Supreme Court Aadhaar Card Usage Hearing Today | ACTPnews

याचिकाकर्ता का दावा है कि आधार अधिनियम की धारा 9 बताती है कि आधार नागरिकता या डोमिसाइल का प्रमाण नहीं है। - Dainik Bhaskar


नई दिल्ली14 घंटे पहले

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याचिकाकर्ता का दावा है कि आधार अधिनियम की धारा 9 बताती है कि आधार नागरिकता या डोमिसाइल का प्रमाण नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र और राज्यों से उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें आरोप लगाया गया है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल नागरिकता, मूल निवास और पते के सबूत के तौर पर गलत तरीके से किया जा रहा है। याचिका में मांग की गई है कि इसके इस्तेमाल को सिर्फ पहचान की पुष्टि (आइडेंटिटी वेरिफिकेशन) तक ही सीमित रखने के निर्देश दिए जाएं।

CJI सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर केंद्र, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किया।

याचिका में केंद्र, राज्यों और चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि आधार का इस्तेमाल सिर्फ़ पहचान के सबूत के तौर पर हो, न कि नागरिकता, मूल निवास, पते और जन्म तिथि के सबूत के तौर पर।

याचिकाकर्ता के 2 तर्क

  • आधार अधिनियम की धारा 9 स्पष्ट रूप से बताती है कि आधार नागरिकता या डोमिसाइल का प्रमाण नहीं है।
  • UIDAI की 22 अगस्त 2023 की अधिसूचना में भी स्पष्ट किया गया है कि आधार केवल पहचान का प्रमाण है, नागरिकता, पते या जन्मतिथि का नहीं।

घुसपैठियों और अवैध प्रवासियों को आसानी से मिल रहे दूसरे दस्तावेज

आधार का इस्तेमाल स्कूलों में एडमिशन, संपत्ति खरीदने, जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जैसी प्रक्रियाओं में उम्र, नागरिकता और निवास के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है। याचिका में दावा किया गया है कि इसी वजह से घुसपैठिए और अवैध प्रवासी भी आधार के आधार पर अन्य दस्तावेज हासिल कर रहे हैं।

वोटर रजिस्ट्रेशन वेरिफिकेशन पर भी सवाल उठाए

याचिकाकर्ता ने वोटर रजिस्ट्रेशन वेरिफिकेश प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका के अनुसार फॉर्म-6 के तहत दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं है और इससे ऐसे लोगों के नाम भी मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं जिनके पास जरूरी वैध दस्तावेज नहीं हैं।

याचिका में चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सत्यापन ढांचे में व्यापक सुधार की मांग की गई है। इसके साथ ही एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति बनाए जाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हों।

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- आधार वैध, लेकिन सीमाओं के साथ

सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2018 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 4:1 के बहुमत से आधार अधिनियम को संवैधानिक माना, लेकिन कुछ प्रावधान रद्द कर दिए।

कोर्ट ने कहा बैंक खाते से, मोबाइल सिम से आधार लिंक करना अनिवार्य नहीं। स्कूल एडमिशन के लिए आधार अनिवार्य नहीं। लेकिन सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं में आधार का उपयोग वैध है।

जानिए आधार अधिनियम क्या है

आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाओं की लक्षित डिलीवरी) अधिनियम, 2016 वह कानून है जिसके तहत आधार संख्या जारी करने, उसके उपयोग, डेटा की सुरक्षा और UIDAI के कामकाज का कानूनी ढांचा तय किया गया। यह कानून 26 मार्च 2016 को लागू हुआ था। अधिनयिम में यह बात स्पष्ट की गई है कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। आधार केवल यह दर्शाता है कि व्यक्ति भारत का निवासी है।

देश में आधार कार्ड सरकारी और अन्य सर्विस में जरूरी

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