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श्रीनगर3 घंटे पहले
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जम्मू-कश्मीर के यूसमर्ग में मारा गया लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा गोली से हुए घावों पर शहद लगाता था। वह घाव जल्दी भरने और संक्रमण रोकने के लिए यह तरीका अपनाता था।
मूसा को 4 दिन पहले मध्य कश्मीर के बडगाम के यूसमर्ग में सेना ने मार गिराया। वह जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधित लश्कर का मुख्य ऑपरेशनल कमांडर और 2025 के पहलगाम आतंकी हमले में शामिल था।
यह माना जाता है कि शुद्ध शहद के आयुर्वेदिक गुण घाव के टिशू रिकवरी को तेज करता है। साथ ही संक्रमण फैलने से भी बचाता है।
सितंबर में ही मारे गए एक और आतंकी यासिर के फोन में मूसा के शहद से उपचार किए गए घावों की तस्वीरें मिलीं।
ये तस्वीरें पाकिस्तानी हैंडलरों को भेजी गई थीं और उन्हें मूसा की सेहत की जानकारी दी गई थी।

सेना ने आतंकी मूसा के मरने की खबर 29 सितंबर को दी थी, जबकि एनकाउंटर साइट की तस्वीरें 30 सितंबर को सामने आईं।
मूसा को ऑपरेशन शेरुवाली के दौरान गोली लगी थी
मूसा को राजौरी के डोरिमल-गंभीर मुगला इलाके में ऑपरेशन शेरुवाली के दौरान गोली लगी थी। दो आतंकियों की तलाश में यह ऑपरेशन 45 दिनों से ज्यादा चला था। मूसा और उसका साथी यासिर पुंछ-राजौरी के जंगलों में छिपे थे।
सुरक्षा घेरा होने के कारण मूसा को इलाज नहीं मिल पा रहा था, इसलिए उसने घावों पर शहद लगाया। हैंडलर यह निर्देश दे रहे थे कि शहद शुद्ध होना चाहिए। उनका मानना था कि इससे मूसा के घाव जल्दी भरने में मदद मिलेगी।
परवेज मुशर्रफ की VVIP सुरक्षा टीम में तैनात था मूसा

पाकिस्तान सेना का आइडेंटिटी कार्ड।
न्यूज एजेंसी ANI के सूत्रों के मुताबिक,मोहम्मद आसिफ उर्फ मूसा का जन्म 7 मार्च 1980 को हुआ था। वह 2000 में PA-3106947 सर्विस नंबर के साथ पाकिस्तान सेना में भर्ती हुआ। बाद में हवलदार के पद से रिटायर हुआ।
2005 में मोहम्मद आसिफ को स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) में शामिल किया गया। 4 कमांडो ‘यलगार’ बटालियन में भी रहा। 2006 से उसकी पोस्टिंग बलूचिस्तान में रही।
2006 से 2009 के बीच मूसा ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की VVIP सुरक्षा टीम के सदस्य के तौर पर भी काम किया था।
शहद से घाव का इलाज व्रण चिकित्सा कहलाता है
मेडिकल एक्सपर्ट्स ने कहा कि जंगल में मूसा का यह तरीका घावों के इलाज से जुड़े पुराने आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित था। ऑल इंडिया डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन के अध्यक्ष डॉ. आरपी पाराशर ने इसकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में सुश्रुत संहिता जैसे ग्रंथों में घाव की देखभाल के लिए शहद का इस्तेमाल बताया गया है। आयुर्वेद में इसे व्रण चिकित्सा कहा जाता है। इसमें शहद के शोधन यानी सफाई और रोपण यानी घाव भरने वाले गुणों का इस्तेमाल होता है।
डॉ. पाराशर ने कहा, “आज की रिसर्च से इन बातों की संभावित वजहें समझ आती हैं। शहद की ज्यादा ऑस्मोटिक एक्टिविटी, एसिडिक pH और कुछ तरह के शहद में हाइड्रोजन पेराॅक्साइड बनना शामिल है।”
गोली के घाव पर स्टेराइल मेडिकल-ग्रेड शहद असर करेगा
शहद में मौजूद अन्य एंटीमाइक्रोबियल तत्व भी बैक्टीरिया को बढ़ने से रोक सकते हैं। हालांकि, उन्होंने बंदूक की गोली के घावों के इलाज में सावधानी बरतने को कहा।
डॉ. पाराशर ने कहा कि घाव में गोली के बचे हुए कण इलाज में रुकावट डाल सकते हैं। साथ ही, क्लिनिकल इलाज में संक्रमण रोकने के लिए स्टेराइल मेडिकल-ग्रेड शहद का इस्तेमाल होना चाहिए।
फूड साइंस एंड इंजीनियरिंग पर प्रकाशित एक रिसर्च पेपर के मुताबिक, घाव पर शहद लगाने से उसके भरने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। इसमें कहा गया है, “शहद की पट्टी घाव भरने, संक्रमण से बचाने और दर्द कम करने में मदद कर सकती है।”
वेटरनरी एक्सपर्ट डॉ. जहांजेब सिरवाल ने फार्माकोलॉजी की पढ़ाई का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि शहद एक ऑस्मोटिक एजेंट की तरह काम करता है। यह घाव से तरल बाहर खींचता है। इससे मरे हुए टिशू हटते हैं और सूजन कम होती है।
डॉ. सिरवाल ने कहा कि इससे उन जगहों पर भी मदद मिल सकती है, जहां सामान्य इलाज मुश्किल होता है। जंगल में रहने वाले लोगों के लिए जलने या चोट लगने पर शहद एक आसान तरीका बन जाता है। इसका इस्तेमाल अक्सर मवेशियों पर भी किया जाता है।
मूसा पर एक दर्जन से ज्यादा हमलों का आरोप
मूसा को मार गिराना जम्मू-कश्मीर में सक्रिय बड़े आतंकी कमांडरों में से एक के खिलाफ पांच साल से चल रही तलाश का अंत है। मूसा सुरक्षा बलों और आम लोगों पर हुए एक दर्जन से ज्यादा बड़े आतंकी हमलों में सीधे शामिल था।
उसने अप्रैल 2023 में पुंछ के भट्टा दुरियां में हुए हमले की साजिश रची थी। इसमें पांच सैनिक मारे गए थे। इसके बाद मई 2023 में राजौरी के कांडी जंगल में धमाका हुआ था। इसमें पांच कमांडो मारे गए थे।
दिसंबर 2023 में उसने पुंछ के डेरा की गली में हुए घात लगाकर हमले का नेतृत्व किया था। इसमें सेना के चार जवानों की मौत हुई थी। मई 2024 में शशितार के पास भारतीय वायुसेना के काफिले को निशाना बनाया गया था। इसमें वायुसेना का एक जवान मारा गया था।
2024 तक मूसा ने आम लोगों और अहम ढांचों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था।20 अक्टूबर को गंदरबल में गगनगीर टनल प्रोजेक्ट के निर्माण शिविर पर हमला हुआ था। इसमें एक स्थानीय डॉक्टर समेत सात लोग मारे गए थे।
इसके चार दिन बाद उसके मॉड्यूल ने बुटापथरी में सेना के वाहन पर घात लगाकर हमला किया। इसमें दो सैनिक और दो सिविल डिफेंस पोर्टर मारे गए थे।
सितंबर में अब तक 5 आतंकियों को मारा जा चुका
17 सितंबर: उधमपुर में दो पाकिस्तानी आतंकी मारे गए

मारे गए पाकिस्तानी आतंकी जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े थे।
प्रमुख आतंकी हमले जिनमें मूसा शामिल रहा
4 अगस्त 2023 (हलन, कुलगाम): सेना पर हमला किया, जिसमें 4 जवान शहीद हुए।
21 दिसंबर 2023 (DKG, पुंछ): सेना की गाड़ियों पर हमला, जिसमें 5 जवान शहीद हुए।
4 मई 2024 (शाहसितार, पुंछ): वायुसेना (IAF) के काफिले पर हमला, जिसमें 1 एयर वॉरियर शहीद और 5 घायल हुए।
9 जून 2024 (रियासी): शिव खोड़ी जा रहे तीर्थयात्रियों की बस पर हमला, जिसमें 9 श्रद्धालुओं की जान गई और 43 घायल हुए।
24 अक्टूबर 2024 (बूटापाथरी, बारामूला): सेना के काफिले पर हमला, जिसमें 2 जवान और 2 आम नागरिक मारे गए।
9 सितंबर: डोडा में आतंकी का सड़ा शव मिला था

डोडा में 9 सितंबर को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक पाकिस्तानी आतंकी का सड़ा हुआ शव मिला था। SOG डोडा, राष्ट्रीय राइफल्स (RR) और CRPF की संयुक्त टीम ने सर्च ऑपरेशन के दौरान शव बरामद किया। उसके पास से नाइट विजन क्षमता वाली M4 राइफल भी मिली है।
पुलिस के मुताबिक, आतंकी को 6 सितंबर को सेओजधार के घने जंगलों में हुई मुठभेड़ में मारा गया था, लेकिन दुर्गम इलाके के कारण उसका शव बाद में बरामद हुआ।
5 सितंबर: पुंछ अटैक में शामिल पाकिस्तानी आतंकी यासिर ढेर जम्मू-कश्मीर के बडगाम में मारे गए आतंकी यासिर की शनिवार को पहचान हो गई। यासिर आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा था। यासिर 2024 में पुंछ में एयरफोर्स के काफिले पर फायरिंग में शामिल था। इस हमले में एक जवान शहीद हो गया था।














