प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने और कर्ज घटाने पर सरकार का जोर, निर्मला सीतारमण ने बताई योजना | ACTPnews.com

भारत सरकार प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने, महंगाई पर नियंत्रण रखने और देश के वित्तीय घाटे को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में कहा कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद सरकार आम लोगों पर आर्थिक दबाव कम रखने और देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रही है।

2030 तक GDP के 50 प्रतिशत तक कर्ज लाने का लक्ष्य

वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश के कर्ज को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 50 प्रतिशत तक लाना है। इसके लिए राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने और सरकारी वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया के कई देशों को कर्ज से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। भारत भी इन वैश्विक परिस्थितियों से प्रभावित हुआ, लेकिन सरकार वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए कदम उठा रही है।

प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास

निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार देश की प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के लिए विभिन्न उपाय कर रही है। कोविड महामारी, अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी परिस्थितियों के बावजूद आम जनता पर इन चुनौतियों का असर कम रखने की कोशिश की जा रही है।

सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं में लोगों की आय बढ़ाना, अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखना और विकास की गति को बनाए रखना शामिल है।

महंगाई पर नियंत्रण और किसानों के हितों पर ध्यान

वित्त मंत्री ने महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आवश्यक कृषि उत्पादों की उपलब्धता बनाए रखने और घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव कम करने के लिए कदम उठाए गए हैं।

उन्होंने चावल के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे फैसलों का उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी से बचाना था। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) उपलब्ध कराने के महत्व पर भी जोर दिया गया।

रुपये की कीमत पर RBI की भूमिका

भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव को लेकर वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) मुद्रा में अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए कदम उठाता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि केंद्रीय बैंक रुपये की विनिमय दर को किसी एक निश्चित स्तर पर बनाए रखता है।

वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में होने वाले बदलावों का असर मुद्रा बाजार पर पड़ सकता है।

SIR प्रक्रिया पर भी रखी राय

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विरोध के संबंध में सीतारमण ने कहा कि इस मामले में विभिन्न कानूनी प्रक्रियाएं चल रही हैं। उन्होंने संकेत दिया कि संबंधित पक्ष न्यायालयों का रुख कर सकते हैं और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख सकते हैं।

तमिलनाडु सरकार की उधारी नीति पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में किसी एक राज्य की वित्तीय स्थिति पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।

सरकार के सामने अब आर्थिक विकास को बनाए रखने, महंगाई के प्रभाव को कम करने और कर्ज के बोझ को नियंत्रित करने जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। इन प्रयासों का आम लोगों की आय और जीवन स्तर पर कितना असर पड़ता है, यह आने वाले वर्षों में महत्वपूर्ण रहेगा।

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