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सिलिगुड़ी के फंसीदेवा गांव में बॉर्डर इलाके में फेंसिंग लगाने का काम शुरू हो गया है। - Dainik Bhaskar


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कोलकाता2 घंटे पहलेलेखक: बबीता माली

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सिलिगुड़ी के फंसीदेवा गांव में बॉर्डर इलाके में फेंसिंग लगाने का काम शुरू हो गया है।

पश्चिम बंगाल बॉर्डर का 600 किलोमीटर का एक हिस्सा ऐसा है, जहां बांग्लादेश के साथ सीमा पूरी तरह खुली है। कोई फेंसिंग नहीं है। यहां बीते दिनों जब बीएसएफ की टीम बॉर्डर नापने के लिए पहुंची तो गांव वालों ने मिठाइयां बांटी। यह इलाका है मुर्शिदाबाद जिले के जलंगी बाजार में जीरो लाइन पर बसा सकारपाड़ा गांव।

4 हजार की आबादी और 2500 मतदाता। इनमें 95% लोग खेती पर निर्भर हैं। गांव का भूगोल बेहद संवेदनशील है। घर खत्म होते ही खेत आ जाते हैं और खेत खत्म होते ही बांग्लादेश। ग्राम पंचायत सदस्य पिंटू मंडल का घर गांव में सबसे आखिर में है। परिवार के पास 30 बीघा जमीन है।

पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में बांग्लादेश बॉर्डर से सटे गांव में फेंसिंग लगना शुरू हो गया है।

पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में बांग्लादेश बॉर्डर से सटे गांव में फेंसिंग लगना शुरू हो गया है।

बीएसएफ की मदद से बॉर्डर एरिया में बाड़ लगाई जा रही है।

बीएसएफ की मदद से बॉर्डर एरिया में बाड़ लगाई जा रही है।

स्थानीय बोले- शाम 5 बजे के बाद अपने खेतों में नहीं जा पाते थे

स्थानीय पिंटू मंडल ने बताया कि हमें शाम 5 बजे के बाद अपने खेतों में जाने की अनुमति नहीं है, लेकिन बांग्लादेश के लोग कभी भी हमारे खेतों में घुस आते हैं और फसलें काटकर ले जाते हैं। बीते 30 साल में ऐसा कोई भी महीना नहीं बीता, जब उनसे विवाद न हुआ हो, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, क्योंकि बीएसएफ ने फेंसिंग लगानी शुरू कर दी है।

वहां से जैसे कोई हरकत होती, जवान माइक से चेतावनी दे देते। इसलिए हमें उम्मीद रहती है कि रात को जैसी फसल छोड़ेंगे, सुबह वैसी मिलेगी। अब तो हम भी अराजक बांग्लादेशियों को ताल ठोककर चुनौती दे रहे हैं।

बंगाल में नई सरकार बनने के बाद BSF को 27 किमी जमीन दी जा चुकी

बंगाल में नई सरकार बनने के बाद से अब तक बीएसएफ को बॉर्डर की 27 किमी जमीन दी जा चुकी है। इनमें 18 किमी में फेंसिंग होनी है और 9 किमी में बॉर्डर आउट पोस्ट विकसित करने की योजना है।

शुरुआत जलपाईगुड़ी, कूचबिहार, सिलीगुड़ी, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे सीमावर्ती जिलों से की गई है। 10 दिन में मुर्शिदाबाद, कूचबिहार में बॉर्डर पर कुछ जगह बांग्लादेशियों ने सीमांकन का काम रोकने की कोशिशें कीं, पर बीएसएफ ने चेतावनियां देकर उन्हें भगा दिया।

सरकार का 45 दिनों में 600 एकड़ जमीन देने का लक्ष्य

सबसे ज्यादा जमीन मुर्शिदाबाद (38.80 एकड़) में दी गई है। इसके बाद जलपाईगुड़ी (35.16 एकड़) और कूचबिहार (22.92 एकड़) का स्थान है। यह जमीन भारत-बांग्लादेश सीमा पर बार्ब्ड वायर फेंसिंग (कंटीले तार), BSF आउटपोस्ट और सुरक्षा ढांचा बनाने के लिए दी गई है। राज्य सरकार ने कुल 600 एकड़ जमीन 45 दिनों के भीतर BSF को देने का लक्ष्य रखा है।

बांग्लादेश से लगती है बंगाल की 2216 किमी सीमा

भारत, बांग्लादेश के साथ 4,097 किलोमीटर लंबी बॉर्डर शेयर करता है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार लगभग 3,240 किलोमीटर की सीमा पर बाड़ लगाई जा चुकी है और लगभग 850 किलोमीटर, जिसमें 175 किलोमीटर का दुर्गम भूभाग भी शामिल है, इस पर बाड़बंदी होनी बाकी है।

शुभेंदु अधिकारी ने सीएम बनने के बाद दावा किया था कि प्रस्तावित 127 किलोमीटर के खंड में से केवल लगभग 8 किलोमीटर के हिस्से को ही ममता बनर्जी की सरकार के कार्यकाल में फेंसिंग की गई थी।

पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ लगभग 2,216 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है। यह भारत-बांग्लादेश की सबसे लंबी स्टेट बॉर्डर है।

2021 में केंद्र सरकार ने बंगाल में बॉर्डर पर BSF के अधिकार क्षेत्र को 15 किमी से बढ़ाकर 50 किमी कर दिया था। यानी BSF 50km तक के इलाके में तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती कर सकती है।

तत्कालीन ममता सरकार ने इसे राज्य के मामलों में हस्तक्षेप बताया था। दिसंबर 2021 में बंगाल विधानसभा में इसके खिलाफ एक प्रस्ताव भी पारित किया था।

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