NATO Countries Increase Defense Spending Amid Rising Russia Conflict Threat | ACTPnews

NATO Countries Increase Defense Spending Amid Rising Russia Conflict Threat


कोपेनहेगन/वॉशिंगटन6 घंटे पहले

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यूक्रेन में जारी जंग के बीच यूरोप के नाटो देश अगले 10 साल में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। नाटो ने 2035 तक रक्षा और सुरक्षा पर GDP का 5% खर्च करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत हथियार, सैनिकों की ट्रेनिंग, सैन्य ठिकाने, बंकर, अस्पताल और साइबर सुरक्षा जैसी व्यवस्थाएं मजबूत की जाएंगी।

रूस लगातार यूरोपीय देशों को चेतावनी दे रहा है। पिछले हफ्ते ब्रिक्स समिट के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि अगर यूरोपीय देश यूक्रेन में अपने सैनिक तैनात करते हैं, तो इसे रूस के साथ युद्ध माना जाएगा।

वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प भी यूरोपीय देशों से अपनी सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करने की मांग करते रहे हैं। इसी बीच शुक्रवार और शनिवार को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में नाटो के 32 सदस्य देशों के रक्षा प्रमुखों की बैठक हुई।

2035 तक GDP का 5% सुरक्षा पर खर्च होगा

नाटो देशों ने रक्षा और सुरक्षा पर खर्च बढ़ाने का फैसला किया है। 2035 तक GDP का 5% इस क्षेत्र में खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसमें 3.5% पैसा सीधे सेना, हथियारों और सैन्य क्षमता बढ़ाने पर खर्च होगा। बाकी 1.5% सड़कों, कम्युनिकेशन, साइबर सुरक्षा और ऐसी दूसरी सुविधाओं पर लगाया जाएगा, जो युद्ध या किसी बड़े संकट के समय काम आ सकती हैं।

यानी यूरोप की तैयारी सिर्फ हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है। अगले करीब 10 साल में सैनिकों की ट्रेनिंग, सैन्य ठिकानों और युद्ध के समय काम आने वाली जरूरी सुविधाओं पर भी खर्च बढ़ाया जाएगा।

जर्मनी में पुराने मेडिकल बंकर फिर खोलने की तैयारी

जर्मनी में 1979 में बनाए गए मेडिकल बंकरों को दोबारा इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है। युद्ध या बड़े हमले की स्थिति में इनका इस्तेमाल घायलों के इलाज के लिए किया जाएगा।

नॉर्वे भी अपने अस्पतालों को युद्ध जैसी स्थिति के लिए तैयार कर रहा है। वहां 7 हजार बेड युद्ध में घायल सैनिकों और आम लोगों के इलाज के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी है।

नॉर्वे में सेना और अस्पताल मिलकर घायल लोगों को सुरक्षित निकालने और उनका इलाज करने की तैयारी भी कर रहे हैं।

यानी यूरोप में तैयारी सिर्फ सेना तक सीमित नहीं है। अस्पतालों और दूसरी नागरिक सुविधाओं को भी बड़े संकट के लिए तैयार किया जा रहा है।

ट्रम्प लंबे समय से यूरोप से ज्यादा खर्च करने को कह रहे

नाटो देशों का रक्षा खर्च बढ़ाने के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का दबाव भी एक वजह है। ट्रम्प लंबे समय से यूरोपीय देशों से अपनी सुरक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च करने की मांग करते रहे हैं।

उनका कहना है कि यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए।

पिछले साल हेग में हुए नाटो सम्मेलन में सदस्य देशों ने 2035 तक GDP का 5% रक्षा और सुरक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य तय किया था।

इसके साथ यूक्रेन की जंग ने भी यूरोप की सैन्य जरूरतों को सामने ला दिया है। युद्ध में ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ है। नाटो अब इन क्षेत्रों में अपनी कमियों को दूर करने पर भी जोर दे रहा है।

ब्रिटेन से पोलैंड तक अपनी-अपनी तैयारी तेज

पोलैंड: 2027 से हर साल 1 लाख लोगों को सैन्य ट्रेनिंग देने का लक्ष्य है। कुल 5 लाख लोगों को ट्रेनिंग देने की योजना है।

ब्रिटेन: गोला-बारूद और विस्फोटक बनाने के लिए 6 नई फैक्ट्रियां बनाई जाएंगी। ब्रिटेन देश में बने लंबी दूरी के 7 हजार हथियार खरीदने की योजना भी बना रहा है।

लिथुआनिया: इस साल करीब 5 हजार युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा के लिए बुलाने की योजना है।

स्वीडन: लोगों से संकट की स्थिति के लिए कम से कम 7 दिन की जरूरी चीजें घर में रखने को कहा गया है।

यूरोप में हथियारों की खरीद भी तेजी से बढ़ी

यूरोप के नाटो देश अपनी सैन्य जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में दूसरे देशों से हथियार खरीद रहे हैं।

SIPRI के मुताबिक, 2016-20 की तुलना में 2021-25 के दौरान यूरोप के 29 नाटो देशों का हथियार आयात 143% बढ़ा। इस दौरान इन देशों के हथियार आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 58% रही।

यानी यूक्रेन की जंग के बीच यूरोप अपनी सैन्य तैयारी को सिर्फ सेना और हथियारों तक सीमित नहीं रख रहा है। नाटो देश अगले करीब 10 साल में सेना, हथियार, सैन्य ठिकानों, अस्पतालों, साइबर सुरक्षा और दूसरी जरूरी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं।

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