ पिता के पास यही ऑडियो बचा
तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे 19 साल के होमेश्वर इंटर पास थे। पिता इंदू प्रसाद चाहते थे कि वह आगे पढ़ें और नौकरी करें, लेकिन अच्छी कमाई की उम्मीद में रूस चले गए। सैन्य मोर्चे पर उन्होंने ढाई साल पहले कहा, ‘मोर्चे पर भेज रहे हैं, फंस गए हैं।’ इसके बाद संपर्क टूट गया। रूसी सेना ने उन्हें लापता घोषित किया है। पहचान के लिए परिवार की डीएनए रिपोर्ट रूस भेजी गई है। इंदू अब सिलाई की दुकान में बेटे की तस्वीरें संभालकर रखते हैं। अजहरः मां का आरोप- किसी और का कंकाल भेज दिया; खोज जारी
अजहर के अवशेष 12 जून को लाए गए, लेकिन मां नसरीन को पहचान पर भरोसा नहीं है। वह कहती हैं, ‘मेरा बेटा लंबा-चौड़ा था, यह छोटा-सा कंकाल उसका कैसे हो सकता है?’ अजहर की तलाश में भाई अजमुद्दीन मार्च 2024 में रूस भी गए थे। अब परिवार सही पहचान और मुआवजे के लिए दोबारा रूस जाना चाहता है। दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने मदद का भरोसा दिया है। जिंदा लौटे राकेश बोले- ग्रेनेड लगा, 11 दिन बंकर में रहा
राकेश 16 जनवरी 2024 को सेंट पीटर्सबर्ग पहुंचे थे। उनके मुताबिक, 15 दिन की ट्रेनिंग के बाद 24 अप्रैल को युवकों को तीन-तीन के समूह में मोर्चे पर भेजना शुरू किया गया। राकेश और अरविंद अंतिम समूह में थे। युद्ध के दौरान राकेश को ग्रेनेड लगा और वह 11 दिनों तक बंकर में रहे। चोट के कारण जून में उन्हें आराम मिला, जबकि दूसरे साथियों को फिर मोर्चे पर भेज दिया गया। बाद में राकेश भारत लौटे। आरोपः एजेंटों ने झांसा देकर जंग में फंसाया; फिर सैलरी भी नहीं दी
राकेश का आरोप है कि विनोद नामक एजेंट ने सुरक्षा गार्ड की नौकरी बता युवकों को रूस भेजा। उसे रूस में रहने वाले दुष्यंत व सुमित से मिलने की आशंका है। राकेश के मुताबिक, दुष्यंत के होटल से खाना आता था। आरोप यह भी है कि युवकों को सैलरी भी दो या तीन माह ही मिली। विनोद की मौत हो चुकी है। दुष्यंत व सुमित की जानकारी नहीं है। ————————–
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रूस गए यूपी के 13 युवकों में 10 की मौत:4 के शव भी नहीं आए; सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी के लिए गए थे, यूक्रेन जंग में झोंक दिया | ACTPnews

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