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ईरान के मिनाब में 28 फरवरी को हुए हमले में मारे गए छात्रों की तस्वीरें। - Dainik Bhaskar


न्यूयॉर्क4 घंटे पहले

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ईरान के मिनाब में 28 फरवरी को हुए हमले में मारे गए छात्रों की तस्वीरें।

ईरान पर फरवरी में हुए अमेरिका हमलों को लेकर UN की जांच रिपोर्ट गुरुवार को सामने आई। UN की स्वतंत्र जांच टीम ने कहा कि उसके पास यह मानने की पर्याप्त वजह है कि मिनाब के गर्ल्स स्कूल और एक स्पोर्ट्स सेंटर पर हमले अमेरिकी सेना ने किए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत युद्ध अपराध हो सकते हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध में भी रूसी राष्ट्रपति पुतिन पर युद्ध अपराध के आरोप लगे थे। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट ने 2023 में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। अब UN की रिपोर्ट के बाद ट्रम्प की किसी तरह की व्यक्तिगत जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

ईरान में अमेरिका के 2 हमलों की UN ने जांच की

पहला- मिनाब गर्ल्स स्कूल पर हमले में 120 बच्चों की मौत

  • UN की फैक्ट-फाइंडिंग टीम ने मिनाब शहर के शाजारेह तैयबेह प्राइमरी स्कूल पर हुए हमले की जांच की।
  • ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 150 से ज्यादा लोग मारे गए थे। इनमें करीब 120 स्कूली बच्चे थे।
  • जांच टीम के मुताबिक, स्कूल एक नागरिक इमारत थी। उसे सैन्य काम के लिए इस्तेमाल किए जाने का कोई सबूत नहीं मिला।
  • अमेरिकी सेना के पास खुफिया जानकारी थी कि ईरान का एक सीनियर सैन्य कमांडर स्कूल में मौजूद हो सकता है। लेकिन हमला करने से पहले इस जानकारी की पुष्टि नहीं की गई।
  • UN टीम ने कहा कि स्कूल पर किया गया हमला अंधाधुंध हमला था। इसमें आम नागरिक मारे गए और नागरिक इमारत को नुकसान पहुंचा।

मिनाब स्कूल पर हमले के बाद की तस्वीरें…

28 फरवरी को हुए हमले के बाद मिनाब स्कूल।

28 फरवरी को हुए हमले के बाद मिनाब स्कूल।

मिनाब में स्कूल पर हमले के बाद पीड़ितों के लिए कब्रें तैयार की गईं थी। (सोर्स- रॉयटर्स)

मिनाब में स्कूल पर हमले के बाद पीड़ितों के लिए कब्रें तैयार की गईं थी। (सोर्स- रॉयटर्स)

मिनाब में 28 फरवरी को अमेरिकी हमले के बाद क्षतिग्रस्त शजरेह तय्यबेह स्कूल का एक क्लासरूम।

मिनाब में 28 फरवरी को अमेरिकी हमले के बाद क्षतिग्रस्त शजरेह तय्यबेह स्कूल का एक क्लासरूम।

दूसरा- स्पोर्ट्स सेंटर पर हमले में 22 नागरिक मारे गए

  • UN रिपोर्ट में ईरान के लामेर्द शहर के एक स्पोर्ट्स सेंटर पर हुए दूसरे हमले की भी जांच की गई।
  • हमले से आसपास की रिहायशी इमारतों और एक स्कूल को नुकसान पहुंचा। इसमें 22 नागरिक मारे गए।
  • UN टीम ने इस हमले को भी अंधाधुंध हमला माना और इसे युद्ध अपराध बताया।
  • हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने मार्च में कहा था कि अमेरिकी सेना ने उस दिन लामेर्द शहर में कोई हमला नहीं किया था।
ईरान के लामेर्द में 28 फरवरी को स्पोर्ट्स सेंटर पर हुए हमले में मारे गए नागरिकों के ताबूत।

ईरान के लामेर्द में 28 फरवरी को स्पोर्ट्स सेंटर पर हुए हमले में मारे गए नागरिकों के ताबूत।

UN की रिपोर्ट के बाद अब क्या होगा?

रिपोर्ट अभी किसी अदालत का फैसला नहीं है। इसे UN मानवाधिकार परिषद में रखा जाएगा। इसके बाद आगे जांच और कार्रवाई की मांग उठ सकती है।

अमेरिका से भी पूछा जा सकता है कि स्कूल को सैन्य ठिकाना क्यों माना गया और हमला करने से पहले खुफिया जानकारी की ठीक से जांच क्यों नहीं हुई।

आगे की जांच में पता लगाया जाएगा कि हमले का फैसला किसने लिया और किस जानकारी के आधार पर लिया। अगर किसी अधिकारी की गंभीर गलती या जानबूझकर की गई कार्रवाई सामने आती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई या मुकदमा हो सकता है।

क्या ट्रम्प भी जिम्मेदार माने जाएंगे?

UN की रिपोर्ट में अमेरिकी सेना पर युद्ध अपराध का आरोप है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ट्रम्प भी इसके लिए सीधे जिम्मेदार माने जाएंगे।

इसके लिए यह देखना होगा कि ट्रम्प ने हमले का आदेश दिया था या नहीं, उन्हें इसकी जानकारी थी या नहीं और उन्हें हमला रोकने की जानकारी या ताकत थी या नहीं।

पहले जांच में हमले के लिए जिम्मेदार सैन्य अधिकारियों की भूमिका सामने आएगी। उसके बाद ही यह देखा जाएगा कि ट्रम्प की इसमें कोई भूमिका थी या नहीं।

ईरान की सरकार पर भी गंभीर आरोप

UN की जांच में ईरानी सरकार की कार्रवाई को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जांच टीम के मुताबिक, दिसंबर के आखिर में शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों को दबाने के दौरान ईरानी अधिकारियों ने गैरकानूनी हत्याएं, मनमानी गिरफ्तारियां और लोगों को जबरन गायब करने जैसी कार्रवाइयां कीं।

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने के लिए इंटरनेट बंद किया और मौत की सजा का भी इस्तेमाल किया।

UN टीम ने कहा कि ईरानी अधिकारियों की कार्रवाई आम नागरिकों के खिलाफ व्यापक और सुनियोजित हमले का हिस्सा थी। जांच के मुताबिक, यह मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

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