Japan Centenarians Record | Population Over 100 Years Milestone | ACTPnews

Japan Centenarians Record | Population Over 100 Years Milestone


टोक्यो15 घंटे पहले

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जापान में 100 साल या उससे ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या पहली बार 1 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। इनमें 88 फीसदी महिलाएं हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के मंगलवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश में अब 1,07,677 लोग ऐसे हैं, जिनकी उम्र कम से कम 100 साल है।

इनमें महिलाएं 94.3 हजार और पुरुष 13.4 हजार हैं। पिछले साल की तुलना में 100 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या करीब 8 हजार बढ़ी है।

हांगकांग यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के सोशल साइंस प्रोफेसर स्टुअर्ट गीटेल-बास्टेन के मुताबिक, जापान में लंबी उम्र के पीछे कई वजहें हैं। स्वस्थ खान-पान, रोजमर्रा की जिंदगी में सक्रिय रहना, सस्ती स्वास्थ्य व्यवस्था और नियमित स्वास्थ्य जांच इनमें अहम हैं।

महिलाओं के ज्यादा जीने की 3 बड़ी वजहें

  • रिपोर्ट के मुताबिक, महिलाओं के पुरुषों से ज्यादा जीने के पीछे जीवनशैली भी एक वजह है। उस पीढ़ी के पुरुषों में धूम्रपान और शराब पीने की आदत ज्यादा थी। वे औद्योगिक और शारीरिक मेहनत वाले कामों में भी ज्यादा शामिल थे, जिसका लंबे समय में उनकी सेहत पर असर पड़ा।
  • उम्र बढ़ने के साथ भी महिलाओं को इसका फायदा मिला। रिटायरमेंट या जीवनसाथी की मौत के बाद कई पुरुष सामाजिक रूप से अलग-थलग पड़ गए, जबकि महिलाएं परिवार और समुदाय से ज्यादा जुड़ी रहीं। इससे उन्हें सामाजिक और मानसिक स्तर पर फायदा मिला।
  • इसके अलावा, इस पीढ़ी में महिलाओं की संख्या ज्यादा होने की एक ऐतिहासिक वजह द्वितीय विश्वयुद्ध भी है। उस दौरान जापान के करीब 23 लाख सैनिक मारे गए थे, जिनमें लगभग सभी पुरुष थे। युद्ध में बड़ी संख्या में पुरुषों की मौत से उस पीढ़ी में महिलाओं का अनुपात बढ़ गया।

106 साल के सातो आज भी अपना काम खुद करते हैं

निगाता प्रांत के पहाड़ी इलाके ओसोनोगो गांव में रहने वाले तेत्सुओ सातो भी जापान के 1 लाख से ज्यादा 100+ उम्र वाले लोगों में शामिल हैं।

सातो अब 107 साल के होने वाले हैं। वह अपने बेटे, बहू, कुत्ते और बिल्ली के साथ रहते हैं। उन्हें सुनने में परेशानी है और नजर भी कमजोर हो चुकी है। इसके बावजूद वह खुद को दिनभर व्यस्त रखते हैं।

सातो पुराने कैलेंडर और रैपिंग पेपर से नोटबुक बनाते हैं। वह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इम्फाल की लड़ाई में अपने अनुभवों की कहानियां भी सुनाते हैं।

उनकी 68 साल की बहू कुनिको सातो बताती हैं कि उनके ससुर आज भी ज्यादातर काम खुद करने की कोशिश करते हैं। वह बिना मदद के खुद नहाते हैं।

तेत्सुओ सातो (बाएं) पिछले साल ओसोनोगो में अपनी बहू के साथ। (फोटो-NYT)

तेत्सुओ सातो (बाएं) पिछले साल ओसोनोगो में अपनी बहू के साथ। (फोटो-NYT)

पिछले साल जब कुनिको के पैर में चोट लगी थी, तब सातो ने अपने चावल के कटोरे खुद धोने शुरू कर दिए थे। कुनिको कहती हैं, “हम बुढ़ापे में एक-दूसरे का ख्याल रखने लगे हैं।”

दो दिन बाद सातो 107 साल के हो जाएंगे। उनकी सालगिरह के लिए परिवार की चार पीढ़ियों के एक दर्जन से ज्यादा सदस्य एक पारंपरिक हॉट स्प्रिंग होटल में जुटेंगे। यहां चार पीढ़ियों की साथ में तस्वीर भी ली जाएगी।

सातो का मकसद 100 साल तक जीना था। अब वे 110 साल तक जीना चाहते हैं।

2070 तक 4 करोड़ से ज्यादा घट सकती है आबादी

जापान की आबादी 2008 में करीब 12.8 करोड़ के साथ सबसे ज्यादा थी। सरकारी अनुमान के मुताबिक 2070 तक यह घटकर करीब 8.7 करोड़ रह सकती है। यानी आने वाले दशकों में देश की आबादी 4 करोड़ से ज्यादा घट सकती है।

फिलहाल जापान में हर एक बच्चे के जन्म पर करीब दो लोगों की मौत हो रही है। इसका सीधा असर देश की कामकाजी आबादी पर पड़ रहा है।

काम करने वाले लोगों की संख्या घट रही है, जबकि बुजुर्गों की संख्या बढ़ रही है। इससे सरकार पर टैक्स और सामाजिक सुरक्षा का बोझ बढ़ रहा है।

जापानी सरकार पिछले कई दशकों से लोगों को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके बावजूद आबादी में गिरावट का रुख नहीं बदला है।

जापान की जन्मदर लंबे समय से गिर रही है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने इस स्थिति को ‘शांत आपातकाल’ बताया है।

जापान की जन्मदर लंबे समय से गिर रही है। प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने इस स्थिति को ‘शांत आपातकाल’ बताया है।

5 साल में 31 लाख कम हुई आबादी

जापान की आबादी 2020 से 2025 के बीच 31 लाख कम हुई। 2020 में देश की आबादी 12.61 करोड़ थी, जो 2025 में घटकर करीब 12.3 करोड़ रह गई।

1920 में जनगणना शुरू होने के बाद यह आबादी में सबसे बड़ी गिरावट है।

जनगणना के आंकड़ों से पता चलता है कि यह समस्या अब जापान के लगभग हर हिस्से में पहुंच चुकी है। देश के 47 प्रांतों में से 45 की आबादी 2025 में कम हुई। सिर्फ दो प्रांत ऐसे रहे, जहां आबादी बढ़ी।

गांव खाली हो रहे, स्कूलों की जगह नर्सिंग होम बन रहे

जापान के ग्रामीण इलाकों में आबादी तेजी से बूढ़ी हो रही है। युवा नौकरी और पढ़ाई के लिए टोक्यो, ओसाका और नागोया जैसे बड़े शहरों की ओर जा रहे हैं।

इसका असर गांवों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिख रहा है। कई जगह स्कूलों में बच्चों की संख्या इतनी कम हो गई है कि उन्हें बंद करना पड़ा है। कुछ इलाकों में बंद स्कूलों को नर्सिंग होम और सामुदायिक केंद्रों में बदला जा रहा है।

देश में लाखों घर खाली पड़े हैं। कई जगह सरकारी दफ्तर और अस्पताल अपने काम का दायरा कम कर रहे हैं। कुछ इलाकों में ट्रेन सेवाएं भी बंद हो रही हैं।

जापान के तेनई गांव में सुबह खाली सड़क से गुजरती स्कूल बस। तस्वीर 10 मार्च 2023 की है।

जापान के तेनई गांव में सुबह खाली सड़क से गुजरती स्कूल बस। तस्वीर 10 मार्च 2023 की है।

टोक्यो में आबादी बढ़ रही, बाकी देश घट रहा

जहां जापान के ज्यादातर हिस्सों में आबादी घट रही है, वहीं टोक्यो और उसके आसपास का इलाका अभी भी लोगों को अपनी तरफ खींच रहा है।

2025 में टोक्यो मेट्रो क्षेत्र की आबादी करीब 3.7 करोड़ थी। इसमें टोक्यो के साथ कनागावा, सैतामा और चिबा प्रांत शामिल हैं। यह क्षेत्र अब जापान की कुल आबादी का करीब 30% हिस्सा है।

टोक्यो की अपनी आबादी भी 2025 में 1% से ज्यादा बढ़कर करीब 1.42 करोड़ हो गई। इसकी बड़ी वजह पढ़ाई और नौकरी के लिए युवाओं का यहां आना है।

आबादी की कमी रोकने के लिए विदेशियों को लाने पर बहस

आबादी घटने की समस्या से निपटने के लिए कुछ विशेषज्ञ जापान में ज्यादा विदेशियों को काम करने और रहने की अनुमति देने की बात कहते हैं। उनका मानना है कि इससे काम करने वाले लोगों की कमी कुछ हद तक पूरी हो सकती है।

लेकिन जापान में इसे लेकर बहस भी चल रही है। कुछ लोग विदेशियों की संख्या बढ़ाने के बजाय इमिग्रेशन के नियम और सख्त करने की मांग कर रहे हैं। यह सोच ‘जापान फर्स्ट’ जैसे आंदोलनों में भी दिखाई देती है।

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