नई दिल्ली58 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दिल्ली में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रविवार को कहा कि जब पूरी दुनिया पाकिस्तान के साथ खड़ी थी तब रूस ने भारत का साथ दिया।
दिल्ली में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने कहा कि,
भारत-रूस के रिश्ते लंबे समय से अच्छे रहे हैं। नई दिल्ली के लिए मॉस्को के साथ रिश्ते सिर्फ आज की स्थिति से तय नहीं होते।

दरअसल रूस ने बीते 70 साल में कश्मीर समेत 4 अहम मसलों पर भारत का समर्थन किया है।

जयशंकर के बयान की 3 बड़ी बातें
- दुनिया की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। अमेरिका की विदेश नीति बदली है, जिसकी वजह से वह अकेला नजर आ रहा है।
- चीन का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। अब अमेरिका और चीन की होड़ का असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
- अब कई देश सिर्फ अमेरिका या चीन में से किसी एक के साथ खड़े होने के बजाय अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग देशों से रिश्ते बना रहे हैं। जहां फायदा दिखता है, वहां साथ काम कर रहे हैं।
रूस ने UN में भारत के लिए वीटो इस्तेमाल किया था
20 फरवरी 1957 को ऑस्ट्रेलिया, क्यूबा, ब्रिटेन और अमेरिका ने कश्मीर को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव रखा था। इसमें कश्मीर में अस्थायी UN फोर्स भेजने के विचार को आगे बढ़ाने की बात थी।
प्रस्ताव को 9 देशों का समर्थन मिला, लेकिन रूस (तब सोवियत संघ) ने वीटो कर दिया, इसलिए प्रस्ताव पास नहीं हुआ।
इसके एक दिन बाद, 21 फरवरी 1957 को एक दूसरा प्रस्ताव रखा गया। इसमें UNSC के अध्यक्ष को भारत और पाकिस्तान से बातचीत कर समाधान के रास्ते तलाशने के लिए भेजने की बात थी। यह प्रस्ताव पास हो गया।
1971 में अमेरिका ने पाकिस्तान का समर्थन किया था
1965, भारत-पाक युद्ध – चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया। उसने भारत पर दबाव बढ़ाने के लिए अपनी सीमा पर सैनिक तैनात किए। ईरान और तुर्किये ने भी पाकिस्तान का समर्थन किया। ईरान ने उसे हथियार और ईंधन भी दिया।
1971, बांग्लादेश युद्ध – अमेरिका पाकिस्तान के समर्थन में था। उसने अपना युद्धपोत बंगाल की खाड़ी की ओर भेजा था। चीन भी पाकिस्तान के साथ खड़ा था।
1971 में ईरान का समर्थन – ईरान ने भी पाकिस्तान की मदद की। उसने पाकिस्तान के लिए हथियार जुटाने में मदद की और सैन्य सामान उपलब्ध कराया।
जयशंकर बोले- भारत ने रूस-यूक्रेन के बीच जंग रोकने पर बातचीत की
जयशंकर ने यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत का पुराना रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत, कूटनीति और समझौते का रास्ता अपनाना जरूरी है।
प्रधानमंत्री मोदी भी कई बार यही बात कह चुके हैं। उन्होंने 2022 में रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था कि आज का दौर युद्ध का नहीं है।
जयशंकर ने कहा कि भारत अब सिर्फ शांति की अपील करने तक सीमित नहीं है। हाल के महीनों में भारत ने रूस और यूक्रेन दोनों से बातचीत की है।
इन बातचीत में ब्लैक सी में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही, अनाज और ऊर्जा के निर्यात और अहम बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

मोदी BRICS समिट के दूसरे दिन 13 सितंबर को नई दिल्ली में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से हाथ मिलाते हुए।
एक हफ्ते में जयशंकर ने दूसरी बार अमेरिका पर तंज कसा
जयशंकर ने रविवार को एक हफ्ते में दूसरी बार अमेरिका को लेकर भी तंज कसा उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में दो बड़े बदलाव दिख रहे हैं-
- पहला: अमेरिका का दुनिया के लिए रवैया बदल रहा है।
- दूसरा: चीन तेजी से मजबूत हो रहा है।
उनके मुताबिक, अमेरिका अपनी नीतियों के कारण दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है। वहीं चीन का बढ़ता असर देशों के बीच मुकाबला बढ़ा रहा है। अब दूसरे देश भी अपनी ताकत और प्रभाव का इस्तेमाल फायदे के लिए कर रहे हैं।
5 दिन पहले कहा था- अमेरिका भारत की चिंता नहीं समझता
29 सितंबर को न्यूयॉर्क के एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में जयशंकर ने अमेरिका पर बयान दिया था।
उस कार्यक्रम में भारत-अमेरिका रिश्तों पर पूछे गए सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा था कि भारत की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक पाकिस्तान से आने वाला आतंकवाद है।
अगर अमेरिका इस चिंता को पूरी तरह नहीं समझता या इसकी गंभीरता को महसूस नहीं करता, तो इसका असर भारत-अमेरिका रिश्तों पर पड़ता है।

पूर्व अमेरिकी राजनयिक डेनियल रसेल ने एशिया सोसाइटी के कार्यक्रम में जयशंकर के साथ बातचीत की थी। इसी दौरान उन्होंने यह बयान दिया था।
————————
यह खबर भी पढ़ें…
पुतिन बोले-मोदी दोस्त, फिर भी जंग रोकने को कहते हैं: उनके पास अच्छे सुझाव; PM 5 मौकों पर यूक्रेन जंग का मुद्दा उठा चुके

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार यूक्रेन युद्ध खत्म करने की बात उठाते हैं। वह हर मुलाकात में युद्ध रोकने और शांति का रास्ता निकालने पर बात करते हैं। पूरी खबर पढ़ें…














